Friday, November 6, 2026

पलामू के निजी अस्पतालों में लगाना होगा इलाज का रेट चार्ट, दवाओं की कीमत भी करनी होगी सार्वजनिक

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Palamu News, 6 November 2026: पलामू जिले के निजी अस्पतालों और क्लीनिकों को अब इलाज की दरों का रेट चार्ट प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करना होगा। इसके साथ ही दवाओं की कीमतों को भी सार्वजनिक करना होगा। स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों को इस संबंध में नोटिस जारी कर संबंधित नियमों का पालन करने का निर्देश दिया है।

वहीं, बड़े-बड़े होर्डिंग और भ्रामक विज्ञापनों के माध्यम से प्रचार करने वाले डॉक्टरों को भी चिह्नित किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ऐसे मामलों की रिपोर्ट तैयार कर रहा है, जिसे नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) को भेजने की तैयारी है।

सभी डॉक्टरों को जारी किया गया नोटिस

पिछले कुछ समय में पलामू जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था और निजी अस्पतालों में इलाज को लेकर कई सवाल उठे हैं। इलाज के दौरान महिलाओं और बच्चों की मौत के मामले सामने आए हैं। गर्भपात से जुड़ा एक मामला भी चर्चा में रहा है। इसके अलावा इलाज में लापरवाही के आरोपों के बाद कई निजी क्लीनिकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

इन घटनाओं को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने निजी चिकित्सा संस्थानों में नियमों का पालन सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाया है। पहले चरण में जिले के डॉक्टरों को नोटिस जारी कर निर्धारित नियमों का पालन करने को कहा गया है।

इलाज की दर और दवाओं की कीमत बताना होगा

पलामू के सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, निजी अस्पतालों को अपने यहां उपलब्ध इलाज और चिकित्सा सेवाओं की दरों का चार्ट प्रमुख स्थान पर लगाना होगा। दवाओं की कीमत भी सार्वजनिक करनी होगी, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को खर्च की जानकारी मिल सके।

उन्होंने बताया कि मेदिनीनगर में 30 से अधिक निजी अस्पताल हैं, जबकि पूरे पलामू जिले में करीब 200 निजी अस्पताल और क्लीनिक संचालित हैं।

भ्रामक विज्ञापन देने वाले डॉक्टरों पर नजर

स्वास्थ्य विभाग ऐसे डॉक्टरों की पहचान कर रहा है, जो बड़े-बड़े होर्डिंग लगाकर अपना प्रचार कर रहे हैं या भ्रामक विज्ञापन जारी कर रहे हैं। विभाग इस संबंध में रिपोर्ट तैयार कर रहा है।

सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि एनएमसी के नियमों के अनुसार डॉक्टरों को अपना प्रचार करने की अनुमति नहीं है। इस संबंध में एनएमसी की ओर से पत्र भी प्राप्त हुआ है। विज्ञापन जारी करने वाले डॉक्टरों के होर्डिंग और प्रचार सामग्री की जीपीएस लोकेशन सहित तस्वीरें मांगी गई हैं।

एनएमसी को भेजी जाएगी रिपोर्ट

स्वास्थ्य विभाग की ओर से भ्रामक प्रचार से जुड़े मामलों की जानकारी जुटाई जा रही है। रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे नेशनल मेडिकल कमीशन को भेजा जाएगा। इसके आधार पर संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

स्वास्थ्य विभाग की इस पहल का उद्देश्य निजी अस्पतालों में इलाज की दरों को पारदर्शी बनाना, मरीजों को दवाओं की कीमतों की जानकारी देना और चिकित्सा पेशे में निर्धारित विज्ञापन संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।

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