भारतीय शेयर बाजार के लिए बुधवार का दिन उतार-चढ़ाव से भरा रहा. वैश्विक स्तर पर जारी राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आए अचानक उछाल के बावजूद, घरेलू शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद होने में सफल रहे. हालांकि, बाजार ने अपनी शुरुआती बढ़त का एक बड़ा हिस्सा कारोबारी सत्र के अंतिम घंटों में गंवा दिया.
बाजार का अंतिम आंकड़ा
कारोबार की समाप्ति पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 609.45 अंक (0.79%) की तेजी के साथ 77,496.36 पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 181.95 अंक (0.76%) चढ़कर 24,177.65 के स्तर पर स्थिर हुआ.
कच्चे तेल और यूएई के फैसले ने बढ़ाई चिंता
बाजार में आई शुरुआती मजबूती को कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने तगड़ा झटका दिया. इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट क्रूड की कीमतें 3 प्रतिशत से अधिक उछलकर $114.60 प्रति बैरल पर पहुंच गईं. इस तेजी के पीछे दो मुख्य कारण रहे:
अमेरिका-ईरान वार्ता: परमाणु समझौते को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत रुकने से सप्लाई बाधित होने की आशंका बढ़ गई है.
OPEC से यूएई का बाहर होना: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने 1 मई से तेल निर्यातक देशों के संगठन ‘ओपेक’ (OPEC) से बाहर होने का चौंकाने वाला फैसला लिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी अस्थिरता देखी जा रही है
सेक्टर और स्टॉक्स का हाल
बाजार को सहारा देने में दिग्गज कंपनियों का बड़ा हाथ रहा. निफ्टी में आईटीसी (ITC), टेक महिंद्रा और मारुति सुजुकी टॉप गेनर्स रहे. सेक्टोरल इंडेक्स में एफएमसीजी (FMCG) और रियल्टी इंडेक्स में सबसे ज्यादा खरीदारी देखी गई. इसके विपरीत, कंस्ट्रक्शन ड्यूरेबल्स और मीडिया सेक्टर पर दबाव रहा.
ब्रॉड मार्केट की बात करें तो निफ्टी मिडकैप में 0.07% की मामूली गिरावट रही, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स 0.65% की बढ़त के साथ बंद हुआ.
आगे की राह: क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए 24,200 का स्तर एक मजबूत रेजिस्टेंस (रुकावट) बना हुआ है. यदि बाजार नीचे की ओर गिरता है, तो 24,000–24,100 का स्तर सपोर्ट का काम करेगा. विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसलों पर रहेगी. साथ ही, भू-राजनीतिक तनाव और कंपनियों के तिमाही नतीजों के आधार पर बाजार की चाल तय होगी.


