गुमला, 15 अक्टूबर 2026: झारखंड के गुमला जिले में टमाटर की खेती को फिर से प्रोत्साहित करने और किसानों को विल्ट रोग से होने वाले नुकसान से बचाने की दिशा में पहल की गई है। इसके लिए जिला उद्यान विभाग और ग्रामीण विकास संस्था प्रदान (PRADAN) के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके तहत घाघरा और बसिया प्रखंड में GROW परियोजना के माध्यम से ग्राफ्टेड टमाटर की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।
विल्ट रोग से नुकसान झेल रहे किसानों को मिलेगी तकनीकी मदद
घाघरा और बसिया क्षेत्र लंबे समय से टमाटर उत्पादन के लिए जाने जाते हैं। यहां टमाटर की खेती छोटे और सीमांत किसानों की आय का प्रमुख स्रोत रही है। हालांकि, बार-बार विल्ट रोग लगने और मिट्टी की बदलती परिस्थितियों के कारण किसानों को फसल में नुकसान उठाना पड़ रहा है। इससे टमाटर की खेती के प्रति उनका भरोसा भी प्रभावित हुआ है।
इस समस्या के समाधान के लिए शुरू की जा रही GROW परियोजना का पूरा नाम ग्राफ्टेड, रेजिलिएंट एवं ऑप्टिमाइज़्ड वाटर-एफिशिएंट टमाटर खेती है। इसके तहत रोग-सहनशील बैंगन के मूलवृंत (रूटस्टॉक) पर अच्छी उपज देने वाले टमाटर की कलम लगाकर पौधे तैयार किए जाएंगे।
दो गांवों के 100 किसान परिवार होंगे शामिल
परियोजना के तहत घाघरा और बसिया प्रखंड के दो गांवों में कुल 100 किसान परिवारों को जोड़ा जाएगा। प्रत्येक परिवार के लिए 30 डिसमिल क्षेत्र में खेती का मॉडल तैयार करने और लगभग 550 ग्राफ्टेड टमाटर पौधे उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।
इस पहल का उद्देश्य किसानों को खेती की ऐसी तकनीक से परिचित कराना है, जिससे रोगों के कारण होने वाले नुकसान और उत्पादन के जोखिम को कम करने में मदद मिल सके।
उद्यान विभाग देगा प्रशासनिक सहयोग
एमओयू के तहत जिला उद्यान विभाग परियोजना के क्रियान्वयन में सहयोग करेगा। विभाग केंद्र और राज्य की संबंधित योजनाओं, जैसे एमआईडीएच (MIDH), आरकेवीवाई और एनएचएम के साथ समन्वय स्थापित करने में मदद करेगा।
पात्र किसानों को ग्राफ्टेड पौधे, जैविक खाद, मल्चिंग और अन्य जरूरी कृषि सामग्री उपलब्ध कराने के लिए भी सहयोग किया जाएगा। इसके अलावा ड्रिप सिंचाई की सुविधा से जोड़ने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।
विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारी खेतों का निरीक्षण करेंगे और किसान दिवस तथा समीक्षा बैठकों में हिस्सा लेकर परियोजना की प्रगति पर नजर रखेंगे।
प्रदान देगा प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन
परियोजना में प्रदान तकनीकी सहयोगी की भूमिका निभाएगा। संस्था किसानों को खेत पर प्रशिक्षण और मार्गदर्शन देगी। इसमें पौधों की देखभाल, रोपाई, पोषण प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण, सिंचाई, मल्चिंग, कटाई-छंटाई और फसल कटने के बाद के प्रबंधन की जानकारी शामिल होगी।
इसके साथ ही किसानों को बाजार से जोड़ने और किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के साथ समन्वय स्थापित करने में मदद की जाएगी। परियोजना के दौरान मिले अनुभवों और परिणामों का दस्तावेजीकरण भी किया जाएगा।
दो साल तक चलेगी परियोजना
यह समझौता दो वर्षों के लिए किया गया है। परियोजना में टमाटर की पूरी फसल अवधि को शामिल किया जाएगा और किसानों को अगली फसल लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। फसल के महत्वपूर्ण चरणों में उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी।
समझौता सहयोगात्मक और गैर-वित्तीय प्रकृति का है। इसका अर्थ है कि एमओयू के तहत किसी भी पक्ष पर सीधे आर्थिक दायित्व नहीं होगा।
दूसरे टमाटर उत्पादक क्षेत्रों के लिए भी बनेगा मॉडल
परियोजना का मुख्य लक्ष्य विल्ट रोग की समस्या से निपटने के उपायों को खेतों में परखना, उत्पादन जोखिम घटाना और किसानों की उपज व आय बढ़ाने में मदद करना है। इसके साथ ही किसानों की तकनीकी क्षमता विकसित कर जिले के अन्य टमाटर उत्पादक क्षेत्रों में भी इस मॉडल को अपनाने की संभावनाएं तैयार की जाएंगी।
एमओयू पर जिला उद्यान विभाग की ओर से डॉ. तमन्ना प्रवीण और प्रदान, गुमला की ओर से मो. मेराज उद्दीन ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर उद्यान विभाग के तकनीकी विशेषज्ञ दीपक कुमार तथा प्रदान के जितेंद्र कुमार और रौशन उपस्थित थे।
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