अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) के कार्यकारी निदेशक सागर अडानी ने भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर होने वाले युद्धों और संघर्षों के दुष्प्रभावों से बचने के लिए देश में मजबूत घरेलू बुनियादी ढांचे का निर्माण करना अनिवार्य है. इकोनॉमिस्ट एंटरप्राइज द्वारा आयोजित ‘रिजिलिएंट फ्यूचर्स समिट’ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब राष्ट्रों को अपनी प्राथमिकता ‘विकास की गति’ से हटाकर ‘झटकों को सहने की क्षमता’ पर केंद्रित करनी चाहिए.
वैश्विक संकटों से सीख
सागर अडानी ने कहा कि हमने देखा है कि कैसे एक क्षेत्र का संघर्ष दूसरे महाद्वीप की सप्लाई चेन को बाधित कर देता है और ऊर्जा बाजार के झटके रातों-रात अर्थव्यवस्थाओं को हिला देते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि विकसित भारत @2047 का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए भारत को अगले दो दशकों में लगभग 2,000 गीगावाट नई क्षमता जोड़ने की आवश्यकता है. यह कोई क्रमिक वृद्धि नहीं, बल्कि एक ‘संरचनात्मक छलांग’ होगी.
ऊर्जा: विकास की आधारशिला
अडानी ने ऊर्जा को हर क्षेत्र की बुनियाद बताया. उन्होंने तर्क दिया कि जल सुरक्षा के लिए डिसॅलिनेशन और वितरण, खाद्य सुरक्षा के लिए उर्वरक और सिंचाई, और डिजिटल नेतृत्व के लिए डेटा सेंटर व AI—इन सभी को भारी मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता है. उन्होंने चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि तेल और गैस की कमी के बावजूद, चीन ने कोयला, जल विद्युत, परमाणु और नवीकरणीय ऊर्जा में घरेलू क्षमता और रणनीतिक भंडार बनाकर खुद को मजबूत किया है.
‘पोर्टफोलियो अप्रोच’ की वकालत
भारत के भविष्य के लिए उन्होंने ‘पोर्टफोलियो अप्रोच’ अपनाने का सुझाव दिया. उन्होंने कहा, “नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार जरूरी है, लेकिन जमीन और निरंतरता की सीमाओं के कारण हमें जल विद्युत, कुशल थर्मल और परमाणु ऊर्जा जैसे सभी स्रोतों का उपयोग करना होगा.” उनके अनुसार, बिना स्थिर और स्केलेबल ‘बेहलोद पावर’ के ऊर्जा सुरक्षा का गणित सफल नहीं हो सकता.
अडानी समूह की प्रतिबद्धता
इस विजन को साकार करने के लिए सागर अडानी ने अडानी समूह की 100 अरब डॉलर की निवेश प्रतिबद्धता को दोहराया, जो वैश्विक स्तर पर ऊर्जा परिवर्तन के लिए सबसे बड़ी निजी निवेश योजनाओं में से एक है. उन्होंने कहा कि समूह केवल ऊर्जा ही नहीं, बल्कि बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स और डेटा केंद्रों के माध्यम से एक ऐसा एकीकृत ढांचा बना रहा है जो देश को आत्मनिर्भर बनाएगा.उन्होंने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि भारत का मजबूत होना केवल 140 करोड़ लोगों के भविष्य के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए भी आवश्यक है.


