Friday, November 6, 2026

निशा भगत की मौत पर बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन से मांगा इस्तीफा, निष्पक्ष जांच की मांग

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Ranchi News, 6 November 2026: युवा आदिवासी नेत्री निशा भगत की मौत के मामले में झारखंड की राजनीति गरमा गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी ने घटना पर दुख जताते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने राज्य सरकार पर आदिवासी समाज के अधिकारों और सुरक्षा की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।

मरांडी ने पिठोरिया थाना प्रभारी और अजय तिर्की की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और निशा भगत की ओर से जिम्मेदार बताए गए लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

आदिवासी समाज की मुखर आवाज थीं निशा भगत

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि निशा भगत जनजातीय समाज के हक और अधिकारों के लिए आवाज उठाती थीं। उनके अनुसार, एक युवा आदिवासी महिला की मौत बेहद दुखद और चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वालों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

मरांडी ने आरोप लगाया कि निशा भगत को प्रताड़ित किया गया था। उन्होंने इस मामले में मुख्यमंत्री को जिम्मेदार ठहराते हुए उनसे पद छोड़ने की मांग की। हालांकि, ये आरोप हैं और इनकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

आदिवासियों की जमीन पर कब्जे का लगाया आरोप

नेता प्रतिपक्ष ने राज्य में आदिवासियों की जमीन से जुड़े मामलों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कुछ लोग प्रभाव का इस्तेमाल कर आदिवासियों की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं।

मरांडी ने थानों और अंचल कार्यालयों में जमीन से संबंधित शिकायतों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आदिवासी समुदाय को अपनी जमीन और अधिकारों की सुरक्षा मिलनी चाहिए। उन्होंने सरकार से ऐसे मामलों में जवाबदेही तय करने और प्रभावी कार्रवाई करने की मांग की।

निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

बाबूलाल मरांडी ने मांग की कि निशा भगत ने जिन लोगों को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार बताया था, उनकी भूमिका की जांच की जाए। उन्होंने पिठोरिया थाना प्रभारी और अजय तिर्की से जुड़े आरोपों की भी निष्पक्ष जांच कराने की बात कही।

उन्होंने कहा कि पूरे मामले के सभी तथ्यों और परिस्थितियों को सामने लाया जाना चाहिए। जांच में यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

मरांडी ने मुख्यमंत्री से इस मामले में जवाब देने और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग दोहराई।

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