Sunday, August 9, 2026

Jharkhand High Court: बच्चों की कस्टडी मामलों में अंतरिम व्यवस्था, 2025 की कलकत्ता गाइडलाइन बनेगी आधार.

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रांची: बच्चों की कस्टडी, माता-पिता के अधिकार और बच्चे से मुलाकात से जुड़े विवादों की सुनवाई को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने फिलहाल अंतरिम व्यवस्था तय की है। कोर्ट ने कहा है कि जब तक झारखंड हाईकोर्ट अपने लिए स्थायी नियम तैयार नहीं कर लेता, तब तक ऐसे मामलों में कलकत्ता हाईकोर्ट की Child Access and Custody Guideline-Parenting Plan-2025 को मार्गदर्शक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

यह निर्देश चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान से चल रही जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया।

गाइडलाइन को बाध्यकारी नियम नहीं माना जाएगा

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कलकत्ता हाईकोर्ट की गाइडलाइन को झारखंड में अनिवार्य या बाध्यकारी नियम के तौर पर लागू नहीं किया जाएगा। संबंधित अदालतें प्रत्येक मामले की परिस्थितियों और बच्चे के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए अपने न्यायिक विवेक से आदेश पारित कर सकेंगी।

इसका मतलब है कि गाइडलाइन अदालतों के लिए एक संदर्भ और मार्गदर्शक के तौर पर काम करेगी, लेकिन किसी मामले में परिस्थितियों के अनुसार अलग व्यवस्था करने की स्वतंत्रता न्यायालय के पास रहेगी।

स्थायी नियम बनाने के लिए रूल्स कमेटी को भेजा जाएगा मामला

हाईकोर्ट ने बच्चों की कस्टडी, मुलाकात के अधिकार और Parenting Plan से संबंधित मामलों के लिए स्थायी नियम तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। इसके लिए मामले को रूल्स कमेटी के समक्ष भेजने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है।

कमेटी द्वारा नियम तैयार किए जाने के बाद उन्हें फुल कोर्ट के समक्ष रखा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद झारखंड हाईकोर्ट की स्थायी व्यवस्था लागू की जाएगी। तब तक 2025 की कलकत्ता हाईकोर्ट गाइडलाइन अंतरिम मार्गदर्शक के रूप में इस्तेमाल होगी।

जिला अदालतों और फैमिली कोर्ट तक पहुंचेगी गाइडलाइन

हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है कि संबंधित गाइडलाइन की प्रतियां राज्य के सभी जिला जजों, फैमिली कोर्ट, मजिस्ट्रेट और उन अन्य न्यायालयों को उपलब्ध कराई जाएं, जहां कस्टडी, वैवाहिक विवाद और पारिवारिक मामलों की सुनवाई होती है।

इससे संबंधित अदालतों को बच्चों की कस्टडी और पैरेंटिंग से जुड़े मामलों में एक संदर्भ व्यवस्था उपलब्ध हो सकेगी।

बच्चे से मिलने के अधिकार वाले मामलों में भी लागू होगी व्यवस्था

अंतरिम व्यवस्था केवल बच्चे की कस्टडी तक सीमित नहीं रहेगी। माता-पिता को बच्चे से मिलने, उसके साथ समय बिताने और Access Rights से जुड़े मामलों में भी इस गाइडलाइन को मार्गदर्शक के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा।

हालांकि, अदालतें बच्चे की परिस्थितियों और हित को देखते हुए अपने विवेक से अलग आदेश पारित कर सकती हैं।

कई हाईकोर्ट पहले ही बना चुके हैं गाइडलाइन

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि केरल, कर्नाटक और दिल्ली हाईकोर्ट भी बच्चों की कस्टडी तथा माता-पिता के Access Rights से जुड़े मामलों के लिए दिशा-निर्देश तैयार कर चुके हैं।

इन पहलुओं पर विचार के बाद झारखंड हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान से शुरू हुई जनहित याचिका का निष्पादन कर दिया। स्थायी नियम तैयार होने तक कलकत्ता हाईकोर्ट की 2025 की गाइडलाइन अंतरिम मार्गदर्शक के रूप में काम करेगी।

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