नई दिल्ली, 7 अक्टूबर 2026: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच मौद्रिक नीति में बड़ा बदलाव किया है। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.25% से बढ़ाकर 5.50% कर दिया है। करीब चार साल बाद RBI ने पहली बार नीतिगत दर बढ़ाई है। साथ ही मौद्रिक नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ किया गया है।
सभी सदस्यों ने रेपो रेट बढ़ाने का समर्थन किया
RBI की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो रेट बढ़ाने के फैसले का सर्वसम्मति से समर्थन किया। हालांकि, नीति रुख को ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ करने का फैसला 4:2 के बहुमत से लिया गया।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के मुताबिक, आगे ब्याज दरों से जुड़े फैसले महंगाई और आर्थिक गतिविधियों के वास्तविक आंकड़ों पर निर्भर करेंगे। इसलिए फिलहाल भविष्य में दरों में कटौती की संभावना कमजोर जरूर हुई है, लेकिन आगे का हर कदम डेटा के आधार पर तय होगा।
महंगाई बनी RBI की सबसे बड़ी चिंता
केंद्रीय बैंक ने महंगाई के दबाव को मौद्रिक नीति सख्त करने की प्रमुख वजह माना है। अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82% हो गई थी, जो RBI के 4% के मध्यम अवधि के लक्ष्य से ऊपर है।
RBI ने मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए चालू वित्त वर्ष के लिए महंगाई का अनुमान भी बढ़ाया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव महंगाई के लिए प्रमुख जोखिम बने हुए हैं।
‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ का क्या मतलब है?
सरल भाषा में समझें तो RBI अब महंगाई पर नियंत्रण को लेकर पहले की तुलना में ज्यादा सख्त रुख अपना रहा है। हालांकि, ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ का अर्थ यह नहीं है कि हर अगली बैठक में ब्याज दर बढ़ना तय है।
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इसे एक डेटा-निर्भर और क्रमिक सख्ती के तौर पर बताया है। यानी आने वाले समय में महंगाई, विकास और अन्य आर्थिक परिस्थितियों को देखकर अगली दरों पर फैसला होगा।
होम लोन और दूसरे कर्ज पर क्या असर पड़ेगा?
रेपो रेट बढ़ने के बाद बैंकों की फंडिंग लागत पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर बैंकिंग व्यवस्था के जरिए नए कर्ज और फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन, कार लोन या अन्य कर्ज की ब्याज दरों पर पड़ सकता है।
जिन लोगों के लोन की ब्याज दर बाहरी बेंचमार्क से जुड़ी है, उनके लिए EMI बढ़ने या लोन की अवधि में बदलाव की संभावना बन सकती है। हालांकि वास्तविक असर हर बैंक की ब्याज दर और ग्राहक के लोन की शर्तों पर निर्भर करेगा।
FD कराने वालों को मिल सकती है राहत
ब्याज दरों में बढ़ोतरी का असर केवल कर्ज लेने वालों तक सीमित नहीं रहता। बैंक अपनी जमा दरों में भी बदलाव कर सकते हैं। ऐसे में आने वाले समय में कुछ बैंकों की FD पर ब्याज दरें बढ़ने की संभावना बन सकती है।
हालांकि, किसी बैंक द्वारा FD की दर कब और कितनी बढ़ाई जाएगी, यह उसका अलग व्यावसायिक फैसला होता है।
आगे क्या होगा?
RBI ने फिलहाल महंगाई के जोखिम को देखते हुए नीति को सख्त दिशा में मोड़ा है। केंद्रीय बैंक के अगले फैसले महंगाई के आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमत, आर्थिक वृद्धि और वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर रहेंगे।
इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि ब्याज दरें आगे हर हाल में बढ़ेंगी या लंबे समय तक ऊंची रहेंगी। इतना जरूर है कि RBI के नए रुख से तुरंत ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद को झटका लगा है और महंगाई पर नियंत्रण अब केंद्रीय बैंक की प्राथमिकता में और ऊपर आ गया है।
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