पटना: बिहार में म्यूचुअल फंड और SIP को लेकर लोगों की दिलचस्पी पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। बड़े शहरों के साथ-साथ मुजफ्फरपुर, गया, बेगूसराय और पूर्णिया जैसे शहरों में भी छोटे निवेशक इस विकल्प की ओर आकर्षित हो रहे हैं। हालांकि निवेशकों की संख्या बढ़ने के बावजूद राज्य का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) देश के मुकाबले काफी कम बना हुआ है।
रिपोर्ट में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018-19 के आसपास बिहार में म्यूचुअल फंड निवेशकों की संख्या करीब 7 लाख थी, जो अब बढ़कर 1.17 करोड़ बताई जा रही है। इसके बावजूद जून 2026 में राज्य का कुल AUM करीब 84,795 करोड़ रुपये रहा। इससे पता चलता है कि निवेशकों की संख्या में वृद्धि के मुकाबले निवेश की कुल राशि और निवेश की अवधि में उतनी तेजी नहीं आई है।
छोटे शहरों तक पहुंचा SIP का चलन
म्यूचुअल फंड अब केवल महानगरों या बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गया है। बिहार के छोटे शहरों और कस्बों में भी SIP को लेकर जागरूकता बढ़ी है।
कम राशि से नियमित निवेश शुरू करने की सुविधा SIP को खास तौर पर छोटे निवेशकों के लिए आकर्षक बनाती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल निवेश शुरू करना पर्याप्त नहीं है। बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान निवेश जारी रखना भी महत्वपूर्ण है।
बिहार में इक्विटी फंड की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा
बताए गए आंकड़ों के मुताबिक बिहार के म्यूचुअल फंड निवेश में इक्विटी फंड की हिस्सेदारी करीब 72 प्रतिशत है। इसके बाद हाइब्रिड फंड का हिस्सा लगभग 14 प्रतिशत, डेट और इनकम कैटेगरी का करीब 3 प्रतिशत तथा सॉल्यूशन-ओरिएंटेड फंड का लगभग 5 प्रतिशत बताया गया है।
इक्विटी फंड में निवेश का एक कारण लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की उम्मीद हो सकता है। हालांकि बाजार से जुड़े निवेश में जोखिम भी रहता है और रिटर्न निश्चित नहीं होता।
AUM का मतलब क्या है?
AUM यानी Assets Under Management से यह पता चलता है कि किसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी या फंड के पास निवेशकों की ओर से कितनी रकम प्रबंधन के तहत है।
किसी राज्य के स्तर पर AUM को देखने से वहां म्यूचुअल फंड और संबंधित बाजारों में निवेश की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। बिहार में निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ने के बावजूद कुल AUM अपेक्षाकृत कम होना इस बात की ओर इशारा करता है कि बड़ी संख्या में निवेशक छोटी रकम से शुरुआत कर रहे हैं।
निवेशक बढ़े, लेकिन लंबे समय तक बने रहना चुनौती
जानकारों के मुताबिक बिहार में म्यूचुअल फंड की पहुंच बढ़ने के साथ एक नई चुनौती भी सामने आई है। कई नए निवेशक डिजिटल प्लेटफॉर्म या मोबाइल ऐप के जरिए बाजार से जुड़ते हैं, लेकिन निवेश की पर्याप्त समझ नहीं होने के कारण बाजार में गिरावट आने पर जल्द पैसा निकाल लेते हैं।
ऐसे में निवेशकों की संख्या तो बढ़ती है, लेकिन लंबे समय तक निवेशित रहने वाली पूंजी अपेक्षाकृत कम रहती है। इससे राज्य के कुल AUM की वृद्धि पर भी असर पड़ सकता है।
निवेश की अवधि बढ़ाना क्यों जरूरी?
म्यूचुअल फंड विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार से जुड़े निवेश में समय एक महत्वपूर्ण कारक है। बाजार में छोटी अवधि के दौरान उतार-चढ़ाव सामान्य है। इसलिए निवेशकों के लिए अपने वित्तीय लक्ष्य, जोखिम क्षमता और निवेश की अवधि को समझना जरूरी माना जाता है।
पहले लोग जमीन या सोने जैसी संपत्तियों में पैसा लगाकर लंबे समय तक उसे बनाए रखते थे। इसी तरह बाजार आधारित निवेश में भी लंबी अवधि का नजरिया रखने से उतार-चढ़ाव का प्रभाव कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि किसी भी निवेश में रिटर्न की गारंटी नहीं होती।
युवाओं में जानकारी है, लेकिन प्राथमिकताएं अलग
बिहार के युवा वर्ग में म्यूचुअल फंड और SIP को लेकर जानकारी बढ़ी है, लेकिन कई युवा फिलहाल निवेश को प्राथमिकता नहीं दे रहे हैं। नौकरी शुरू करने के बाद वे यात्रा, वाहन, गैजेट्स और अन्य व्यक्तिगत लक्ष्यों पर खर्च को प्राथमिकता देते हैं।
कुछ युवाओं का मानना है कि भविष्य में आर्थिक स्थिति अधिक स्थिर होने के बाद वे निवेश शुरू करेंगे। वहीं, कुछ लोग म्यूचुअल फंड को लेकर अधूरी जानकारी और सोशल मीडिया पर मिलने वाली भ्रामक सूचनाओं को भी निवेश से दूरी की वजह मानते हैं।
निवेश न करने की एक वजह आर्थिक जिम्मेदारियां भी
कुछ निवेशकों के लिए परिवार की जिम्मेदारियां भी बड़ी वजह हैं। शादी, बच्चों की पढ़ाई, घर और अन्य खर्चों के बाद नियमित बचत के लिए पर्याप्त रकम बचाना मुश्किल हो जाता है।
वहीं, कुछ लोग म्यूचुअल फंड की तुलना में अपने कारोबार को प्राथमिकता देते हैं। उनका मानना है कि जिस क्षेत्र में उन्हें अधिक अनुभव है, वहां पूंजी लगाना उनके लिए ज्यादा सहज है।
बिहार के AUM को बढ़ाने में जागरूकता अहम
बिहार में म्यूचुअल फंड निवेशकों की संख्या में हुई वृद्धि यह बताती है कि राज्य में निवेश को लेकर लोगों की सोच बदल रही है। अब SIP और म्यूचुअल फंड छोटे शहरों तक भी पहुंच चुके हैं।
हालांकि 84,795 करोड़ रुपये का AUM यह सवाल भी उठाता है कि बड़ी संख्या में निवेशक जुड़ने के बावजूद कुल निवेश राशि और निवेश की अवधि उसी अनुपात में क्यों नहीं बढ़ रही है।
जानकारों के अनुसार, निवेश से जुड़ी सही जानकारी, जोखिम की समझ और लंबी अवधि की वित्तीय योजना पर जोर बढ़े तो बिहार में म्यूचुअल फंड का आधार और मजबूत हो सकता है। इससे आने वाले वर्षों में राज्य के AUM में भी बढ़ोतरी की संभावना बन सकती है।
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