भागलपुर, 5 नवंबर 2026। बिहार के भागलपुर जिले में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने जिले के पांच प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) को अपग्रेड कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का दर्जा देने की अधिसूचना जारी की है। इसके साथ ही प्रत्येक केंद्र में 24 श्रेणियों के कुल 47 नए पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है।
इस फैसले से जिले के ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। नए सीएचसी में विशेषज्ञ चिकित्सकों, मेडिकल ऑफिसरों और पैरामेडिकल कर्मचारियों की व्यवस्था की जाएगी, ताकि मरीजों को इलाज के लिए हर बार जिला मुख्यालय नहीं जाना पड़े।
नारायणपुर, खरीक समेत पांच प्रखंडों को मिलेगा लाभ
स्वास्थ्य विभाग के अवर सचिव नीरज कुमार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, भागलपुर जिले के पांच प्रखंडों के पीएचसी को सीएचसी में अपग्रेड किया गया है। इनमें शामिल हैं:
- नारायणपुर
- खरीक
- रंगराचौक
- इस्माइलपुर
- जगदीशपुर
इनमें इस्माइलपुर, रंगराचौक और खरीक जैसे बाढ़ प्रभावित एवं दियारा क्षेत्र भी शामिल हैं। इन इलाकों के मरीजों को आपात स्थिति में भागलपुर शहर तक पहुंचने में परेशानी होती है। ऐसे में सीएचसी का दर्जा मिलने से स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद है।
प्रत्येक सीएचसी में 24 श्रेणियों के 47 पद सृजित
सरकार ने पांचों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में बेहतर चिकित्सा व्यवस्था के लिए प्रत्येक केंद्र में 24 अलग-अलग श्रेणियों के कुल 47 पदों के सृजन को मंजूरी दी है।
इनमें प्रमुख पद इस प्रकार हैं:
- एक डिप्टी सुपरिंटेंडेंट
- एक जनरल सर्जन
- एक स्त्री रोग विशेषज्ञ
- एक एनेस्थेटिस्ट
- एक शिशु रोग विशेषज्ञ
- एक फिजिशियन
- छह मेडिकल ऑफिसर
- 12 जीएनएम
- चार सीनियर जीएनएम
- तीन लैबोरेटरी टेक्नीशियन
- दो सीनियर फार्मासिस्ट
- दो लोअर डिवीजन क्लर्क
इसके अलावा असिस्टेंट सैनिटरी सुपरवाइजर, असिस्टेंट मैट्रन, ऑप्थेल्मिक असिस्टेंट, डाटा असिस्टेंट, फिजियोथेरेपिस्ट, काउंसलर, असिस्टेंट हॉस्पिटल मैनेजर, सीनियर लैबोरेटरी टेक्नीशियन और अपर डिवीजन क्लर्क समेत अन्य पद भी शामिल हैं।
सात निश्चय-3 के तहत स्पेशियलिटी हॉस्पिटल बनाने की योजना
बिहार सरकार की सात निश्चय-3 योजना के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को विशिष्ट चिकित्सा सुविधाओं से लैस करने की योजना है। इसी क्रम में भागलपुर के इन पांच सीएचसी में हड्डी रोग, नेत्र रोग और ईएनटी यानी कान, नाक एवं गला रोग से जुड़े विशेषज्ञ चिकित्सा अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की जाएगी।
इससे फ्रैक्चर, आंखों की बीमारियों और कान-नाक-गला संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए मरीजों को स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ सलाह मिलने की संभावना है। हालांकि, इन सुविधाओं का वास्तविक लाभ डॉक्टरों की तैनाती और जरूरी चिकित्सा संसाधन उपलब्ध होने के बाद ही मिल सकेगा।
ग्रामीण मरीजों को समय और खर्च में मिल सकती है राहत
सीएचसी का दर्जा मिलने से पांचों प्रखंडों के ग्रामीणों को बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने का रास्ता खुलेगा। खासकर बाढ़ प्रभावित और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले मरीजों को छोटी-बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए जिला मुख्यालय जाने की जरूरत कम हो सकती है।
अब स्वास्थ्य विभाग के सामने सृजित पदों पर नियुक्ति, विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती और जरूरी मेडिकल उपकरण उपलब्ध कराने की चुनौती होगी। यदि ये काम समय पर पूरे होते हैं, तो भागलपुर के ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती मिल सकती है।
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