नई दिल्ली। बड़े कारोबारियों के लिए GST पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक सरल और तेज बनाने की दिशा में केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर नई व्यवस्था तैयार कर रही हैं। प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य अलग-अलग राज्यों में दस्तावेजों और प्रक्रियाओं को लेकर मौजूद अंतर को कम करना और पंजीकरण प्रक्रिया में अधिक समानता लाना है।
नई व्यवस्था के तहत अधिक मात्रा में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) ट्रांसफर करने वाले कारोबारियों के लिए पूरे देश में एक समान दस्तावेजी प्रक्रिया लागू करने पर विचार किया जा रहा है।
राज्यों के अलग-अलग नियमों को एकरूप करने की तैयारी
टैक्स अधिकारियों के मुताबिक, वर्तमान में GST पंजीकरण के दौरान अलग-अलग राज्यों में अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जाने की स्थिति बन सकती है। इससे कारोबारियों को पंजीकरण में देरी और अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है।
इस समस्या को दूर करने के लिए केंद्र और राज्य के अधिकारी एक समान स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार कर रहे हैं। सभी राज्यों की सहमति बनने के बाद प्रस्ताव को GST काउंसिल के समक्ष रखा जाएगा। काउंसिल की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करती हैं।
GST रजिस्ट्रेशन रद्द करने की प्रक्रिया भी होगी आसान
प्रस्तावित सुधार केवल नए पंजीकरण तक सीमित नहीं हैं। GST रजिस्ट्रेशन कैंसिल करने की प्रक्रिया को भी अधिक व्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाने की योजना है।
इसके तहत पंजीकरण रद्द करने के लिए अधिकारियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले आधार और नियमों को स्पष्ट किया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रक्रिया में एकरूपता लाना और अनावश्यक मानवीय हस्तक्षेप को कम करना है।
GST पोर्टल पर आवेदन भरने वाले कारोबारियों की सहायता के लिए अतिरिक्त ऑनलाइन गाइडेंस और टूलटिप जैसी सुविधाएं भी जोड़े जाने की योजना है। इससे आवेदन करते समय गलतियों की संभावना कम करने में मदद मिल सकती है।
बड़े कारोबारियों पर फोकस
देश में GST के तहत पंजीकृत कारोबारियों की संख्या करीब 1.68 करोड़ बताई जा रही है। छोटे और कम जोखिम वाले कारोबारियों के लिए पहले ही सरल पंजीकरण व्यवस्था लागू की जा चुकी है।
अब सरकार का ध्यान अपेक्षाकृत बड़े कारोबारियों के लिए प्रक्रिया को सुगम बनाने पर है। प्रस्तावित सुधारों से कंपनियों को अलग-अलग राज्यों में कारोबार शुरू करने या विस्तार करने के दौरान पंजीकरण संबंधी प्रक्रियाओं में आसानी मिलने की उम्मीद है।
साथ ही, अधिकारियों के अनुसार बेहतर जांच व्यवस्था और तकनीकी निगरानी से फर्जी बिलिंग तथा टैक्स से जुड़ी धोखाधड़ी पर नियंत्रण रखने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि, नई व्यवस्था लागू होने से पहले संबंधित प्रस्तावों को आवश्यक स्तर पर मंजूरी मिलना जरूरी होगा।
