नई दिल्ली: दिल की जांच के लिए इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम यानी ECG एक सामान्य और महत्वपूर्ण टेस्ट है। लेकिन इसकी एक सीमा यह है कि इसमें दिल की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को अपेक्षाकृत कम समय के लिए रिकॉर्ड किया जाता है। ऐसे में जिन लोगों में धड़कन की गड़बड़ी कभी-कभी होती है, उनके टेस्ट के दौरान रिदम सामान्य रहने पर समस्या रिकॉर्ड में नहीं आ सकती।
ऐसे मामलों में डॉक्टर एम्बुलेटरी ECG मॉनिटरिंग, जिसे आमतौर पर Holter Monitoring कहा जाता है, की सलाह दे सकते हैं। यह डिवाइस लंबे समय तक दिल की धड़कन रिकॉर्ड करता है, जिससे रोजमर्रा की गतिविधियों के दौरान होने वाले बदलावों को समझने में मदद मिलती है।
क्या होता है Holter Monitor?
कोलकाता के बीएम बिरला हार्ट रिसर्च सेंटर के कार्डियोलॉजी विभाग के डायरेक्टर और प्रमुख इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अनिल मिश्रा के मुताबिक, Holter Monitor एक छोटा और पोर्टेबल बैटरी संचालित उपकरण है। यह आम तौर पर 24 से 48 घंटे तक लगातार ECG रिकॉर्ड कर सकता है। कुछ मरीजों में डॉक्टर इससे अधिक अवधि की निगरानी की सलाह भी दे सकते हैं।
सामान्य ECG के विपरीत इसमें मरीज के सामान्य कामकाज, आराम और सोने के समय भी हृदय की रिदम रिकॉर्ड होती रहती है।
किन स्थितियों में उपयोगी हो सकता है?
डॉ. मिश्रा के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति को बार-बार दिल की धड़कन तेज या अनियमित महसूस होना, चक्कर आना, घबराहट या बेहोशी जैसा महसूस होना जैसी शिकायतें रहती हैं, तो लंबे समय की ECG मॉनिटरिंग उपयोगी हो सकती है।
इससे बीच-बीच में होने वाली कुछ रिदम संबंधी समस्याओं को रिकॉर्ड करने का मौका बढ़ता है। इनमें एट्रियल फिब्रिलेशन, बार-बार समय से पहले होने वाली धड़कन, कुछ प्रकार की टैचीकार्डिया और इलेक्ट्रिकल कंडक्शन में अस्थायी रुकावट जैसी स्थितियां शामिल हो सकती हैं।
लक्षण और हार्ट रिदम का संबंध समझने में मदद
Holter Monitoring की एक उपयोगिता यह भी है कि मरीज को जिस समय कोई लक्षण महसूस होता है, उस दौरान रिकॉर्ड हुई हृदय गतिविधि का विश्लेषण किया जा सकता है।
यदि लक्षण के समय असामान्य रिदम दर्ज होती है, तो डॉक्टर को उसके संभावित कारण को समझने में मदद मिल सकती है। वहीं, अगर शिकायत के दौरान हृदय की रिदम सामान्य रहती है, तो चिकित्सक दूसरे संभावित कारणों की ओर भी जांच बढ़ा सकते हैं।
हर मरीज के लिए समान अवधि की मॉनिटरिंग जरूरी नहीं
विशेषज्ञ के मुताबिक, मॉनिटरिंग कितने समय तक की जाए, यह लक्षण कितनी बार सामने आते हैं, इस पर निर्भर कर सकता है। दिन में कई बार समस्या महसूस होने वाले व्यक्ति के लिए 24 घंटे की निगरानी पर्याप्त हो सकती है। दूसरी ओर, यदि लक्षण कई सप्ताह में कभी-कभार आते हैं, तो डॉक्टर लंबे समय तक काम करने वाले इवेंट मॉनिटर या पैच आधारित सिस्टम पर विचार कर सकते हैं।
इसलिए केवल एक सामान्य ECG रिपोर्ट के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि हर तरह की रिदम समस्या मौजूद नहीं है।
किन लक्षणों में डॉक्टर से सलाह जरूरी?
अगर तेज धड़कन के साथ सीने में दर्द, बहुत अधिक सांस फूलना, बेहोशी या बेहोशी जैसा महसूस होना हो, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। पहले से हृदय संबंधी बीमारी वाले लोगों या परिवार में अचानक कार्डियक डेथ का इतिहास होने की स्थिति में भी डॉक्टर से परामर्श महत्वपूर्ण है।
हालांकि, Holter Monitor का इस्तेमाल सामान्य ECG का विकल्प मानकर नहीं किया जाता। ECG अब भी हृदय की जांच का अहम साधन है। लंबे समय की मॉनिटरिंग का उद्देश्य खास तौर पर उन मामलों में मदद करना है, जहां लक्षण लगातार नहीं बल्कि बीच-बीच में दिखाई देते हैं और सामान्य ECG के दौरान उन्हें रिकॉर्ड करना मुश्किल हो सकता है।
