रांची, 15 अक्टूबर 2026: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, ओएमआर शीट में हेराफेरी और अन्य अनियमितताओं की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने पतंजलि IAS एकेडमी के निदेशक संजीत कुमार के खिलाफ कई डिजिटल और तकनीकी साक्ष्य जुटाने का दावा किया है। इस मामले में रांची की अदालत ने संजीत कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
CID के अनुसार, संजीत कुमार के दो मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के विश्लेषण में पता चला कि वह फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर (FRO) परीक्षा में सफल हुए 119 अभ्यर्थियों के संपर्क में था। इस परीक्षा में कुल 743 अभ्यर्थियों के सफल होने की जानकारी दी गई है।
रिश्तेदार को पास कराने के लिए 20 लाख रुपये की डील का आरोप
जांच एजेंसी का आरोप है कि FRO परीक्षा में सफल अभ्यर्थी ऋतिक रोशन और पंकज प्रसून्न संजीत कुमार के रिश्तेदार हैं। CID के मुताबिक, ऋतिक रोशन को परीक्षा में सफल कराने के लिए कथित तौर पर 20 लाख रुपये की डील हुई थी और यह राशि किस्तों में दी गई थी।
जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि ऋतिक रोशन और पंकज प्रसून्न को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। CID के अनुसार, उनके बयानों और बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच में कथित वित्तीय लेन-देन से जुड़े तथ्य सामने आए हैं।
हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।
धर्मेंद्र कुमार की कार के डाउन पेमेंट में भुगतान का दावा
CID की जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते के कंप्यूटर ऑपरेटर और कथित मेधा घोटाले के मास्टरमाइंड धर्मेंद्र कुमार की स्विफ्ट डिजायर कार के डाउन पेमेंट के लिए संजीत कुमार ने 1.69 लाख रुपये दिए थे।
जांच एजेंसी के मुताबिक, संजीत कुमार ने अपने एक्सिस बैंक खाते से 6 और 10 अप्रैल को धर्मेंद्र कुमार की पत्नी के बैंक खाते में राशि भेजी थी। CID ने इस लेन-देन को मामले की जांच का अहम हिस्सा बताया है।
ब्लैकलिस्ट एजेंसी को काम देने पर भी सवाल
मामले में परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) की भूमिका भी जांच के दायरे में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, JPSC ने एजेंसी को 20 मई 2025 को ब्लैकलिस्ट किया था। इसके बावजूद आरोप है कि तत्कालीन अधिकारियों ने बिना टेंडर के नामांकन के आधार पर जून 2025 से उसे परीक्षा संचालन का काम सौंप दिया।
CID की जांच में एजेंसी के ठिकानों से जब्त चार कंप्यूटरों में FRO मुख्य परीक्षा 2026 की उत्तर पुस्तिकाएं मिलने की बात कही गई है। इस मामले में तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, एजेंसी कर्मी उस्मान और JPSC कर्मी मनोज तिर्की व सोनू कुमार के नाम भी सामने आए हैं।
13 सितंबर को हुई थी संजीत कुमार की गिरफ्तारी
रांची में पतंजलि IAS एकेडमी चलाने वाले संजीत कुमार को 13 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन्होंने अदालत में जमानत की अर्जी दाखिल की।
सुनवाई के दौरान CID की ओर से पेश अपर लोक अभियोजक ने कथित वित्तीय लेन-देन और अन्य साक्ष्य अदालत के सामने रखे। संजीत कुमार की ओर से दलील दी गई कि वह कोचिंग संस्थान संचालित करते हैं और उनके संपर्क में हजारों छात्र रहते हैं। हालांकि, अदालत ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार नहीं की।
परीक्षा व्यवस्था की निष्पक्षता पर उठे सवाल
JPSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े इस मामले ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जांच एजेंसी डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगी। तब तक आरोपितों को दोषी ठहराया जाना उचित नहीं है।
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