रांचीः डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) की एकेडमिक काउंसिल की बैठक में विद्यार्थियों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है. कुलपति प्रो. (डॉ.) राजीव मनोहर की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में यह मंजूरी दी गई कि विश्वविद्यालय के यूजी और पीजी टॉपर्स की उत्तरपुस्तिकाओं को छात्रों के अध्ययन के लिए उपलब्ध कराया जाएगा. इस निर्णय के साथ डीएसपीएमयू झारखंड का पहला विश्वविद्यालय बन गया है, जहां उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों की उत्तरपुस्तिकाएं अन्य छात्रों के लिए मॉडल के रूप में प्रदर्शित की जाएंगी.
इससे तकनीक समझने का मौका मिलेगा
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस पहल से छात्रों को उत्तर लेखन की बेहतर तकनीक समझने का अवसर मिलेगा. अक्सर विद्यार्थी विषय का ज्ञान होने के बावजूद उत्तरों की प्रस्तुति, संरचना और विश्लेषणात्मक लेखन में पीछे रह जाते हैं. टॉपर्स की उत्तरपुस्तिकाएं देखकर वे यह जान सकेंगे कि बेहतर अंक प्राप्त करने के लिए किस प्रकार उत्तर लिखे जाते हैं, विषयवस्तु को कैसे व्यवस्थित किया जाता है और परीक्षा में प्रभावी प्रस्तुति का क्या महत्व होता है.
परीक्षा प्रणाली और अधिक होगी पारदर्शी
कुलपति प्रो. राजीव मनोहर ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है. उन्होंने कहा कि यह निर्णय छात्रों को प्रेरित करने के साथ-साथ परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे विद्यार्थियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित होगी और वे अपनी कमियों को पहचानकर बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे.
एजुकेशनल सिस्टम को मजबूत करने का उद्देश्य
बैठक में परीक्षा सुधार और शैक्षणिक गुणवत्ता को लेकर कई अन्य महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए. विश्वविद्यालय की मूल्यांकन प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने, शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप शैक्षणिक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने पर भी सहमति बनी. इसके अलावा विद्यार्थियों के ओवरऑल डेवलपमेंट, पाठ्यक्रमों की गुणवत्ता और अकादमिक गतिविधियों को मजबूत करने से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर भी चर्चा कर उन्हें मंजूरी दी गई.
परीक्षा परिणामों की गुणवत्ता में होगा सुधार
शिक्षाविदों का मानना है कि टॉपर्स की उत्तरपुस्तिकाओं को अध्ययन सामग्री के रूप में उपलब्ध कराने से विद्यार्थियों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा. वे केवल पाठ्यपुस्तकों पर निर्भर नहीं रहेंगे, बल्कि यह भी समझ पाएंगे कि परीक्षक किस प्रकार के उत्तरों को बेहतर अंक देते हैं. इससे परीक्षा परिणामों की गुणवत्ता में भी सुधार आने की संभावना है.
विश्वविद्यालय के इस फैसले को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक नवाचार के रूप में देखा जा रहा है. डीएसपीएमयू का यह कदम राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकता है. कुलपति का मानना है कि इससे विद्यार्थियों में सीखने की नई संस्कृति विकसित होगी और वे उत्कृष्ट प्रदर्शन की दिशा में अधिक प्रभावी ढंग से तैयारी कर सकेंगे.


