रांची: झारखंड में JSSC CGL परीक्षा से जुड़ी कार्रवाई का असर अब सरकारी कार्यालयों के रोजमर्रा के कामकाज पर भी दिखाई देने लगा है। कर्मचारियों की कमी के कारण कई विभागों में फाइलों की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। जिन कर्मचारियों के पास महत्वपूर्ण संचिकाएं थीं, उनके उपलब्ध नहीं होने से फाइलों को आगे बढ़ाने में परेशानी हो रही है।
स्थिति यह है कि जरूरी मामलों में कई वरिष्ठ अधिकारी स्वयं फाइलों की प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं, ताकि अत्यावश्यक सरकारी काम प्रभावित न हो।
सचिवालय में कर्मचारियों की कमी से बढ़ी परेशानी
JSSC CGL के माध्यम से विभिन्न सरकारी पदों पर नियुक्तियां हुई थीं। इनमें सहायक प्रशाखा पदाधिकारी, कनीय सचिवालय सहायक, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, प्रखंड कल्याण पदाधिकारी, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी, अंचल निरीक्षक और प्लानिंग असिस्टेंट जैसे पद शामिल हैं।
इनमें सहायक प्रशाखा पदाधिकारी और कनीय सचिवालय सहायक के करीब 1,135 कर्मचारी सचिवालय में कार्यरत थे। इन पदों की भूमिका विभिन्न विभागों में फाइल तैयार करने और उन्हें संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण होती है।
कर्मचारियों के उपलब्ध नहीं रहने से फाइलों की शुरुआती प्रक्रिया प्रभावित हुई है। इसका असर उन मामलों पर भी पड़ रहा है जिनमें विभागीय स्तर पर जल्द निर्णय लिया जाना जरूरी है।
जरूरी मामलों में वरिष्ठ अधिकारी संभाल रहे काम
विभागीय कामकाज को पूरी तरह रुकने से बचाने के लिए वरिष्ठ अधिकारी कुछ महत्वपूर्ण संचिकाओं को स्वयं आगे बढ़ा रहे हैं। हालांकि, हर फाइल का काम इसी तरह संभालना व्यावहारिक नहीं माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि किसी कर्मचारी के स्थान पर दूसरे कर्मी को औपचारिक रूप से प्रभार देने की प्रक्रिया में भी समय लगता है। ऐसे में तत्काल तौर पर सभी लंबित कार्यों का वैकल्पिक प्रबंध करना चुनौती बना हुआ है।
11वीं से 13वीं JPSC के अधिकारियों को हाईकोर्ट के आदेश से राहत
इधर, 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा से जुड़े अधिकारियों को झारखंड हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद राहत मिली है। अदालत द्वारा संबंधित कार्रवाई पर रोक लगाए जाने के बाद कई अधिकारी अपनी पूर्व निर्धारित पोस्टिंग वाली जगहों पर वापस पहुंचने लगे।
कुछ अधिकारियों ने संबंधित स्थानों पर योगदान देने के बाद इसकी सूचना जिला प्रशासन और विभागीय मुख्यालय को भी भेजी है। हालांकि, योगदान स्वीकार करने की प्रक्रिया को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं होने की बात सामने आई है।
कई पदों पर नियुक्त अधिकारियों का भविष्य प्रभावित
11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा से जुड़े विवाद के कारण विभिन्न सेवाओं में चयनित अधिकारियों की नियुक्तियों पर भी असर पड़ा था। उपलब्ध विवरण के अनुसार इनमें 207 उप समाहर्ता, 35 पुलिस उपाधीक्षक, 56 राज्य कर पदाधिकारी, दो कारा अधीक्षक और 10 शिक्षा सेवा अधिकारियों समेत कई पद शामिल हैं।
इसके अलावा जिला समादेष्टा, सहायक निबंधक, श्रम अधीक्षक, प्रोबेशन पदाधिकारी और उत्पाद निरीक्षक के पदों पर चयनित उम्मीदवार भी इस मामले से प्रभावित हुए।
इनमें से कुछ अधिकारी प्रशिक्षण पूरा करने के बाद विभिन्न जिलों, प्रखंडों और अंचलों में फील्ड ट्रेनिंग के लिए पदस्थापित थे।
आगे की स्थिति पर नजर
JSSC और JPSC से जुड़े मामलों में अदालत की कार्यवाही तथा विभागीय निर्णयों के आधार पर आगे की स्थिति तय होगी। फिलहाल सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपलब्धता और लंबित फाइलों के निपटारे को लेकर विभागों के सामने चुनौती बनी हुई है। वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से जरूरी मामलों को प्राथमिकता देकर काम आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
