Thursday, October 15, 2026

मुजफ्फरपुर में 140.95 करोड़ का मेगा लेदर पार्क शुरू, 2,100 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद.

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मुजफ्फरपुर, 15 अक्टूबर 2026: बिहार में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने की दिशा में मुजफ्फरपुर में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को मोतीपुर प्रखंड के महवल औद्योगिक क्षेत्र में मेगा लेदर, फुटवियर एवं एक्सेसरीज क्लस्टर और कॉमन फैसिलिटी सेंटर का उद्घाटन किया। करीब 140.95 करोड़ रुपये की लागत से विकसित इस परियोजना का उद्देश्य फुटवियर और चमड़े से जुड़े उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा देना और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार करना है।

इस औद्योगिक परिसर में जूते-चप्पल, बेल्ट, पर्स और अन्य संबंधित उत्पादों का निर्माण किया जा सकेगा। अब तक पांच कंपनियों को यहां जगह आवंटित की गई है। इनके माध्यम से करीब 2,100 लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान जताया गया है। हालांकि, वास्तविक नियुक्तियों की संख्या कंपनियों में उत्पादन शुरू होने और भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद ही स्पष्ट होगी।

तीन ब्लॉक में मिलेगी प्लग एंड प्ले सुविधा

मेगा लेदर पार्क में तीन ब्लॉक विकसित किए गए हैं। यहां जी प्लस-2 संरचना के तहत प्लग एंड प्ले सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इसका उद्देश्य उद्यमियों को तैयार औद्योगिक ढांचा उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें शुरुआत में भवन और बुनियादी सुविधाओं पर अधिक पूंजी खर्च न करनी पड़े।

इस सुविधा से कंपनियों को अपनी इकाइयां स्थापित करने और उत्पादन शुरू करने में सहूलियत मिलने की उम्मीद है। परियोजना के तहत औद्योगिक इकाइयों को भूमि और शेड आवंटित करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।

छोटे कारोबारियों को भी मिलेगा फायदा

पार्क में कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) बनाया गया है। इसमें करीब 8.5 करोड़ रुपये की आधुनिक मशीनें लगाई गई हैं। छोटे और मझोले उद्यमी इन मशीनों का इस्तेमाल निर्धारित शुल्क पर कर सकेंगे।

इससे छोटे कारोबारियों को महंगी मशीनें खरीदने के लिए बड़ी पूंजी लगाने की जरूरत कम हो सकती है। साझा मशीनों और सुविधाओं की मदद से वे उत्पादन की लागत नियंत्रित करने, उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने और कारोबार का विस्तार करने की दिशा में काम कर सकेंगे।

युवाओं और महिलाओं को दिया जाएगा प्रशिक्षण

परियोजना के तहत आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र के माध्यम से स्थानीय युवाओं और महिलाओं को फुटवियर डिजाइनिंग तथा चमड़े से जुड़े उत्पादों के निर्माण का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की गई है।

प्रशिक्षण के बाद अभ्यर्थियों को पार्क में स्थापित होने वाली कंपनियों में रोजगार मिलने की संभावना है। मशीन संचालन, डिजाइनिंग, गुणवत्ता जांच, पैकेजिंग, तकनीकी कार्य और उत्पादन प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में काम के अवसर बन सकते हैं। परिवहन, भंडारण और आपूर्ति शृंखला से जुड़े व्यवसायों में भी रोजगार की संभावनाएं पैदा हो सकती हैं।

बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (बियाडा) के माध्यम से विकसित इस परियोजना में आगे कर्मचारियों के लिए पुरुष और महिला हॉस्टल तथा रेल कनेक्टिविटी बेहतर करने की योजना भी बताई गई है।

मुजफ्फरपुर को लेदर हब बनाने की तैयारी

मेगा लेदर, फुटवियर एवं एक्सेसरीज क्लस्टर का उद्देश्य जूते-चप्पल, बैग, बेल्ट और अन्य संबंधित उत्पादों के निर्माण से जुड़ी कंपनियों को एक ही औद्योगिक परिसर में सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उद्योग विभाग और फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (FDDI) के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी किए गए हैं, जिससे उद्योग और फुटवियर डिजाइन के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं बनेंगी।

मुजफ्फरपुर उत्तर बिहार का प्रमुख व्यापारिक केंद्र है। यहां से सीतामढ़ी, शिवहर, दरभंगा, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण सहित कई जिलों तक कारोबार का संपर्क है। महवल औद्योगिक क्षेत्र में उत्पादन गतिविधियां बढ़ने से आसपास के इलाकों में परिवहन, गोदाम, पैकेजिंग, मशीनों की मरम्मत और माल की आपूर्ति जैसे सहायक कारोबारों को भी लाभ मिल सकता है।

हालांकि, मुजफ्फरपुर को देश के प्रमुख फुटवियर निर्माण केंद्रों में शामिल होने के लिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने, प्रशिक्षित श्रमिकों की उपलब्धता, कच्चे माल की आपूर्ति और बड़े बाजारों तक पहुंच सुनिश्चित करने की जरूरत होगी।

कारोबारियों को रोजगार बढ़ने की उम्मीद

स्थानीय कारोबारी सज्जन कुमार शर्मा ने लेदर पार्क की स्थापना का स्वागत करते हुए कहा कि इससे रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं। हालांकि, उन्होंने मुजफ्फरपुर की पारंपरिक आर्थिक पहचान शाही लीची और उससे जुड़े कारोबार की ओर भी ध्यान दिलाया।

उनका मानना है कि लेदर उद्योग के साथ लीची प्रसंस्करण, पैकेजिंग और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इससे जिले की अर्थव्यवस्था को अलग-अलग क्षेत्रों से मजबूती मिल सकती है।

स्थानीय निवासी पवन कुमार ने भी परियोजना से आसपास के युवाओं को रोजगार मिलने और क्षेत्र के विकास को गति मिलने की उम्मीद जताई। वहीं, नॉर्थ बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष श्याम भीमसेरिया ने फुटवियर निर्माण की संभावनाओं को देखते हुए इस पहल को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, यदि स्थानीय स्तर पर उत्पादन शुरू होता है, तो बाजार तक सामान पहुंचाने और उद्योगों के विस्तार में मदद मिल सकती है।

लीची उद्योग के साथ भी जरूरी है विकास

मुजफ्फरपुर की पहचान शाही लीची और उससे जुड़े कारोबार से भी है। ऐसे में जिले में औद्योगिक विकास को व्यापक बनाने के लिए लेदर पार्क के साथ कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना भी महत्वपूर्ण होगा।

लीची प्रसंस्करण, कोल्ड स्टोरेज, पैकेजिंग और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े उद्योगों के विस्तार से किसानों, छोटे कारोबारियों और परिवहन सेवाओं को नए अवसर मिल सकते हैं। इस तरह पारंपरिक कारोबार को मजबूत करते हुए नए औद्योगिक क्षेत्रों का विकास किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने 2030 से पहले रोजगार देने का लक्ष्य दोहराया

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2030 से पहले बिहार से बाहर मजदूरी करने जाने वाले लोगों के लिए राज्य में ही रोजगार के अवसर बढ़ाना है। इसके लिए उद्योगों का नेटवर्क विकसित करने और निवेश को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों से बिहार में निवेश करने की अपील की। उन्होंने कहा कि निवेश प्रस्तावों की समीक्षा कर जरूरत के अनुसार संबंधित क्षेत्रों के लिए नीतियां बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। उन्होंने जिला प्रशासन को औद्योगिक इकाइयों के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज करने का भी निर्देश दिया।

मुजफ्फरपुर से पटना तक रैपिड रेल की योजना

मुख्यमंत्री ने औद्योगिक विकास के साथ परिवहन और आधारभूत संरचना को मजबूत करने की योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने मुजफ्फरपुर से पटना और पटना से गयाजी तक रैपिड रेल चलाने की योजना पर काम करने की बात कही।

उन्होंने मुजफ्फरपुर के पताही में हवाई संपर्क से जुड़ी योजनाओं और शहर में ड्राई पोर्ट जैसी सुविधाएं विकसित करने की दिशा में प्रयासों का भी जिक्र किया। ऐसी सुविधाओं के विकसित होने से माल की ढुलाई और उत्पादों को दूसरे बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। इन योजनाओं की वास्तविक स्थिति और समयसीमा संबंधित विभागों की आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगी।

डेटा सेंटर और बिजली व्यवस्था के विस्तार पर जोर

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2030 से पहले बिहार में 1,000 मेगावाट क्षमता का डेटा सेंटर विकसित करने का लक्ष्य भी बताया। इसके साथ उन्होंने राज्य में डिजिटल आधारभूत संरचना के विस्तार की जरूरत पर जोर दिया।

उन्होंने अगले पांच वर्षों में औद्योगिक क्षेत्र को लगभग 10,000 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराने के लक्ष्य का उल्लेख किया। सरकार की ओर से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (MSME), बड़े उद्योगों और स्टार्टअप को बढ़ावा देने की बात भी कही गई।

मुख्यमंत्री ने उद्यमी योजना के तहत पात्र युवाओं को 10 लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराने का जिक्र किया। इसमें पांच लाख रुपये अनुदान और पांच लाख रुपये कम ब्याज पर ऋण के रूप में देने का प्रावधान बताया गया।

अब उत्पादन और नियुक्तियों पर रहेगी नजर

मुजफ्फरपुर के मेगा लेदर पार्क का उद्घाटन औद्योगिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत है। अब परियोजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि आवंटित जमीन और शेड पर कंपनियां कब तक उत्पादन शुरू करती हैं, कितने लोगों की नियुक्ति होती है और स्थानीय कारोबारियों को कितनी भागीदारी मिलती है।

बिजली, कच्चे माल की उपलब्धता, प्रशिक्षित श्रमिक, परिवहन, उत्पादों की गुणवत्ता और बाजार तक पहुंच जैसे पहलू भी महत्वपूर्ण होंगे। यदि इन क्षेत्रों में प्रभावी व्यवस्था बनती है, तो लेदर पार्क मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार का माध्यम बन सकता है।

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