धनबाद: किशोरावस्था जिंदगी का सबसे संवेदनशील दौर माना जाता है. इसी उम्र में शरीर, सोच और व्यवहार में तेजी से बदलाव आते हैं. कई बार बच्चे अपनी समस्याएं न तो परिवार से साझा कर पाते हैं और न ही दोस्तों से. ऐसे समय में सही मार्गदर्शन उनकी जिंदगी की दिशा बदल सकता है. धनबाद का युवा मैत्री केंद्र पिछले दो दशकों से यही काम कर रहा है. राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत संचालित इस केंद्र ने अपने उत्कृष्ट कार्यों के दम पर झारखंड में पहला और पूरे देश में तीसरा स्थान हासिल किया है. इस उपलब्धि के लिए केंद्र की काउंसलर रानी प्रसाद को उपायुक्त और एसएसपी ने सम्मानित किया.
राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम यानी आरकेएसके के तहत सदर अस्पताल में संचालित युवा मैत्री केंद्र आज हजारों किशोर-किशोरियों के लिए उम्मीद और भरोसे का केंद्र बन चुका है. केंद्र में आने वाले बच्चों को न केवल स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी जाती है, बल्कि मानसिक तनाव, व्यवहारगत बदलाव, करियर की चिंता, पारिवारिक समस्याओं और किशोरावस्था से जुड़ी
हर साल हजारों बच्चे उठाते हैं इस केंद्र का फायदा
पिछले वर्ष ही चार हजार से अधिक किशोर-किशोरियों ने यहां परामर्श प्राप्त किया. हर साल हजारों बच्चे इस केंद्र की सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं. केंद्र की टीम स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और समुदायों तक पहुंचकर जागरूकता अभियान भी चलाती है, ताकि अधिक से अधिक किशोर-किशोरियां सही जानकारी और मार्गदर्शन प्राप्त कर सकें.
10 से 19 वर्ष की उम्र के बच्चों में होते हैं कई बदलाव
रानी प्रसाद के अनुसार 10 से 19 वर्ष की उम्र बच्चों के जीवन का सबसे संवेदनशील दौर होती है. इस दौरान शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं, मानसिक दबाव बढ़ता है और सामाजिक वातावरण भी तेजी से बदलता है. पढ़ाई का दबाव, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, भविष्य को लेकर चिंता और बदलती जीवनशैली बच्चों को मानसिक रूप से प्रभावित करती है.

काउंसलर करते हैं मदद
कई बार बच्चे अपनी परेशानियों को किसी के साथ साझा नहीं कर पाते और अवसाद, तनाव या भ्रम जैसी स्थितियों का सामना करने लगते हैं. ऐसे समय में युवा मैत्री केंद्र के काउंसलर उनकी बातें सुनते हैं, उन्हें समझते हैं और सही दिशा देने का प्रयास करते हैं. यही कारण है कि यह केंद्र किशोरों के बीच लगातार लोकप्रिय हो रहा है.
टीम लगातार स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर बच्चों को करते हैं जागरूक
युवा मैत्री केंद्र केवल अस्पताल तक सीमित नहीं है. इसकी टीम लगातार स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती है. किशोरियों को व्यक्तिगत स्वच्छता, पोषण, एनीमिया से बचाव और फोलिक एसिड जैसी सुविधाओं के बारे में जानकारी दी जाती है. वहीं किशोरों को मानसिक स्वास्थ्य, नशे से बचाव, जीवन कौशल और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक किया जाता है.
कई अभिभावक भी अपने बच्चों को लेकर केंद्र पहुंचते हैं. मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं वाले बच्चों को विभिन्न अस्पतालों और संस्थानों से भी यहां रेफर किया जाता है. यही वजह है कि यह केंद्र समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन रहा है.
धनबाद को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान
युवा मैत्री केंद्र की इसी सक्रियता और बेहतर कार्यप्रणाली का परिणाम है कि धनबाद को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है. केंद्र की पहुंच, परामर्श लेने वाले बच्चों की संख्या, जागरूकता कार्यक्रमों की प्रभावशीलता और सेवा की गुणवत्ता के आधार पर धनबाद को झारखंड में पहला और देश में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है.
क्या कहते हैं केंद्र के काउंसलर और उपायुक्त
इस उपलब्धि पर सदर अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम में काउंसलर रानी प्रसाद को उपायुक्त आदित्य रंजन और वरीय पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने सम्मानित किया. अधिकारियों ने इसे पूरे जिले और स्वास्थ्य विभाग के लिए गर्व का क्षण बताया. उपायुक्त आदित्य रंजन का कहना है कि किशोरावस्था में बच्चों के सामने कई तरह की चुनौतियां होती हैं. शारीरिक और मानसिक बदलावों के साथ-साथ व्यवहार में भी परिवर्तन आता है. कई बार बच्चे जोखिम भरे फैसले लेते हैं या गलत संगत का शिकार हो जाते हैं. ऐसे में काउंसलर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है.
उन्होंने कहा कि कई बच्चे अपनी बातें परिवार के सदस्यों तक से साझा नहीं कर पाते. ऐसे समय में युवा मैत्री केंद्र उन्हें एक सुरक्षित और भरोसेमंद मंच उपलब्ध कराता है, जहां उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना और समझा जाता है.
आज जब मोबाइल, सोशल मीडिया और बदलती जीवनशैली के दौर में किशोर मानसिक और सामाजिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं, तब युवा मैत्री केंद्र जैसी पहल उनके लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभा रही है. राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान इस बात का प्रमाण है कि धनबाद का यह केंद्र केवल परामर्श नहीं दे रहा, बल्कि हजारों युवाओं के भविष्य को सही दिशा देने का काम कर रहा है. यही वजह है कि आज यह केंद्र झारखंड में नंबर वन और पूरे देश में तीसरे स्थान पर अपनी पहचान बना चुका है.


