मुंबई: वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को बेहद सीमित बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भी निवेशकों को सतर्क बनाए रखा।
दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन कारोबार के अंत में प्रमुख सूचकांक लगभग स्थिर रहे।
सेंसेक्स और निफ्टी में मामूली तेजी
बीएसई का सेंसेक्स 3.11 अंक बढ़कर 77,540.83 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का निफ्टी 50 20.15 अंक यानी 0.08 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,252.00 पर पहुंच गया।
हालांकि शुक्रवार को बाजार हरे निशान में बंद हुआ, लेकिन पूरे सप्ताह के आधार पर दोनों प्रमुख सूचकांकों में लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट रही।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी
बड़ी कंपनियों के शेयरों में खास उत्साह नहीं दिखा, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स करीब 0.1 प्रतिशत, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.69 प्रतिशत ऊपर बंद हुआ।
मेटल और प्राइवेट बैंक शेयर मजबूत
सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो मेटल और प्राइवेट बैंक से जुड़े शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। इन क्षेत्रों ने व्यापक बाजार को कुछ हद तक सहारा दिया।
इसके उलट एफएमसीजी, ऑटो और आईटी शेयर दबाव में रहे। प्रमुख कमजोर शेयरों में ट्रेंट, मारुति सुजुकी और इंटरग्लोब एविएशन शामिल रहे।
कच्चे तेल की कीमतों पर बाजार की नजर
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भारतीय इक्विटी बाजार के लिए प्रमुख जोखिम बनी हुई है। महंगे कच्चे तेल से देश के आयात खर्च और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।
इसके अलावा वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी निवेशकों के सेंटीमेंट को प्रभावित कर रहे हैं।
24,000-24,200 के स्तर पर निफ्टी को सहारा
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, 24,000 से 24,200 के बीच का क्षेत्र निफ्टी के लिए महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन माना जा रहा है। वहीं, 24,360-24,400 के आसपास का स्तर निकट अवधि में अहम रेजिस्टेंस बन सकता है।
अगर इंडेक्स इस बाधा के ऊपर मजबूती से टिकता है, तो आगे 24,500 और 24,600 के स्तरों की ओर बढ़ने की संभावना बन सकती है। फिलहाल वैश्विक संकेतों को देखते हुए बाजार में सतर्कता बने रहने की उम्मीद है।
