रांची। झारखंड में बारिश के वैज्ञानिक अध्ययन को नई दिशा देने के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के रांची केंद्र में एक अत्याधुनिक डिस्ड्रोमीटर स्थापित किया गया है। बताया जा रहा है कि यह बिहार-झारखंड क्षेत्र में अपनी तरह का पहला उपकरण है। इसके जरिए बारिश की बूंदों के आकार, संख्या और उनके गिरने की गति जैसी सूक्ष्म जानकारियां दर्ज की जा सकेंगी।
बारिश को समझने का नया तरीका
अब तक किसी क्षेत्र में हुई बारिश का आकलन मुख्य रूप से वर्षामापी से दर्ज पानी की मात्रा के आधार पर किया जाता है। डिस्ड्रोमीटर इससे अधिक विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराता है। यह यह पता लगाने में मदद करता है कि किसी बारिश के दौरान बूंदों का आकार कैसा है, उनकी संख्या कितनी है और वे किस गति से जमीन की ओर गिर रही हैं।
इस तरह प्राप्त आंकड़े बारिश की प्रकृति और उसकी तीव्रता को बेहतर ढंग से समझने में वैज्ञानिकों की मदद कर सकते हैं।
मौसम पूर्वानुमान में मिल सकती है मदद
झारखंड में मानसून के दौरान बंगाल की खाड़ी से विकसित होने वाली विभिन्न मौसम प्रणालियों का प्रभाव देखने को मिलता है। कई बार थोड़े समय में अत्यधिक बारिश होती है, जबकि कुछ परिस्थितियों में गरज और बिजली के साथ तेज वर्षा होती है।
डिस्ड्रोमीटर से अलग-अलग मौसम प्रणालियों के दौरान बारिश की बूंदों में होने वाले बदलावों का अध्ययन किया जा सकेगा। इससे वर्षा की तीव्रता और उसके स्वरूप को समझने के साथ-साथ मौसम पूर्वानुमान से जुड़े वैज्ञानिक मॉडलों के मूल्यांकन में भी सहायता मिल सकती है।
IITM पुणे और IMD की पहल
इस उपकरण की स्थापना भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे और मौसम विभाग की संयुक्त पहल के तहत की गई है। IITM के वैज्ञानिक डॉ. अंबुज कुमार झा और परियोजना वैज्ञानिक रोहित पाटिल ने रांची केंद्र में इसकी स्थापना की।
यह डिस्ड्रोमीटर IITM पुणे की ART परियोजना के अंतर्गत विकसित किए जा रहे नेटवर्क का हिस्सा है। इस नेटवर्क का उद्देश्य देश के अलग-अलग जलवायु क्षेत्रों में बारिश की सूक्ष्म विशेषताओं से जुड़े आंकड़े जुटाना है। यह पहल केंद्र सरकार के ‘मिशन मौसम’ से भी जुड़ी हुई है।
झारखंड में मौसम अनुसंधान को मिलेगा नया डेटा
रांची में डिस्ड्रोमीटर की स्थापना के बाद स्थानीय स्तर पर वर्षा से संबंधित एक नया डेटा स्रोत उपलब्ध होगा। वैज्ञानिक इसके माध्यम से अलग-अलग मौसम परिस्थितियों में बारिश के व्यवहार का अध्ययन कर सकेंगे।
IITM के वैज्ञानिकों के अनुसार, यह उपकरण रांची और आसपास के क्षेत्रों में वर्षा अवलोकन की क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा। लंबे समय में इससे झारखंड में क्षेत्रीय मौसम अनुसंधान और बेहतर पूर्वानुमान से जुड़ी गतिविधियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
