DRDO और अलवर की स्टार्टअप के बीच समझौता, भारत में बनेगा 20 mK डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर
नई दिल्ली: भारत में क्वांटम तकनीक से जुड़ी क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में DRDO ने राजस्थान की एक डीप-टेक स्टार्टअप के साथ समझौता किया है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (TDF) के तहत हुए इस समझौते के जरिए क्वांटम एप्लीकेशन के लिए 20 मिलीकेल्विन क्षमता वाला डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर देश में विकसित किया जाएगा।
TDF के तहत पहला बड़ा डीप-टेक प्रोजेक्ट
इस समझौते पर TDF के डायरेक्टर और अलवर स्थित Zero mK India Pvt. Ltd. के बीच हस्ताक्षर किए गए हैं। मंत्रालय के अनुसार, अत्याधुनिक और डीप-टेक परियोजनाओं के लिए स्वीकृत 500 करोड़ रुपये के फंड के तहत यह पहला हाई-वैल्यू प्रोजेक्ट एग्रीमेंट है।
DRDO ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य 20 mK-क्लास डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर का स्वदेशी विकास करना है। इस तकनीक को क्वांटम एप्लीकेशन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
क्या है डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर?
डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर एक विशेष क्रायोजेनिक सिस्टम है, जो तापमान को मिलीकेल्विन स्तर तक कम करने में सक्षम होता है। क्वांटम कंप्यूटिंग के कई प्लेटफॉर्म और संबंधित तकनीकों के संचालन व परीक्षण के लिए बेहद कम तापमान वाला नियंत्रित वातावरण आवश्यक होता है।
20 mK स्तर के ऐसे सिस्टम के भारत में विकास से क्वांटम तकनीक के लिए जरूरी क्रायोजेनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को घरेलू स्तर पर तैयार करने की क्षमता बढ़ सकती है।
आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में कदम
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह परियोजना नेशनल क्वांटम मिशन के अनुरूप है। इसका उद्देश्य क्वांटम टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड क्रायोजेनिक्स और रणनीतिक तकनीकों से जुड़े घरेलू इकोसिस्टम को मजबूत करना है।
मंत्रालय का कहना है कि स्वदेशी डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर के विकास से आयातित क्रायोजेनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही देश में क्वांटम तकनीक के लिए जरूरी तकनीकी क्षमताओं के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
DRDO-इंडस्ट्री सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस परियोजना से जुड़े DRDO, उद्योग और अन्य हितधारकों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह साझेदारी उभरती तकनीकों के क्षेत्र में DRDO और उद्योग के बीच भविष्य के सहयोग के लिए एक उदाहरण बनेगी।
रक्षा सचिव, रक्षा R&D विभाग के सचिव और DRDO चेयरमैन राजेश कुमार सिंह ने परियोजना से जुड़ी टीमों को निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए शुभकामनाएं दीं।
परियोजना की निगरानी, तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग की जिम्मेदारी सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी (SSPL) के डायरेक्टर और उनकी टीम संभाल रही है।DRDO और अलवर की स्टार्टअप के बीच समझौता, भारत में बनेगा 20 mK डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर
नई दिल्ली: भारत में क्वांटम तकनीक से जुड़ी क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में DRDO ने राजस्थान की एक डीप-टेक स्टार्टअप के साथ समझौता किया है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (TDF) के तहत हुए इस समझौते के जरिए क्वांटम एप्लीकेशन के लिए 20 मिलीकेल्विन क्षमता वाला डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर देश में विकसित किया जाएगा।
TDF के तहत पहला बड़ा डीप-टेक प्रोजेक्ट
इस समझौते पर TDF के डायरेक्टर और अलवर स्थित Zero mK India Pvt. Ltd. के बीच हस्ताक्षर किए गए हैं। मंत्रालय के अनुसार, अत्याधुनिक और डीप-टेक परियोजनाओं के लिए स्वीकृत 500 करोड़ रुपये के फंड के तहत यह पहला हाई-वैल्यू प्रोजेक्ट एग्रीमेंट है।
DRDO ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य 20 mK-क्लास डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर का स्वदेशी विकास करना है। इस तकनीक को क्वांटम एप्लीकेशन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
क्या है डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर?
डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर एक विशेष क्रायोजेनिक सिस्टम है, जो तापमान को मिलीकेल्विन स्तर तक कम करने में सक्षम होता है। क्वांटम कंप्यूटिंग के कई प्लेटफॉर्म और संबंधित तकनीकों के संचालन व परीक्षण के लिए बेहद कम तापमान वाला नियंत्रित वातावरण आवश्यक होता है।
20 mK स्तर के ऐसे सिस्टम के भारत में विकास से क्वांटम तकनीक के लिए जरूरी क्रायोजेनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को घरेलू स्तर पर तैयार करने की क्षमता बढ़ सकती है।
आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में कदम
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह परियोजना नेशनल क्वांटम मिशन के अनुरूप है। इसका उद्देश्य क्वांटम टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड क्रायोजेनिक्स और रणनीतिक तकनीकों से जुड़े घरेलू इकोसिस्टम को मजबूत करना है।
मंत्रालय का कहना है कि स्वदेशी डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर के विकास से आयातित क्रायोजेनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही देश में क्वांटम तकनीक के लिए जरूरी तकनीकी क्षमताओं के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
DRDO-इंडस्ट्री सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस परियोजना से जुड़े DRDO, उद्योग और अन्य हितधारकों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह साझेदारी उभरती तकनीकों के क्षेत्र में DRDO और उद्योग के बीच भविष्य के सहयोग के लिए एक उदाहरण बनेगी।
रक्षा सचिव, रक्षा R&D विभाग के सचिव और DRDO चेयरमैन राजेश कुमार सिंह ने परियोजना से जुड़ी टीमों को निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए शुभकामनाएं दीं।
परियोजना की निगरानी, तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग की जिम्मेदारी सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी (SSPL) के डायरेक्टर और उनकी टीम संभाल रही है।DRDO और अलवर की स्टार्टअप के बीच समझौता, भारत में बनेगा 20 mK डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर
नई दिल्ली: भारत में क्वांटम तकनीक से जुड़ी क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में DRDO ने राजस्थान की एक डीप-टेक स्टार्टअप के साथ समझौता किया है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (TDF) के तहत हुए इस समझौते के जरिए क्वांटम एप्लीकेशन के लिए 20 मिलीकेल्विन क्षमता वाला डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर देश में विकसित किया जाएगा।
TDF के तहत पहला बड़ा डीप-टेक प्रोजेक्ट
इस समझौते पर TDF के डायरेक्टर और अलवर स्थित Zero mK India Pvt. Ltd. के बीच हस्ताक्षर किए गए हैं। मंत्रालय के अनुसार, अत्याधुनिक और डीप-टेक परियोजनाओं के लिए स्वीकृत 500 करोड़ रुपये के फंड के तहत यह पहला हाई-वैल्यू प्रोजेक्ट एग्रीमेंट है।
DRDO ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य 20 mK-क्लास डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर का स्वदेशी विकास करना है। इस तकनीक को क्वांटम एप्लीकेशन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
क्या है डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर?
डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर एक विशेष क्रायोजेनिक सिस्टम है, जो तापमान को मिलीकेल्विन स्तर तक कम करने में सक्षम होता है। क्वांटम कंप्यूटिंग के कई प्लेटफॉर्म और संबंधित तकनीकों के संचालन व परीक्षण के लिए बेहद कम तापमान वाला नियंत्रित वातावरण आवश्यक होता है।
20 mK स्तर के ऐसे सिस्टम के भारत में विकास से क्वांटम तकनीक के लिए जरूरी क्रायोजेनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को घरेलू स्तर पर तैयार करने की क्षमता बढ़ सकती है।
आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में कदम
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह परियोजना नेशनल क्वांटम मिशन के अनुरूप है। इसका उद्देश्य क्वांटम टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड क्रायोजेनिक्स और रणनीतिक तकनीकों से जुड़े घरेलू इकोसिस्टम को मजबूत करना है।
मंत्रालय का कहना है कि स्वदेशी डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर के विकास से आयातित क्रायोजेनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही देश में क्वांटम तकनीक के लिए जरूरी तकनीकी क्षमताओं के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
DRDO-इंडस्ट्री सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस परियोजना से जुड़े DRDO, उद्योग और अन्य हितधारकों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह साझेदारी उभरती तकनीकों के क्षेत्र में DRDO और उद्योग के बीच भविष्य के सहयोग के लिए एक उदाहरण बनेगी।
रक्षा सचिव, रक्षा R&D विभाग के सचिव और DRDO चेयरमैन राजेश कुमार सिंह ने परियोजना से जुड़ी टीमों को निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए शुभकामनाएं दीं।
परियोजना की निगरानी, तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग की जिम्मेदारी सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी (SSPL) के डायरेक्टर और उनकी टीम संभाल रही है।DRDO और अलवर की स्टार्टअप के बीच समझौता, भारत में बनेगा 20 mK डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर
नई दिल्ली: भारत में क्वांटम तकनीक से जुड़ी क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में DRDO ने राजस्थान की एक डीप-टेक स्टार्टअप के साथ समझौता किया है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (TDF) के तहत हुए इस समझौते के जरिए क्वांटम एप्लीकेशन के लिए 20 मिलीकेल्विन क्षमता वाला डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर देश में विकसित किया जाएगा।
TDF के तहत पहला बड़ा डीप-टेक प्रोजेक्ट
इस समझौते पर TDF के डायरेक्टर और अलवर स्थित Zero mK India Pvt. Ltd. के बीच हस्ताक्षर किए गए हैं। मंत्रालय के अनुसार, अत्याधुनिक और डीप-टेक परियोजनाओं के लिए स्वीकृत 500 करोड़ रुपये के फंड के तहत यह पहला हाई-वैल्यू प्रोजेक्ट एग्रीमेंट है।
DRDO ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य 20 mK-क्लास डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर का स्वदेशी विकास करना है। इस तकनीक को क्वांटम एप्लीकेशन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
क्या है डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर?
डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर एक विशेष क्रायोजेनिक सिस्टम है, जो तापमान को मिलीकेल्विन स्तर तक कम करने में सक्षम होता है। क्वांटम कंप्यूटिंग के कई प्लेटफॉर्म और संबंधित तकनीकों के संचालन व परीक्षण के लिए बेहद कम तापमान वाला नियंत्रित वातावरण आवश्यक होता है।
20 mK स्तर के ऐसे सिस्टम के भारत में विकास से क्वांटम तकनीक के लिए जरूरी क्रायोजेनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को घरेलू स्तर पर तैयार करने की क्षमता बढ़ सकती है।
आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में कदम
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह परियोजना नेशनल क्वांटम मिशन के अनुरूप है। इसका उद्देश्य क्वांटम टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड क्रायोजेनिक्स और रणनीतिक तकनीकों से जुड़े घरेलू इकोसिस्टम को मजबूत करना है।
मंत्रालय का कहना है कि स्वदेशी डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर के विकास से आयातित क्रायोजेनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही देश में क्वांटम तकनीक के लिए जरूरी तकनीकी क्षमताओं के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
DRDO-इंडस्ट्री सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस परियोजना से जुड़े DRDO, उद्योग और अन्य हितधारकों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह साझेदारी उभरती तकनीकों के क्षेत्र में DRDO और उद्योग के बीच भविष्य के सहयोग के लिए एक उदाहरण बनेगी।
रक्षा सचिव, रक्षा R&D विभाग के सचिव और DRDO चेयरमैन राजेश कुमार सिंह ने परियोजना से जुड़ी टीमों को निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए शुभकामनाएं दीं।
परियोजना की निगरानी, तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग की जिम्मेदारी सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी (SSPL) के डायरेक्टर और उनकी टीम संभाल रही है।DRDO और अलवर की स्टार्टअप के बीच समझौता, भारत में बनेगा 20 mK डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर
नई दिल्ली: भारत में क्वांटम तकनीक से जुड़ी क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में DRDO ने राजस्थान की एक डीप-टेक स्टार्टअप के साथ समझौता किया है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (TDF) के तहत हुए इस समझौते के जरिए क्वांटम एप्लीकेशन के लिए 20 मिलीकेल्विन क्षमता वाला डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर देश में विकसित किया जाएगा।
TDF के तहत पहला बड़ा डीप-टेक प्रोजेक्ट
इस समझौते पर TDF के डायरेक्टर और अलवर स्थित Zero mK India Pvt. Ltd. के बीच हस्ताक्षर किए गए हैं। मंत्रालय के अनुसार, अत्याधुनिक और डीप-टेक परियोजनाओं के लिए स्वीकृत 500 करोड़ रुपये के फंड के तहत यह पहला हाई-वैल्यू प्रोजेक्ट एग्रीमेंट है।
DRDO ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य 20 mK-क्लास डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर का स्वदेशी विकास करना है। इस तकनीक को क्वांटम एप्लीकेशन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
क्या है डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर?
डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर एक विशेष क्रायोजेनिक सिस्टम है, जो तापमान को मिलीकेल्विन स्तर तक कम करने में सक्षम होता है। क्वांटम कंप्यूटिंग के कई प्लेटफॉर्म और संबंधित तकनीकों के संचालन व परीक्षण के लिए बेहद कम तापमान वाला नियंत्रित वातावरण आवश्यक होता है।
20 mK स्तर के ऐसे सिस्टम के भारत में विकास से क्वांटम तकनीक के लिए जरूरी क्रायोजेनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को घरेलू स्तर पर तैयार करने की क्षमता बढ़ सकती है।
आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में कदम
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह परियोजना नेशनल क्वांटम मिशन के अनुरूप है। इसका उद्देश्य क्वांटम टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड क्रायोजेनिक्स और रणनीतिक तकनीकों से जुड़े घरेलू इकोसिस्टम को मजबूत करना है।
मंत्रालय का कहना है कि स्वदेशी डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर के विकास से आयातित क्रायोजेनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही देश में क्वांटम तकनीक के लिए जरूरी तकनीकी क्षमताओं के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
DRDO-इंडस्ट्री सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस परियोजना से जुड़े DRDO, उद्योग और अन्य हितधारकों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह साझेदारी उभरती तकनीकों के क्षेत्र में DRDO और उद्योग के बीच भविष्य के सहयोग के लिए एक उदाहरण बनेगी।
रक्षा सचिव, रक्षा R&D विभाग के सचिव और DRDO चेयरमैन राजेश कुमार सिंह ने परियोजना से जुड़ी टीमों को निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए शुभकामनाएं दीं।
परियोजना की निगरानी, तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग की जिम्मेदारी सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी (SSPL) के डायरेक्टर और उनकी टीम संभाल रही है।DRDO और अलवर की स्टार्टअप के बीच समझौता, भारत में बनेगा 20 mK डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर
नई दिल्ली: भारत में क्वांटम तकनीक से जुड़ी क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में DRDO ने राजस्थान की एक डीप-टेक स्टार्टअप के साथ समझौता किया है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (TDF) के तहत हुए इस समझौते के जरिए क्वांटम एप्लीकेशन के लिए 20 मिलीकेल्विन क्षमता वाला डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर देश में विकसित किया जाएगा।
TDF के तहत पहला बड़ा डीप-टेक प्रोजेक्ट
इस समझौते पर TDF के डायरेक्टर और अलवर स्थित Zero mK India Pvt. Ltd. के बीच हस्ताक्षर किए गए हैं। मंत्रालय के अनुसार, अत्याधुनिक और डीप-टेक परियोजनाओं के लिए स्वीकृत 500 करोड़ रुपये के फंड के तहत यह पहला हाई-वैल्यू प्रोजेक्ट एग्रीमेंट है।
DRDO ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य 20 mK-क्लास डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर का स्वदेशी विकास करना है। इस तकनीक को क्वांटम एप्लीकेशन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
क्या है डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर?
डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर एक विशेष क्रायोजेनिक सिस्टम है, जो तापमान को मिलीकेल्विन स्तर तक कम करने में सक्षम होता है। क्वांटम कंप्यूटिंग के कई प्लेटफॉर्म और संबंधित तकनीकों के संचालन व परीक्षण के लिए बेहद कम तापमान वाला नियंत्रित वातावरण आवश्यक होता है।
20 mK स्तर के ऐसे सिस्टम के भारत में विकास से क्वांटम तकनीक के लिए जरूरी क्रायोजेनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को घरेलू स्तर पर तैयार करने की क्षमता बढ़ सकती है।
आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में कदम
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह परियोजना नेशनल क्वांटम मिशन के अनुरूप है। इसका उद्देश्य क्वांटम टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड क्रायोजेनिक्स और रणनीतिक तकनीकों से जुड़े घरेलू इकोसिस्टम को मजबूत करना है।
मंत्रालय का कहना है कि स्वदेशी डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर के विकास से आयातित क्रायोजेनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही देश में क्वांटम तकनीक के लिए जरूरी तकनीकी क्षमताओं के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
DRDO-इंडस्ट्री सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस परियोजना से जुड़े DRDO, उद्योग और अन्य हितधारकों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह साझेदारी उभरती तकनीकों के क्षेत्र में DRDO और उद्योग के बीच भविष्य के सहयोग के लिए एक उदाहरण बनेगी।
रक्षा सचिव, रक्षा R&D विभाग के सचिव और DRDO चेयरमैन राजेश कुमार सिंह ने परियोजना से जुड़ी टीमों को निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए शुभकामनाएं दीं।
परियोजना की निगरानी, तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग की जिम्मेदारी सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी (SSPL) के डायरेक्टर और उनकी टीम संभाल रही है।DRDO और अलवर की स्टार्टअप के बीच समझौता, भारत में बनेगा 20 mK डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर
नई दिल्ली: भारत में क्वांटम तकनीक से जुड़ी क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में DRDO ने राजस्थान की एक डीप-टेक स्टार्टअप के साथ समझौता किया है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (TDF) के तहत हुए इस समझौते के जरिए क्वांटम एप्लीकेशन के लिए 20 मिलीकेल्विन क्षमता वाला डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर देश में विकसित किया जाएगा।
TDF के तहत पहला बड़ा डीप-टेक प्रोजेक्ट
इस समझौते पर TDF के डायरेक्टर और अलवर स्थित Zero mK India Pvt. Ltd. के बीच हस्ताक्षर किए गए हैं। मंत्रालय के अनुसार, अत्याधुनिक और डीप-टेक परियोजनाओं के लिए स्वीकृत 500 करोड़ रुपये के फंड के तहत यह पहला हाई-वैल्यू प्रोजेक्ट एग्रीमेंट है।
DRDO ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य 20 mK-क्लास डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर का स्वदेशी विकास करना है। इस तकनीक को क्वांटम एप्लीकेशन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
क्या है डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर?
डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर एक विशेष क्रायोजेनिक सिस्टम है, जो तापमान को मिलीकेल्विन स्तर तक कम करने में सक्षम होता है। क्वांटम कंप्यूटिंग के कई प्लेटफॉर्म और संबंधित तकनीकों के संचालन व परीक्षण के लिए बेहद कम तापमान वाला नियंत्रित वातावरण आवश्यक होता है।
20 mK स्तर के ऐसे सिस्टम के भारत में विकास से क्वांटम तकनीक के लिए जरूरी क्रायोजेनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को घरेलू स्तर पर तैयार करने की क्षमता बढ़ सकती है।
आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में कदम
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह परियोजना नेशनल क्वांटम मिशन के अनुरूप है। इसका उद्देश्य क्वांटम टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड क्रायोजेनिक्स और रणनीतिक तकनीकों से जुड़े घरेलू इकोसिस्टम को मजबूत करना है।
मंत्रालय का कहना है कि स्वदेशी डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर के विकास से आयातित क्रायोजेनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही देश में क्वांटम तकनीक के लिए जरूरी तकनीकी क्षमताओं के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
DRDO-इंडस्ट्री सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस परियोजना से जुड़े DRDO, उद्योग और अन्य हितधारकों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह साझेदारी उभरती तकनीकों के क्षेत्र में DRDO और उद्योग के बीच भविष्य के सहयोग के लिए एक उदाहरण बनेगी।
रक्षा सचिव, रक्षा R&D विभाग के सचिव और DRDO चेयरमैन राजेश कुमार सिंह ने परियोजना से जुड़ी टीमों को निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए शुभकामनाएं दीं।
परियोजना की निगरानी, तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग की जिम्मेदारी सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी (SSPL) के डायरेक्टर और उनकी टीम संभाल रही है।नई दिल्ली: भारत में क्वांटम तकनीक से जुड़ी क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में DRDO ने राजस्थान की एक डीप-टेक स्टार्टअप के साथ समझौता किया है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (TDF) के तहत हुए इस समझौते के जरिए क्वांटम एप्लीकेशन के लिए 20 मिलीकेल्विन क्षमता वाला डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर देश में विकसित किया जाएगा।
TDF के तहत पहला बड़ा डीप-टेक प्रोजेक्ट
इस समझौते पर TDF के डायरेक्टर और अलवर स्थित Zero mK India Pvt. Ltd. के बीच हस्ताक्षर किए गए हैं। मंत्रालय के अनुसार, अत्याधुनिक और डीप-टेक परियोजनाओं के लिए स्वीकृत 500 करोड़ रुपये के फंड के तहत यह पहला हाई-वैल्यू प्रोजेक्ट एग्रीमेंट है।
DRDO ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य 20 mK-क्लास डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर का स्वदेशी विकास करना है। इस तकनीक को क्वांटम एप्लीकेशन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
क्या है डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर?
डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर एक विशेष क्रायोजेनिक सिस्टम है, जो तापमान को मिलीकेल्विन स्तर तक कम करने में सक्षम होता है। क्वांटम कंप्यूटिंग के कई प्लेटफॉर्म और संबंधित तकनीकों के संचालन व परीक्षण के लिए बेहद कम तापमान वाला नियंत्रित वातावरण आवश्यक होता है।
20 mK स्तर के ऐसे सिस्टम के भारत में विकास से क्वांटम तकनीक के लिए जरूरी क्रायोजेनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को घरेलू स्तर पर तैयार करने की क्षमता बढ़ सकती है।
आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में कदम
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह परियोजना नेशनल क्वांटम मिशन के अनुरूप है। इसका उद्देश्य क्वांटम टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड क्रायोजेनिक्स और रणनीतिक तकनीकों से जुड़े घरेलू इकोसिस्टम को मजबूत करना है।
मंत्रालय का कहना है कि स्वदेशी डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर के विकास से आयातित क्रायोजेनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही देश में क्वांटम तकनीक के लिए जरूरी तकनीकी क्षमताओं के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
DRDO-इंडस्ट्री सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस परियोजना से जुड़े DRDO, उद्योग और अन्य हितधारकों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह साझेदारी उभरती तकनीकों के क्षेत्र में DRDO और उद्योग के बीच भविष्य के सहयोग के लिए एक उदाहरण बनेगी।
रक्षा सचिव, रक्षा R&D विभाग के सचिव और DRDO चेयरमैन राजेश कुमार सिंह ने परियोजना से जुड़ी टीमों को निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए शुभकामनाएं दीं।
परियोजना की निगरानी, तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग की जिम्मेदारी सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी (SSPL) के डायरेक्टर और उनकी टीम संभाल रही है।
