चतरा/सिमरिया: चतरा जिले के सिमरिया में कोयला लदे वाहनों की आवाजाही के विरोध में रविवार से अनिश्चितकालीन धरना और चक्का जाम शुरू हो गया। आंदोलन का नेतृत्व झामुमो नेता मनोज चंद्रा कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कोयला वाहनों की लगातार आवाजाही से क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ रहा है और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बना हुआ है।
सिमरिया चौक पर शुरू हुए इस आंदोलन में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने कोयला ढुलाई के खिलाफ नारेबाजी करते हुए वाहनों की आवाजाही रोकने की बात कही।
हजारीबाग से आने वाले कोयला वाहनों का विरोध
आंदोलनकारियों का कहना है कि हजारीबाग जिले के पकरी बरवाडीह क्षेत्र से निकलने वाला कोयला चतरा के रास्ते से होकर नहीं जाना चाहिए। उनका आरोप है कि भारी वाहनों की आवाजाही से स्थानीय लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
झामुमो केंद्रीय सदस्य मनोज चंद्रा ने कहा कि क्षेत्र से कोयला वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद कराने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया गया है। उनका कहना है कि मांग पूरी होने तक धरना और चक्का जाम जारी रहेगा।
प्रदूषण और सड़क दुर्घटनाओं को लेकर नाराजगी
स्थानीय नेताओं और ग्रामीणों का कहना है कि कोयला लदे भारी वाहनों के लगातार गुजरने से सड़कों पर धूल और प्रदूषण की समस्या बढ़ी है। इसके अलावा तेज रफ्तार और भारी वाहनों की वजह से दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि लगातार भारी वाहनों की आवाजाही से क्षेत्र की सड़कों पर दबाव बढ़ रहा है और सड़कें जल्दी खराब हो रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान होने तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।
कई राजनीतिक दलों के नेता आंदोलन में शामिल
धरना-प्रदर्शन में विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े स्थानीय नेता और कार्यकर्ता भी पहुंचे। इनमें कांग्रेस जिलाध्यक्ष चंद्रदेव गोप, प्रमुख रोहन साव, झामुमो जिला सचिव चंद्रदेव साहू, प्रखंड अध्यक्ष रमन कुमार साहू समेत कई अन्य लोग शामिल रहे।
इसके अलावा जिले के अलग-अलग गांवों से ग्रामीण भी बड़ी संख्या में आंदोलन स्थल पर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने एकजुट होकर कोयला वाहनों की आवाजाही के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की।
पहले भी हो चुका है कोयला ढुलाई का विरोध
सिमरिया क्षेत्र में कोयला परिवहन को लेकर पहले भी विरोध प्रदर्शन हो चुका है। इससे पहले पकरी बरवाडीह से चतरा के रास्ते कोयला ले जाने वाले वाहनों को रोकने के लिए कई दिनों तक आंदोलन किया गया था।
उस दौरान करीब छह दिनों तक कोयला वाहनों का परिचालन प्रभावित रहा था। बाद में प्रशासन की कार्रवाई के बाद दोबारा कोयला ढुलाई शुरू करायी गयी थी।
ग्रामीणों का कहना है कि कोयला परिवहन शुरू होने के बाद क्षेत्र में दिन-रात भारी वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। इसी वजह से वे एक बार फिर आंदोलन के लिए मजबूर हुए हैं।
मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांगों पर ठोस निर्णय होने तक धरना और चक्का जाम जारी रहेगा। अब प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत के जरिए इस गतिरोध का समाधान निकलने पर नजर रहेगी।
