पटना, 5 नवंबर 2026। बिहार में शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव के नतीजों के बाद एनडीए के भीतर राजनीतिक खींचतान तेज होती दिख रही है। निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत के बाद भाजपा में शामिल होने की खबरों ने गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच सवाल खड़े कर दिए हैं। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने भी इस मुद्दे पर भाजपा से सवाल पूछे हैं।
चिराग पासवान का कहना है कि जिस पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार को हराकर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव जीतते हैं, उसी पार्टी के गठबंधन सहयोगी दल में उनका शामिल होना गठबंधन धर्म के लिहाज से कितना उचित है? हालांकि, दोनों निर्दलीय एमएलसी ने बाद में भाजपा की सदस्यता लेने की बात से इनकार करते हुए पार्टी को बाहर से समर्थन देने की बात कही।
यह पहला मौका नहीं है, जब चिराग ने एनडीए में रहते हुए गठबंधन की राजनीतिक लाइन से अलग अपनी राय रखी है। इससे पहले भी वह कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों पर अपनी ही सरकार को घेर चुके हैं।
एमएलसी चुनाव के बाद भाजपा और जदयू के बीच बढ़ी तल्खी
बिहार के शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव में जीत दर्ज करने वाले दो निर्दलीय उम्मीदवार बंशीधर ब्रासवासी और राहुल राज के भाजपा में शामिल होने की खबर सामने आई थी। इस पर चिराग पासवान ने भाजपा से सवाल किया कि गठबंधन के आधिकारिक उम्मीदवारों को हराकर जीतने वाले नेताओं को पार्टी में जगह देना कहां तक सही है।
इस मुद्दे पर जदयू ने भी आपत्ति जताई। जदयू नेता और एमएलसी नीरज कुमार ने कहा कि दोनों निर्दलीय उम्मीदवारों ने चुनाव में जदयू के आधिकारिक प्रत्याशियों को हराया था। ऐसे में उन्हें भाजपा में शामिल करना गठबंधन धर्म के खिलाफ है।
विवाद बढ़ने के बाद दोनों निर्दलीय एमएलसी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने भाजपा की सदस्यता नहीं ली है, बल्कि पार्टी को बाहर से समर्थन दिया है।
जमुई की घटना पर बोले थे- ‘मुझे शर्म आती है कि ऐसी सरकार का हिस्सा हूं’
चिराग पासवान इससे पहले जमुई में एक नाबालिग लड़की के साथ हुई छेड़छाड़ की घटना पर भी सरकार के खिलाफ खुलकर बोले थे। उन्होंने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उन्हें शर्म आती है कि वह ऐसी सरकार का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा था कि यदि अपराधियों के मन में पुलिस का डर नहीं रहेगा, तो कानून-व्यवस्था बनाए रखने का उद्देश्य क्या रह जाएगा? उनके इस बयान से सरकार और एनडीए के भीतर असहज स्थिति पैदा हुई थी।
मुख्य चुनाव आयुक्त के मुद्दे पर भी रखा था अलग रुख
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के दौरान भी चिराग पासवान ने अलग राय रखी थी।
उन्होंने कहा था कि युवाओं की ऊर्जा को रोका नहीं जा सकता और विरोध के तरीकों पर सवाल उठाने के बजाय उनके मुद्दों को समझने की जरूरत है। उस समय एनडीए के अन्य घटक दल मुख्य चुनाव आयुक्त के समर्थन में एकजुट थे। ऐसे माहौल में चिराग का बयान गठबंधन के भीतर चर्चा का विषय बना था।
भरत तिवारी एनकाउंटर पर पुलिस कार्रवाई पर उठाए थे सवाल
भरत तिवारी एनकाउंटर के मामले में भी चिराग पासवान ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। वह बिलौटी गांव पहुंचे थे और मृतक के परिजनों से मुलाकात की थी।
परिजनों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें गोली मारी। चिराग ने कहा था कि जिस तरीके से उनकी मौत हुई, उससे कुछ गलत होने की आशंका नजर आती है।
उन्होंने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने को अपनी प्राथमिकता बताते हुए कहा था कि परिजनों की बात उचित मंच तक पहुंचाई जाएगी। इस मामले में उन्होंने पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की जरूरत पर जोर दिया था।
‘गठबंधन में हूं, लेकिन रीढ़विहीन नहीं’
चिराग पासवान पर अक्सर आरोप लगते रहे हैं कि वह एनडीए में रहते हुए अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाए रखने और सहयोगी दलों पर दबाव बनाने के लिए ऐसे बयान देते हैं। राजनीतिक विश्लेषक इसे प्रेशर पॉलिटिक्स के रूप में देखते हैं।
हालांकि, चिराग इस तरह की रणनीति के आरोपों को खारिज करते रहे हैं। प्रभात खबर से बातचीत में उन्होंने कहा कि सच को सच कहना जरूरी है। बयान देते समय वह यह नहीं सोचते कि उससे किसे राजनीतिक फायदा या नुकसान होगा। उनकी जिम्मेदारी जनता के प्रति है और वह जनहित को ध्यान में रखकर अपनी बात रखते हैं।
उनका कहना है कि गठबंधन में शामिल होने का मतलब यह नहीं है कि गलत बातों पर भी चुप रहा जाए। इसी संदर्भ में उनका चर्चित बयान है- ‘गठबंधन में हूं, लेकिन रीढ़विहीन नहीं हूं।’
चिराग के इस रुख से साफ है कि वह एनडीए का हिस्सा रहते हुए भी कई मुद्दों पर अपनी स्वतंत्र राजनीतिक राय सार्वजनिक रूप से रखने से पीछे नहीं हटते।
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