मुंबई: अक्टूबर के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का असर घरेलू बाजार के सेंटीमेंट पर दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में चले गए।
सेंसेक्स-निफ्टी की कमजोर शुरुआत
बाजार खुलते ही सेंसेक्स 287.39 अंक यानी 0.39 फीसदी गिरकर 72,192.89 पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी 76.75 अंक यानी 0.34 फीसदी की गिरावट के साथ 22,543.70 पर खुला। शुरुआती कारोबार में ऑटो, सीमेंट और रियल्टी समेत कई सेक्टरों में दबाव देखने को मिला।
FII ने एक दिन में बेचे 10 हजार करोड़ से ज्यादा के शेयर
बाजार पर सबसे बड़ा दबाव विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली से बना हुआ है। एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, 30 सितंबर को FIIs ने भारतीय शेयरों में ₹10,148.41 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की। यह करीब छह महीनों में उनका सबसे बड़ा एकदिवसीय आउटफ्लो बताया गया है। सितंबर में विदेशी निवेशकों की कुल बिकवाली करीब ₹44,013 करोड़ तक पहुंच गई।
इसके मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 30 सितंबर को करीब ₹11,272 करोड़ की खरीदारी की, लेकिन विदेशी फंड की निकासी का दबाव बाजार पर बना रहा।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी बनी चिंता
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी से उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ा है। 1 अक्टूबर को अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड करीब 5.3 फीसदी के स्तर तक पहुंची, जिससे भारतीय बाजार समेत वैश्विक वित्तीय बाजारों में सतर्कता बढ़ी। ऊंची अमेरिकी यील्ड विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी परिसंपत्तियों को अपेक्षाकृत आकर्षक बना सकती है।
ऑटो और सीमेंट शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव
शुरुआती कारोबार में निफ्टी ऑटो, सीमेंट, रियल्टी, मीडिया और हेल्थकेयर प्रमुख कमजोर सेक्टर रहे और इनमें गिरावट 2.76 फीसदी तक पहुंची। एनर्जी, मेटल और फार्मा इंडेक्स भी दबाव में कारोबार करते नजर आए।
ऑटो शेयरों में महिंद्रा एंड महिंद्रा और मारुति जैसे स्टॉक्स पर दबाव रहा, जबकि अल्ट्राटेक सीमेंट भी शुरुआती कारोबार में कमजोर रहा।
IT शेयरों ने संभाला बाजार
बाजार की व्यापक कमजोरी के बीच आईटी शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी IT इंडेक्स 1 फीसदी से अधिक ऊपर रहा। इंफोसिस और टीसीएस समेत कई आईटी शेयरों में तेजी ने बाजार को कुछ सहारा दिया। प्राइवेट बैंक इंडेक्स में भी करीब 0.60 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।
बाजार के लिए आगे की दिशा
फिलहाल विदेशी फंड की निकासी, ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, महंगा कच्चा तेल और रुपये पर दबाव बाजार के लिए प्रमुख कारक बने हुए हैं। Reuters के मुताबिक, भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स लगातार आठवें साप्ताहिक नुकसान की ओर बढ़ रहे थे, जो करीब 25 वर्षों में सबसे लंबी गिरावट की श्रृंखला हो सकती है।
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