मुंबई: भारत की सबसे बड़ी बिस्किट निर्माता और ‘पारले-जी’ जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड की मूल कंपनी, पारले प्रोडक्ट्स, भारतीय पूंजी बाजार में कदम रखने की योजना बना रही है. हालिया उद्योग रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी अपने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) के लिए शुरुआती प्रक्रिया शुरू कर चुकी है, जो घरेलू एफएमसीजी सेक्टर के सबसे चर्चित घटनाक्रमों में से एक माना जा रहा है.
निवेश बैंकों के साथ रणनीतिक चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, चौहान परिवार के स्वामित्व वाली यह कंपनी आईपीओ की रूपरेखा तैयार करने के लिए कोटक महिंद्रा कैपिटल, जेएम फाइनेंशियल और एक्सिस बैंक जैसे दिग्गज निवेश बैंकों के साथ बातचीत कर रही है. हालांकि आईपीओ के आकार और मूल्यांकन को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि पारले अपनी मजबूत ब्रांड विरासत और व्यापक वितरण नेटवर्क के आधार पर एक प्रीमियम वैल्यूएशन की मांग कर सकता है.
ऑफर फॉर सेल (OFS) पर केंद्रित योजना
प्रस्तावित आईपीओ के पूरी तरह से ‘ऑफर फॉर सेल’ (OFS) होने की संभावना है. इसका अर्थ यह है कि कंपनी नए शेयर जारी कर फ्रेश कैपिटल जुटाने के बजाय मौजूदा प्रमोटरों को अपनी आंशिक हिस्सेदारी बेचने का अवसर देगी. वर्तमान में कंपनी पर प्रमोटर परिवार का शत-प्रतिशत नियंत्रण है. लिस्टिंग के माध्यम से कंपनी न केवल अपनी बाजार दृश्यता बढ़ाना चाहती है, बल्कि शेयरधारकों के लिए वैल्यू अनलॉकिंग का मार्ग भी प्रशस्त कर रही है.
प्रतिस्पर्धी परिदृश्य और बाजार स्थिति
शेयर बाजार में लिस्ट होने के बाद पारले प्रोडक्ट्स का सीधा मुकाबला ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज और आईटीसी (ITC) जैसी दिग्गज कंपनियों से होगा. पारले-जी, जिसे दुनिया का सबसे ज्यादा बिकने वाला बिस्किट ब्रांड माना जाता है, के अलावा कंपनी के पास हाइड एंड सीक, मोनाको और क्रैकजैक जैसे पावर ब्रांड्स हैं. ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में कंपनी की पैठ इसे प्रतिद्वंदियों के मुकाबले एक मजबूत स्थिति में खड़ा करती है.
मई 2026 तक औपचारिक ‘पिचिंग’ प्रक्रिया और ड्राफ्ट पेपर्स (DRHP) जमा करने की दिशा में तेजी आने की उम्मीद है. विश्लेषकों का मानना है कि यह आईपीओ न केवल निवेशकों को एक स्थिर और लाभदायक एफएमसीजी बिजनेस का हिस्सा बनने का मौका देगा, बल्कि यह भारतीय उपभोग कहानी के प्रति भरोसे को भी दर्शाएगा.


