Saturday, June 13, 2026

AI डेटा-सेंटर्स की बढ़ती मांग ने DRAM चिप्स की कीमत इतनी बढ़ा दी है कि स्मार्टफोन बनाना पहले से कहीं ज्यादा महंगा हो गया है.

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अगर आप ऐसा सोच रहे हैं कि अगला स्मार्टफोन खरीदने से पहले थोड़ा और इंतजार कर लेना चाहिए तो शायद आपको अपने इस फैसले का नुकसान झेलना पड़ सकता है. ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं कि क्योंकि कई बड़े-बड़े स्मार्टफोन मेकर्स और एक्सपर्ट्स कई बार ये बात कह चुके हैं कि स्मार्टफोन की कीमत बढ़ने वाली है.

लंदन की स्मार्टफोन कंपनी नथिंग के को-फाउडर कार्ल पीई (Carl Pei) ने एक बार फिर एक्स पर अपनी पुरानी पोस्ट को रीशेयर करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया है कि 2026 में स्मार्टफोन की कीमतें तेजी से बढ़ने वाली हैं. उन्होंने बताया कि यह महंगाई किसी ब्रांड की मनमानी नहीं, बल्कि एक गहरी तकनीकी और आर्थिक समस्या की वजह से आ रही है.

दरअसल, यह पूरा मामला RAM यानी DRAM मेमोरी चिप्स से जुड़ा है. दुनियाभर में एआई डेटा सेंटर्स की मांग इतनी तेजी से बढ़ी है कि Samsung, SK Hynix और Micron जैसी कंपनियों ने अपनी मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी को स्मार्टफोन्स के बजाय AI सर्वर्स के लिए जरूरी हाई-बैंडविड्थ मेमोरी बनाने की तरफ मोड़ लिया है.

AI डेटा सेंटर्स बना सबसे बड़ी वजह

Google, Amazon, Meta और Microsoft जैसी टेक्नोलॉजी वर्ल्ड की दिग्गज कंपनियों ने मिलकर अकेले 2026 में AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगभग 650 अरब डॉलर यानी करीब 61 लाख 88 हजार करोड़ रुपये खर्च कर दिया है. इस रेस में स्मार्टफोन निर्माताओं की कोई प्राथमिकता नहीं है.

इसका नतीजा यह हुआ है कि जो मेमोरी चिप एक साल पहले तक किसी मिड-रेंज स्मार्टफोन में 20 डॉलर यानी करीब 1,900 रुपये में लग जाती थी, अब उसकी कीमत 100 से 120 डॉलर यानी करीब 9,600 से 11,500 रुपये तक पहुंच गई है. कार्ल ने खुद बताया कि Nothing Phone (4a) की डेवलपमेंट के दौरान मेमोरी की कीमत दो बार दोगुनी हो गई. पहले एक बार, और फिर मार्केट स्थिर होने से पहले ही दूसरी बार कीमत बढ़ी.

कुछ हफ्ते पहले नथिंग इंडिया के को-फाउंडर और प्रेसिडेंट Akis Evangelidis ने भी इस पूरे संकट को और साफ तरीके से समझाते हुए अपने इंस्टाग्राम पर पोस्ट करके लिखा, “AI चिप्स की मांग जल्द रुकने वाली नहीं है. हमारा अनुमान है कि यह ट्रेंड कम से कम अगले साल की दूसरी छमाही तक जारी रहेगा. स्मार्टफोन खरीदने का सबसे सही समय असल में कल ही था.” अकिस का बयान सुनने में भले ही हल्का लग रहा है, लेकिन इसमें एक बड़ी चेतावनी भी छुपी हुई है कि जो लोग आने वाले कुछ महीनों में नया स्मार्टफोन खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं, उन्हें ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है.

भारतीय बाजार पर सबसे ज्यादा असर

भारत में इसका असर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है क्योंकि यहां का सबसे बड़ा स्मार्टफोन सेगमेंट 15,000 से 30,000 रुपये की रेंज में है और यही वो सेगमेंट है, जो सबसे ज्यादा दबाव में है. Samsung Galaxy M36 5G की कीमत 17,499 रुपये से बढ़कर 20,999 रुपये हो चुकी है. OnePlus 15R 47,999 से 50,499 रुपये पर पहुंच गया है. Nothing Phone 3a Lite की कीमत भी लॉन्च के बाद से ऊपर जा चुकी है.

भारत की स्मार्टफोन मेकिंग कंपनी लावा इंटरनेशनल के SVP सुमित सिंह के मुताबिक, पहले किसी 400 डॉलर के फोन में मेमोरी की हिस्सेदारी कुल हार्डवेयर लागत का 15 से 20 प्रतिशत हुआ करती थी. अब यह आंकड़ा बाकी सभी पुर्जों के बराबर यानी 50 प्रतिशत तक पहुंच गया है. कार्ल पीई के शब्दों में कहें तो अब मेमोरी की लागत प्रोसेसर और डिस्प्ले को मिलाकर जितनी होती है, उससे भी ज्यादा हो गई है.

फेस्टिव सेल का इंतजार अब काम नहीं आएगा

भारत में बहुत सारे लोग ऐसा सोचते हैं कि फेस्टिव सेल जैसे दिवाली या किसी अन्य बड़ी सेल का इंतजार करके सस्ते फोन खरीद लेंगे, लेकिन इस बार उनकी ये स्ट्रैटेजी काम नहीं करेगी. काउंटरपॉइंट रिसर्च की रिपोर्ट बताती है कि DRAM की कीमतें 2025 में पहले ही 172 फीसदी बढ़ चुकी हैं और 2026 की दूसरी तिमाही तक 40 फीसदी और बढ़ सकती हैं. नई फैब्रिकेशन फैक्ट्रियों से सप्लाई 2027 से पहले नहीं बढ़ने वाली.

ऐसे में फरवरी 2026 के बाद से कई नए एंड्रॉयड फोन अपने पिछले मॉडल्स से 100 डॉलर तक महंगी कीमत पर लॉन्च हुए हैं. नथिंग ने भारत में Optiemus के साथ 10 करोड़ डॉलर का जॉइंट वेंचर करके लोकल मैन्युफैक्चरिंग का रास्ता चुना है, लेकिन जब तक चिप खुद भारत में ही नहीं बनती, तब तक स्मार्टफोन की महंगी कीमत से लोगों को राहत नहीं मिल सकती.

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