Ranchi News, 6 November 2026: रांची के पिठोरिया थाना क्षेत्र में आदिवासी नेत्री निशा कुमारी भगत की मौत के बाद झारखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। घटना पर भाजपा नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने राज्य में आदिवासियों की जमीन से जुड़े विवादों और पुलिस-प्रशासन की भूमिका की जांच की मांग की है।
रिम्स में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित
जानकारी के अनुसार, निशा भगत की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलने के बाद पिठोरिया पुलिस उनके आवास पहुंची और उन्हें इलाज के लिए रिम्स ले जाया गया। रिम्स के निदेशक डॉ. बीके सिन्हा के अनुसार, इमरजेंसी में डॉक्टरों की टीम ने उनकी जांच की, लेकिन उन्हें मृत पाया। इसके बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू की गई।
रांची डीएसपी मुख्यालय-1 अमन कुमार पांडेय ने भी बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची थी और निशा भगत को अस्पताल भेजा गया था।
सोशल मीडिया लाइव के बाद घटना को लेकर उठे सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, घटना से पहले निशा भगत सोशल मीडिया पर लाइव आई थीं। इस दौरान उन्होंने खुद को व्यवस्था के सामने असहाय महसूस करने और अपनी सामाजिक गतिविधियों को लेकर बदनामी किए जाने की बात कही थी।
उन्होंने आदिवासी समाज के अधिकारों, जमीन से जुड़े विवादों और अपने परिवार के बारे में भी चर्चा की थी। रिपोर्ट में बताया गया है कि उन्होंने पिठोरिया और कांके थाना के अधिकारियों से संपर्क करने का भी उल्लेख किया था।
बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर लगाए आरोप
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर राज्य में आदिवासियों की जमीन से जुड़े मामलों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के विभिन्न थानों और अंचल कार्यालयों में आदिवासियों की जमीन पर अवैध कब्जे की कोशिशें हो रही हैं।
उन्होंने सवाल किया कि आदिवासी समाज को अपनी ही जमीन पर कब तक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। ये आरोप बाबूलाल मरांडी ने लगाए हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग, एफआईआर और गिरफ्तारी की बात
निशा भगत की मौत के बाद बाबूलाल मरांडी रिम्स पहुंचे। वहां उन्होंने मीडिया से बातचीत में घटना को राज्य के लिए बड़ी क्षति बताया और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस्तीफे की मांग की।
उन्होंने कहा कि निशा भगत ने जिन लोगों का उल्लेख किया था, उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जानी चाहिए। मरांडी ने पुलिस और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए तथा संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
निष्पक्ष जांच से सामने आनी चाहिए सच्चाई
निशा भगत की मौत के बाद जमीन विवाद, पुलिस को दी गई सूचना और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। पूरे मामले में निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि घटना से जुड़े तथ्यों की पुष्टि हो सके और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या जिम्मेदारी सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।
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