मुंबई: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच सोमवार को भारतीय शेयर बाजार दबाव में नजर आया। वैश्विक स्तर पर निवेशकों की बढ़ती चिंता का असर घरेलू बाजार पर भी दिखा और शुरुआती कारोबार में प्रमुख सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए।
शुरुआती कारोबार में बाजार कमजोर
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बीएसई सेंसेक्स 600 से अधिक अंकों की गिरावट के साथ 76,963.35 पर खुला। वहीं, एनएसई निफ्टी भी 167.50 अंक फिसलकर 24,039.40 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार जानकारों के अनुसार, पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है।
कच्चे तेल में उछाल से बढ़ी चिंता
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर करीब 80 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है। चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए तेल की कीमतों में तेजी का असर अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार दोनों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बना रहता है तो बाजार पर दबाव सीमित रह सकता है, लेकिन इससे ऊपर जाने पर निवेशकों की चिंता और बढ़ सकती है।
इन सेक्टरों में रही सबसे ज्यादा बिकवाली
शुरुआती कारोबार में अधिकांश सेकोरल इंडेक्स कमजोरी के साथ कारोबार करते दिखे। ऑटो और मेटल शेयरों में करीब 1 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, पीएसयू बैंक और निजी बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में भी बिकवाली का माहौल रहा।
गिरावट दर्ज करने वाले प्रमुख शेयरों में इंडिगो, एशियन पेंट्स, टाटा स्टील, एचडीएफसी बैंक, बजाज फाइनेंस और श्रीराम फाइनेंस शामिल रहे।
हालांकि, आईटी और फार्मा सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। इन दोनों क्षेत्रों के सूचकांक करीब 0.6 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए, जिससे बाजार को कुछ सहारा मिला।
एशियाई बाजारों में भी दबाव
भारतीय बाजार की तरह एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में भी कमजोरी रही। जापान का निक्केई करीब 1.6 प्रतिशत नीचे कारोबार करता दिखा, जबकि हांगकांग का हैंगसेंग भी गिरावट में रहा। दक्षिण कोरिया का कॉस्पी सूचकांक सबसे अधिक प्रभावित रहा, जिसमें 6 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
FII निवेश से मिल सकती है राहत
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का रुख भारत के लिए सकारात्मक बना हुआ है। दक्षिण कोरिया के चिप उद्योग से जुड़े बढ़ते जोखिम के बीच कुछ विदेशी निवेशक भारत जैसे अपेक्षाकृत मजबूत बाजारों की ओर पूंजी स्थानांतरित कर रहे हैं। इससे घरेलू बाजार को निचले स्तरों पर समर्थन मिलने की संभावना बनी हुई है।


