भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को कमजोर शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हल्की गिरावट के साथ लगभग स्थिर नजर आए। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से निवेशकों में सतर्कता बनी हुई है।
मुंबई: घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार की शुरुआत काफी धीमी रही। शुरुआती सत्र में BSE Sensex 21.32 अंक यानी 0.03 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,742.91 के स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह NSE Nifty 7.85 अंक यानी 0.03 प्रतिशत कमजोर होकर 23,423.65 पर कारोबार करता दिखाई दिया।
वैश्विक बाजारों से मिले मिले-जुले संकेतों और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच निवेशक फिलहाल बाजार की दिशा को लेकर सावधानी बरत रहे हैं।
क्यों दबाव में रहा शेयर बाजार?
बाजार पर सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी का माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 101 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए लंबे समय तक कच्चे तेल की ऊंची कीमतें अर्थव्यवस्था और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव डाल सकती हैं।
इसके अलावा अमेरिका की 10 साल की बॉन्ड यील्ड बढ़कर करीब 4.83 प्रतिशत हो गई है। बॉन्ड यील्ड में इस तरह की बढ़ोतरी से वैश्विक स्तर पर निवेशकों की धारणा प्रभावित होती है और ब्याज दरों को लेकर भी बाजार में नए अनुमान बनने लगते हैं।
ऑटो और पेंट शेयरों पर दबाव
कच्चे तेल की महंगाई का असर उन कंपनियों पर ज्यादा दिखाई दे रहा है, जिनकी लागत पर पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों का सीधा या अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है।
शुरुआती कारोबार में Nifty Auto करीब 0.66 प्रतिशत नीचे रहा। महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर में लगभग 1.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा बजाज ऑटो और आयशर मोटर्स जैसे ऑटो शेयरों में भी कमजोरी देखी गई। पेंट कंपनियों में एशियन पेंट्स का शेयर भी दबाव में रहा।
सरकारी बैंकों में खरीदारी
जहां ऑटो और पेंट कंपनियों के शेयरों में बिकवाली दिखी, वहीं सरकारी बैंकों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। शुरुआती कारोबार में PSU Bank सेक्टर में 1 प्रतिशत से अधिक की मजबूती देखने को मिली।
तेल एवं गैस से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भी खरीदारी का रुझान रहा और Nifty Oil & Gas इंडेक्स करीब 0.61 प्रतिशत ऊपर कारोबार करता नजर आया।
निफ्टी के लिए अहम होंगे ये स्तर
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक निफ्टी का 23,500 के स्तर के नीचे रहना तकनीकी रूप से बाजार के लिए कमजोर संकेत माना जा रहा है। आने वाले कारोबारी सत्रों में 23,260 से 23,000 के बीच का क्षेत्र महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन की भूमिका निभा सकता है।
मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की संभावना को देखते हुए निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचने की सलाह दी जा रही है। विशेषज्ञों की नजर फिलहाल अपेक्षाकृत रक्षात्मक माने जाने वाले फार्मा और FMCG सेक्टर पर भी बनी हुई है।
