Thursday, June 25, 2026

सेंसेक्स 109 अंक और निफ्टी 34 अंक की मामूली बढ़त के साथ बंद हुए. मिडकैप में गिरावट रही.

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मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला. दिन की मजबूत शुरुआत के बाद, आखिरी घंटों में आई तेज मुनाफावसूली ने बाजार की शुरुआती बढ़त को काफी हद तक खत्म कर दिया. इसके बावजूद घरेलू बेंचमार्क सूचकांक लगातार रिकॉर्ड स्तरों के करीब मामूली बढ़त के साथ हरे निशान में बंद होने में कामयाब रहे. सूचना प्रौद्योगिकी (IT), मेटल और ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों में भारी बिकवाली से बाजार का सेंटिमेंट प्रभावित हुआ.

कारोबार के अंत में, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला सूचकांक सेंसेक्स 109.25 अंक यानी 0.14 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,100.47 के स्तर पर बंद हुआ. दूसरी ओर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी 34.35 अंक यानी 0.14 प्रतिशत बढ़कर 24,056 पर टिका. इंट्रा-डे ट्रेडिंग के दौरान निफ्टी ने 24,100 के पार जाकर नया रिकॉर्ड बनाने की कोशिश की थी, लेकिन ऊपरी स्तरों पर टिक नहीं सका.

हैवीवेट शेयरों ने बढ़ाया दबाव
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, निवेशकों ने आज बड़े और दिग्गज शेयरों में जमकर मुनाफा कमाया. निफ्टी की कंपनियों में ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC), पावर ग्रिड कॉरपोरेशन और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज सबसे बड़े नुकसान में रहे. इन दिग्गज कंपनियों में आई बिकवाली ने पूरे बाजार को नीचे खींचने का काम किया.

ब्रॉडर मार्केट में अधिक कमजोरी
मुख्य सूचकांकों के मुकाबले आज ब्रॉडर मार्केट यानी मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में गिरावट की रफ्तार ज्यादा तेज रही. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.55 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.47 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. इससे साफ पता चलता है कि खुदरा निवेशकों ने छोटे और मझोले शेयरों में आज सतर्कता बरती.

सेक्टर्स का हाल
आज के कारोबार में सबसे ज्यादा मार निफ्टी मेटल, आईटी और ऑयल एंड गैस इंडेक्स पर पड़ी. इसके विपरीत, ऑटोमोबाइल और एफएमसीजी (FMCG) जैसे खपत आधारित सेक्टर्स ने बाजार को नीचे जाने से रोका. कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के कारण मारुति सुजुकी और महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) के शेयरों में 4% से अधिक की तेजी दर्ज की गई.

आगे के लिए बाजार के संकेत
वैश्विक मोर्चे पर ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव घटकर 73 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया है. इस गिरावट ने भारतीय रुपये को मजबूती दी और बाजार को बड़ी गिरावट से बचाया. हालांकि, जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में कंपनियों की पहली तिमाही (Q1) के कमजोर नतीजों की आशंका और देश के कई हिस्सों में असमान मानसून बाजार के लिए बड़ी चिंता बने रहेंगे.

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