Wednesday, April 29, 2026

FSSAI ने पैन मसाला की प्लास्टिक पैकिंग को हटाने और उसके स्थान पर कागज या सेल्युलोज जैसे पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को अपनाने का प्रस्ताव दिया है.

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भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए पान मसाला, गुटखा और तंबाकू उत्पादों की पैकेजिंग के लिए प्लास्टिक के उपयोग को पूरी तरह समाप्त करने का प्रस्ताव दिया है. मंगलवार को जारी इस ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में सुझाव दिया गया है कि इन उत्पादों के लिए अब केवल कागज, सेलूलोज़ और अन्य इको-फ्रेंडली (पर्यावरण के अनुकूल) सामग्रियों का ही उपयोग किया जाएगा.

प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य
FSSAI द्वारा खाद्य सुरक्षा और मानक (पैकेजिंग) विनियम, 2018 में संशोधन का यह प्रस्ताव स्थायी और सुरक्षित पैकेजिंग प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए है. प्राधिकरण का मानना है कि इस बदलाव से न केवल कचरा प्रबंधन में सुधार होगा, बल्कि यह कदम देश के ‘प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016’ के साथ भी तालमेल बिठाएगा.

क्या होगा नया बदलाव?
नए प्रस्ताव के अनुसार, ‘खाद्य सुरक्षा और मानक (पैकेजिंग) संशोधन विनियम, 2026’ के तहत

प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध
विनाइल एसीटेट, मैलिक एसिड और विनाइल क्लोराइड कोपोलिमर सहित किसी भी प्रकार की प्लास्टिक सामग्री का उपयोग गुटखा, तंबाकू और पान मसाला की पैकेजिंग में नहीं किया जा सकेगा.

वैकल्पिक सामग्री: निर्माताओं को अब कागज, पेपरबोर्ड और सेलूलोज़ जैसे प्राकृतिक रूप से प्राप्त विकल्पों का उपयोग करना होगा.

सैलून/पाउच पर असर: वर्तमान में बाजार में बिकने वाले अधिकांश छोटे पाउच प्लास्टिक और एल्युमीनियम की परतों से बने होते हैं. नए नियमों के बाद ये पूरी तरह बदल जाएंगे.

निर्माताओं के पास विकल्प
स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, यह प्रस्ताव निर्माताओं पर पूरी तरह से पाबंदी नहीं लगाता बल्कि उन्हें सुरक्षित विकल्पों की ओर मोड़ता है. टिन और कांच के कंटेनर जैसे स्थापित पैकेजिंग स्वरूपों का उपयोग जारी रहेगा. इससे उन ब्रांडों को लचीलापन मिलेगा जो प्रीमियम पैकेजिंग का उपयोग करते हैं.

चुनौतियां और प्रतिक्रिया
विशेषज्ञों का कहना है कि प्लास्टिक से कागज पर शिफ्ट होना उद्योग के लिए एक बड़ी वित्तीय चुनौती हो सकती है. कागज आधारित पैकेजिंग में नमी से बचाव सुनिश्चित करना तकनीकी रूप से कठिन और महंगा है, जिससे छोटे पाउच की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है.

FSSAI ने इस ड्राफ्ट पर अगले 30 दिनों के भीतर सभी हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं. सुझावों पर विचार करने के बाद ही इसे अंतिम रूप देकर लागू किया जाएगा.़

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