पटना: बिहार में सड़क संपर्क को बेहतर बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बक्सर से भागलपुर के बीच प्रस्तावित 336 किलोमीटर लंबे छह लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। करीब 3,700 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत विकसित करने की योजना है।
परियोजना पूरी होने के बाद बक्सर से भागलपुर के बीच सड़क यात्रा का समय मौजूदा करीब आठ घंटे से घटकर लगभग चार घंटे रह जाने की उम्मीद है। हालांकि वास्तविक यात्रा समय एक्सप्रेसवे के संचालन, इंटरचेंज और यातायात की स्थिति पर निर्भर करेगा।
13 जिलों की कनेक्टिविटी होगी बेहतर
प्रस्तावित एक्सप्रेसवे से बक्सर, भोजपुर, जहानाबाद, अरवल, गया, नालंदा, शेखपुरा, मुंगेर, लखीसराय, नवादा, जमुई, बांका और भागलपुर समेत 13 जिलों को बेहतर सड़क संपर्क मिलने की संभावना है।
इस कॉरिडोर का लाभ केवल बक्सर और भागलपुर के बीच आने-जाने वाले लोगों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे बिहार के पश्चिमी हिस्से से मुंगेर, जमुई और भागलपुर की ओर जाने वाले यात्रियों को भी तेज वैकल्पिक मार्ग मिल सकेगा।
3,700 करोड़ रुपये की परियोजना, PPP मॉडल पर होगा निर्माण
सरकार की योजना के अनुसार एक्सप्रेसवे को DBFOT-Toll मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। इसका मतलब है कि निर्माण, वित्तपोषण और संचालन में निजी भागीदारी होगी तथा एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद वाहनों से टोल लिया जाएगा।
परियोजना को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (BSRDC) के माध्यम से निभाई जाएगी।
पूरी तरह एक्सेस कंट्रोल्ड होगा एक्सप्रेसवे
प्रस्तावित सड़क छह लेन की और एक्सेस कंट्रोल्ड होगी। यानी वाहन केवल निर्धारित इंटरचेंज और प्रवेश-निकास बिंदुओं से ही एक्सप्रेसवे पर आ-जा सकेंगे।
इस व्यवस्था से अनधिकृत कट, स्थानीय यातायात और अचानक वाहनों के प्रवेश जैसी बाधाओं में कमी आने की उम्मीद है। लंबी दूरी के यात्रियों को इससे अधिक व्यवस्थित और तेज सफर मिल सकता है।
यूपी और दिल्ली की ओर भी बेहतर कनेक्टिविटी की उम्मीद
बक्सर-भागलपुर कॉरिडोर को भविष्य में उत्तर प्रदेश के प्रमुख एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जोड़ने की योजना भी बतायी गई है। बक्सर लिंक के जरिए इसे गाजीपुर-बलिया-मांझीघाट क्षेत्र से जोड़ने की संभावना है।
आगे इस नेटवर्क का संपर्क पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे जैसे मार्गों से बेहतर होने पर बिहार से दिल्ली-एनसीआर की ओर जाने वाले यात्रियों को भी लाभ मिल सकता है।
एक्सप्रेसवे के आसपास बढ़ सकती हैं आर्थिक गतिविधियां
सरकार की योजना सड़क के आसपास आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की भी है। संभावित रूप से लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउस, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और अन्य कारोबारी गतिविधियों के लिए जमीन विकसित की जा सकती है।
इसके अलावा प्रस्तावित कॉरिडोर को ग्रीनफील्ड टाउनशिप से जोड़ने की योजना भी है। इससे भविष्य में आसपास के क्षेत्रों में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है।
आगे क्या होगा?
कैबिनेट की मंजूरी के बाद परियोजना के अगले चरण में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कराने के लिए कंसल्टेंट की नियुक्ति की जाएगी। PPP मॉडल को लागू करने के लिए ट्रांजेक्शन एडवाइजर की सेवाएं भी ली जाएंगी।
इसके बाद परियोजना के तकनीकी, वित्तीय और निर्माण संबंधी पहलुओं पर आगे की प्रक्रिया होगी। इसलिए एक्सप्रेसवे के निर्माण और यातायात शुरू होने में अभी समय लगेगा।
यात्रियों को क्या फायदा होगा?
इस परियोजना के पूरा होने पर सबसे बड़ा संभावित लाभ यात्रा समय में कमी और बेहतर कनेक्टिविटी के रूप में सामने आएगा। कई जिलों के बीच आवागमन आसान होने के साथ बिहार का संपर्क उत्तर प्रदेश और आगे दिल्ली-एनसीआर के एक्सप्रेसवे नेटवर्क से भी मजबूत हो सकता है।
हालांकि एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों को टोल शुल्क देना होगा। परियोजना के पूरा होने और परिचालन शुरू होने के बाद ही टोल की वास्तविक दर और यात्रा व्यवस्था स्पष्ट होगी।
