Saturday, November 7, 2026

झारखंड के रीड-ए-थॉन को एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की मान्यता, 28.85 लाख लोगों ने एक साथ पढ़ीं किताबें

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Ranchi News, 6 November 2026: झारखंड ने पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य के सभी 24 जिलों में आयोजित राज्यव्यापी रीड-ए-थॉन में 28 लाख 85 हजार 734 लोगों की भागीदारी को एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने मान्यता दी है। इस अभियान में बच्चों, शिक्षकों, अभिभावकों, सरकारी अधिकारियों और विभिन्न समुदायों के लोगों ने एक साथ पठन गतिविधि में हिस्सा लिया।

8 सितंबर को आयोजित हुआ था राज्यव्यापी रीड-ए-थॉन

यह रिकॉर्ड 8 सितंबर 2026 को आयोजित राज्यव्यापी रीड-ए-थॉन के नाम दर्ज हुआ है। ‘मेरे शब्द, मेरी कहानी’ थीम पर आधारित रीडिंग कैंपेन 2026 के तहत इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।

राज्य के सभी 24 जिलों में आयोजित इस अभियान में कुल 28,85,734 लोगों ने भाग लिया। विभिन्न स्थानों पर एक साथ सबसे अधिक लोगों की पठन गतिविधि में भागीदारी के लिए झारखंड को एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से मान्यता मिली है।

30 मिनट तक एक साथ पढ़ीं किताबें

रीड-ए-थॉन के तहत ‘ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड’ यानी अपने सभी काम रोककर पढ़ने की अवधारणा अपनाई गई थी। इसके लिए सुबह 11 बजे से 11:30 बजे तक का समय निर्धारित किया गया था।

इस दौरान स्कूलों की कक्षाओं से लेकर घरों, सामुदायिक केंद्रों और सार्वजनिक स्थानों तक लोगों ने एक साथ किताबें पढ़ीं। अभियान का उद्देश्य पढ़ने की आदत को केवल स्कूली गतिविधि तक सीमित न रखकर दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना था।

शिक्षा सचिव ने जमीनी टीमों के प्रयासों की सराहना की

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह ने इस उपलब्धि पर अभियान से जुड़ी टीमों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बच्चों में आनंद के साथ पढ़ने की आदत विकसित करने और इस तरह की गतिविधियों को लगातार जारी रखने पर जोर दिया।

उन्होंने अभियान के संचालन में सहयोग देने वाले सभी सीएसओ साझेदारों के प्रति भी आभार जताया।

जेईपीसी और जिला शिक्षा टीमों की रही अहम भूमिका

इस अभियान को सफल बनाने में झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (जेईपीसी) के निदेशक शशि रंजन, जिला शिक्षा टीमों, सरकारी अधिकारियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

इन सभी के समन्वय और जमीनी स्तर पर सक्रिय भागीदारी से राज्य के सभी 24 जिलों में कार्यक्रम का संचालन संभव हो सका। अभियान के जरिए बच्चों के साथ शिक्षकों, अभिभावकों और स्थानीय समुदायों को भी पठन गतिविधियों से जोड़ा गया।

रिकॉर्ड के साथ स्थायी पठन संस्कृति विकसित करने का लक्ष्य

रीड-ए-थॉन का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड बनाना नहीं था, बल्कि बच्चों में नियमित रूप से पढ़ने की आदत विकसित करना भी था। इसके माध्यम से बच्चों को अपनी रुचि के अनुसार किताबें पढ़ने, कल्पनाशीलता बढ़ाने और नए विषयों को जानने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

शिक्षा विभाग का लक्ष्य है कि बच्चे केवल पाठ्यक्रम की किताबों तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी पसंद की पुस्तकें भी पढ़ें और स्वतंत्र पाठक के रूप में विकसित हों। एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से मिली मान्यता को झारखंड में पठन संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

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