Wednesday, April 29, 2026

8वें वेतन आयोग की दिल्ली बैठक में न्यूनतम सैलरी ₹69,000 करने और 3.83 फिटमेंट फैक्टर पर चर्चा शुरू, जिससे कर्मचारियों का वेतन भारी बढ़ेगा.

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नई दिल्ली: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) ने अपनी गतिविधियों को तेज कर दिया है. इसी कड़ी में दिल्ली में एक महत्वपूर्ण तीन दिवसीय बैठक शुरू हो चुकी है, जो 30 अप्रैल तक चलेगी. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य कर्मचारी यूनियनों की मांगों पर विचार करना और नए वेतन ढांचे की रूपरेखा तैयार करना है.

न्यूनतम वेतन में भारी उछाल की मांग
इस समय सबसे बड़ी चर्चा न्यूनतम बेसिक सैलरी को लेकर है. कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने प्रस्ताव रखा है कि न्यूनतम वेतन को वर्तमान के ₹18,000 से बढ़ाकर सीधे ₹69,000 किया जाए. इसके पीछे का मुख्य तर्क ‘फैमिली यूनिट’ में बदलाव है. अब तक वेतन का निर्धारण 3 यूनिट की फैमिली (पति, पत्नी और एक बच्चा) के आधार पर होता था, लेकिन अब यूनियन इसे बढ़ाकर 5 यूनिट करने की मांग कर रही है ताकि बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल का खर्च भी शामिल हो सके.

फिटमेंट फैक्टर और पे-मैट्रिक्स
वेतन वृद्धि का सबसे बड़ा आधार ‘फिटमेंट फैक्टर’ होता है. कर्मचारी संगठनों के संयुक्त मंच (NC-JCM) ने इसे 3.833 करने की मांग की है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इस मांग को आंशिक रूप से भी मान लेती है, तो फिटमेंट फैक्टर 2.86 के आसपास रह सकता है, जिससे सैलरी में कम से कम 25% से 30% का इजाफा तय है.

भत्तों और इंक्रीमेंट पर नजर
वेतन आयोग केवल बेसिक सैलरी ही नहीं, बल्कि हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) जैसे भत्तों की भी समीक्षा कर रहा है. इसके अलावा, वार्षिक वेतन वृद्धि (Annual Increment) को 3% से बढ़ाकर 5% या 6% करने का भी प्रस्ताव है.

अगला पड़ाव: महाराष्ट्र और पुणे
दिल्ली की इस निर्णायक बैठक के बाद आयोग की टीम मई महीने में पुणे और महाराष्ट्र के अन्य शहरों का दौरा करेगी. वहां विभिन्न संगठनों और ग्राउंड लेवल के कर्मचारियों से फीडबैक लिया जाएगा. गौरतलब है कि इस आयोग का गठन जनवरी 2026 में किया गया था और इसे 18 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है.

कब लागू होगी नई दरें?
8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएंगी. हालांकि रिपोर्ट आने में समय लग सकता है, लेकिन कर्मचारियों को पिछले समय का एरियर (Arrear) मिलने की पूरी उम्मीद है. यदि ये मांगें मान ली जाती हैं, तो करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनभोगियों के जीवन स्तर में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा.

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