Thursday, October 15, 2026

बिहार में शिक्षकों और पुलिसकर्मियों के वेतन भुगतान पर रोक, ऑडिट रिपोर्ट के बाद जांच के आदेश.

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पटना, 15 अक्टूबर 2026: बिहार में शिक्षकों और पुलिसकर्मियों के वेतन भुगतान को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। महालेखाकार की ऑडिट रिपोर्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख सामने आने के बाद वित्त विभाग ने शिक्षा और पुलिस विभाग के वेतन भुगतान की जांच कराने का निर्देश दिया है। खबर के मुताबिक, इस फैसले से करीब 9 लाख शिक्षा कर्मियों और 1.30 लाख पुलिसकर्मियों का वेतन भुगतान प्रभावित हो सकता है।

वित्त सचिव विनय कुमार ने दोनों विभागों को पत्र भेजकर मामले की गहन जांच करने को कहा है। रिपोर्ट में पटना, भागलपुर, औरंगाबाद, सुपौल, बांका और समस्तीपुर समेत कई जिलों में वेतन भुगतान से जुड़ी कथित गड़बड़ियों का उल्लेख किया गया है।

जांच के बाद जारी होगा वेतन

उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि महालेखाकार की रिपोर्ट में अनियमितताओं की बात सामने आने के बाद यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकारी धन जनता का पैसा है और उसका सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

वित्त मंत्री के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद वेतन जारी करने पर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जांच में जो लोग दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

HRMS और CFMS पोर्टल पर गड़बड़ी का आरोप

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (HRMS) और व्यापक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (CFMS) से जुड़े रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ कर भुगतान में अनियमितताएं की गईं। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ मामलों में कर्मचारियों की नियुक्ति के समय ही पोर्टल पर वेतन की राशि गलत दर्ज की गई, जबकि कुछ भुगतान फर्जी बिलों के माध्यम से किए जाने की आशंका जताई गई है।

इन आरोपों की पुष्टि और जिम्मेदारी तय करने के लिए विभागीय जांच की जा रही है।

कई जिलों में कथित वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख

रिपोर्ट में वेतन खातों से जुड़े कई मामलों का जिक्र किया गया है। इसमें दावा किया गया है कि करीब 56 हजार कर्मचारियों के खातों में हर महीने 6 से 9 लाख रुपये तक के कथित फर्जी भुगतान का मामला सामने आया है। हालांकि, इस आंकड़े और भुगतान की प्रकृति की आधिकारिक जांच से पुष्टि होना बाकी है।

पटना सिटी के फतह नारायण सिंह अकादमी स्कूल में 76.71 लाख रुपये की कथित गड़बड़ी का उल्लेख किया गया है। वहीं, सुपौल जिले में एक लिपिक पर 11 शिक्षकों की कथित फर्जी आईडी बनाकर अपनी मां और सास के खातों में 1.83 करोड़ रुपये हस्तांतरित करने का आरोप लगाया गया है। समस्तीपुर और बांका में भी इसी तरह की अनियमितताओं की जानकारी सामने आने की बात कही गई है।

इन मामलों में संबंधित व्यक्तियों की जिम्मेदारी और आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

सैलरी स्लिप और ट्रेजरी रिकॉर्ड का होगा मिलान

वित्त विभाग ने वेतन भुगतान की प्रक्रिया की जांच के तहत सैलरी स्लिप और ट्रेजरी रिकॉर्ड का मिलान कराने की बात कही है। रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।

खबर में बताया गया है कि पटना, भागलपुर और सुपौल के मामलों के बाद राज्यभर में शिक्षकों, अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के पिछले पांच वर्षों के वेतन रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।

जांच के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई

सरकार का कहना है कि वेतन भुगतान से संबंधित कथित अनियमितताओं की जांच पूरी होने के बाद आगे का फैसला लिया जाएगा। जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले में कर्मचारियों के वेतन भुगतान पर रोक की अवधि, जांच की समयसीमा और प्रभावित कर्मियों को भुगतान जारी करने की प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी आधिकारिक आदेश के बाद स्पष्ट होगी।

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