रांचीः आपातकाल दिवस के मौके पर आज प्रदेश में जमकर सियासत हुई. भारतीय जनता पार्टी ने इसे संविधान हत्या दिवस के रुप में मनाया तो कांग्रेस ने इसे राजनीतिक पाखंड और इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की साजिश बताया.
इस मौके पर रांची विधायक सी.पी. सिंह ने कहा कि आपातकाल केवल राजनीतिक घटना नहीं थी, बल्कि लोकतंत्र और संविधान पर सीधा हमला था. सत्ता के दुरुपयोग का यह उदाहरण देश के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा. लोकतंत्र सेनानियों का त्याग और संघर्ष हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है.वरिष्ठ नेता एवं मीसा कानून में जेल गए.
इन सब सियासी बयानबाजी के बीच रांची महानगर भाजपा द्वारा जिला कार्यालय में संगोष्ठी एवं लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, रांची विधायक सीपी सिंह, डॉ सूर्यमणि सिंह उपस्थित रहे.
इस अवसर पर आपातकाल के दौरान मीसा (MISA) कानून के तहत जेल गए लोकतंत्र सेनानियों को अर्जुन मुंडा ने अंगवस्त्र ओढ़ाकर सम्मानित किया. लोकतंत्र की रक्षा में उनके अतुलनीय योगदान को नमन किया. अपने संबोधन में अर्जुन मुंडा ने कहा कि 25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय है.
सत्ता के अहंकार में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने संविधान की मूल भावना को कुचलने का प्रयास किया. लाखों लोकतंत्र सेनानियों, पत्रकारों और विपक्षी नेताओं को जेलों में डाल दिया गया तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर ताला लगा दिया गया. लोकतंत्र सेनानियों का संघर्ष ही भारत में लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना का आधार बना, आने वाली पीढ़ियों को आपातकाल की सच्चाई से अवगत कराना हम सभी का दायित्व है.

डॉ. सूर्यमणि सिंह ने कहा कि आपातकाल ने यह सिखाया कि लोकतंत्र तभी सुरक्षित रह सकता है जब जनता सजग रहे और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान किया जाए. लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष ने भारत की लोकतांत्रिक परंपरा को नई शक्ति प्रदान की.
राजनीतिक पाखंड और इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की साजिश- कांग्रेस
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने भाजपा द्वारा मनाए जा रहे संविधान हत्या दिवस को राजनीतिक पाखंड और इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की साजिश बताया है. उन्होंने कहा कि जिस भाजपा और उसके वैचारिक संगठन ने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर संविधान निर्माण तक हर महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रक्रिया से खुद को अलग रखा, वह आज संविधान की दुहाई देकर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है.
कांग्रेस मानती है कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक ऐसा अध्याय है, जिससे सीख लेकर लोकतांत्रिक संस्थाओं को और मजबूत किया जाना चाहिए. लेकिन भाजपा का उद्देश्य इतिहास से सीख लेना नहीं, बल्कि वर्तमान की विफलताओं से जनता का ध्यान भटकाना है.
राकेश सिन्हा ने कहा कि आज देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर सवाल उठ रहे हैं, विपक्षी नेताओं पर केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग हो रहा है. संसद में विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है और संवैधानिक पदों की गरिमा को कमजोर किया जा रहा है. ऐसे में संविधान की रक्षा का उपदेश भाजपा को नहीं, बल्कि देश की जनता भाजपा को दे रही है.
उन्होंने कहा कि संविधान की हत्या केवल किसी एक ऐतिहासिक घटना से नहीं होती, बल्कि तब होती है जब लोकतांत्रिक मूल्यों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संघीय ढांचे और सामाजिक न्याय की भावना पर लगातार प्रहार किया जाता है. भाजपा सरकार के पिछले वर्षों का रिकॉर्ड इसी दिशा की ओर संकेत करता है.

संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की आत्मा है. इसकी रक्षा का सबसे बड़ा दायित्व उन लोगों पर है जो सत्ता में हैं. भाजपा यदि वास्तव में संविधान के प्रति प्रतिबद्ध है तो उसे राजनीतिक नौटंकी छोड़कर लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता, विपक्ष के सम्मान और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए.


