Thursday, October 15, 2026

पांच करोड़ के मानहानि नोटिस पर सुधाकर सिंह का जवाब, बोले—न माफी मांगूंगा, न पीछे हटूंगा.

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पटना, 15 अक्टूबर 2026: बिहार के बक्सर से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन के अधिवक्ता की ओर से भेजे गए कथित पांच करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस पर कड़ा रुख अपनाया है। सांसद ने स्पष्ट किया है कि वे अपने बयानों के लिए माफी नहीं मांगेंगे और जनहित से जुड़े सवाल उठाना जारी रखेंगे।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नोटिस में सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के साथ पांच करोड़ रुपये के मानहानि दावे और आपराधिक कार्रवाई की बात कही गई है। सुधाकर सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे जनता के अधिकारों, न्याय और संविधान से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाते रहेंगे।

भारत भूषण तिवारी की मौत पर उठाए सवाल

सुधाकर सिंह ने भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में भारत भूषण तिवारी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने घटना की परिस्थितियों, पुलिस कार्रवाई के आदेश और निर्णय लेने वाले अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की है।

सांसद का कहना है कि घटना को केवल सामान्य पुलिस कार्रवाई बताकर जिम्मेदारी तय करने के सवाल को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने पर जोर दिया है।

हालांकि, घटना से जुड़े आरोपों और जिम्मेदारी के सवालों पर अंतिम निष्कर्ष जांच तथा उपलब्ध आधिकारिक तथ्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग

सुधाकर सिंह ने पुलिस कार्रवाई के दौरान निर्णय लेने की प्रक्रिया और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि गंभीर मामलों में कई बार निचले स्तर के पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होती है, जबकि उच्च स्तर पर लिए गए फैसलों की पर्याप्त पड़ताल नहीं होती।

उन्होंने कहा कि कुंदन कृष्णन उस समय बिहार एसटीएफ के डीजी पद पर थे। इसी आधार पर सांसद ने तत्कालीन पुलिस कमान और निर्णय प्रक्रिया की भी जांच की मांग की है। यह सांसद का पक्ष है; संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी के बारे में कोई निष्कर्ष जांच के तथ्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

जमुई की घटना का भी किया जिक्र

सांसद ने जमुई में हुई एक अन्य घटना का उल्लेख करते हुए महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा तथा पीड़ितों को न्याय दिलाने को शासन की जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े मामलों पर सवाल उठाना जनप्रतिनिधियों की भूमिका का हिस्सा है।

रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब किसी मामले में जांच और प्राथमिकी की प्रक्रिया चल रही हो, तो उस पर सवाल उठाने वाले जनप्रतिनिधि को कानूनी नोटिस भेजने का क्या आधार है।

कानूनी जवाब देने की तैयारी

सुधाकर सिंह ने कहा है कि वे नोटिस से पीछे नहीं हटेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने अपने अधिवक्ताओं को नोटिस का विधिसम्मत जवाब देने का निर्देश दिया है।

इस मामले में आगे की कार्रवाई नोटिस की शर्तों, संबंधित पक्षों के जवाब और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। फिलहाल सांसद ने भारत भूषण तिवारी की मौत की स्वतंत्र जांच, वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग दोहराई है।

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