Deoghar News, 6 November 2026: सामुदायिक स्तर पर एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी (फेफड़ों के बाहर होने वाली टीबी) की शुरुआती पहचान को आसान बनाने के उद्देश्य से एम्स देवघर में 235 सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। संस्थान के पैथोलॉजी एवं लैब मेडिसिन विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में सहिया साथी, आंगनवाड़ी सेविकाओं और ब्लॉक ट्रेनिंग टीम (बीटीटी) के सदस्यों ने भाग लिया।
गर्दन और बगल में गांठ को लेकर दी गई जानकारी
एम्स देवघर के ऑडिटोरियम में आयोजित प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बताया गया कि गर्दन, बगल और जांघ के ऊपरी हिस्से के जोड़ के पास गांठ होना एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी का संभावित लक्षण हो सकता है। ऐसे लक्षणों को समय रहते पहचानना और संबंधित व्यक्ति को चिकित्सकीय जांच के लिए भेजना जरूरी है।
प्रशिक्षण में मैनिकिन यानी अभ्यास मॉडल की मदद से गांठ की पहचान करने का व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया। प्रतिभागियों को सलाह दी गई कि इस तरह के लक्षण दिखाई देने पर संबंधित व्यक्ति को एमएफएटी टीम से संपर्क कराने के लिए प्रेरित करें, ताकि समय पर जांच और आवश्यक चिकित्सकीय सहायता मिल सके।
आईसीएमआर की परियोजना के तहत आयोजित हुआ कार्यक्रम
यह प्रशिक्षण भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) से वित्तपोषित एमएफएटी परियोजना के तहत आयोजित किया गया। परियोजना का उद्देश्य प्रशिक्षण और टेलीपैथोलॉजी के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के स्तर पर एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी की पहचान और जांच की व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
विशेषज्ञों ने दिया प्रशिक्षण, प्रतिभागियों को मिले प्रमाणपत्र
कार्यक्रम का संचालन डॉ. हरीश कुमार बोहरा, डॉ. निशि, डॉ. नवीन कुमार और अनुसंधान टीम ने किया। प्रशिक्षण के दौरान सामुदायिक कार्यकर्ताओं को संभावित लक्षणों की पहचान और आगे की जांच के लिए मरीजों को उचित टीम तक पहुंचाने की प्रक्रिया समझाई गई।
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। इस पहल से सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को टीबी के संभावित लक्षणों की शुरुआती पहचान में मदद मिलने की उम्मीद है।
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