Monday, July 13, 2026

पश्चिमी सिंहभूम में बढ़ा मलेरिया का खतरा, 86 गांव रेड जोन घोषित, स्वास्थ्य विभाग ने तेज किया अभियान

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कोल्हान प्रमंडल के पश्चिमी सिंहभूम जिले में मलेरिया के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। खासकर प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम (PF) मलेरिया के संक्रमण में तेजी आने के बाद प्रशासन ने जिले के 86 गांवों को मलेरिया रेड जोन घोषित किया है। संक्रमण पर नियंत्रण के लिए व्यापक जांच, उपचार और जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग की मिशन उदय 2.0 पहल के तहत 6 जुलाई से गांव-गांव जाकर लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है। अब तक 21,833 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिसमें 700 लोगों में पीएफ मलेरिया की पुष्टि हुई है। इनमें 352 ऐसे संक्रमित पाए गए हैं, जिनमें बीमारी के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं थे। विभाग के अनुसार, बिना लक्षण वाले मरीज संक्रमण फैलने की दृष्टि से बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

इसी अभियान के दौरान छह दिनों के भीतर जिले में कुल 1,143 मलेरिया संक्रमितों की पहचान हुई है। अधिकारियों का मानना है कि कई ग्रामीण इलाकों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है, इसलिए व्यापक स्तर पर जांच अभियान जारी रखना जरूरी है।

गोइलकेरा और मनोहरपुर सबसे अधिक प्रभावित

जिले के गोइलकेरा और मनोहरपुर प्रखंड मलेरिया संक्रमण के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं। गोइलकेरा में 4,775 लोगों की जांच के दौरान 433 लोग पीएफ मलेरिया से संक्रमित मिले, जबकि मनोहरपुर में 5,157 लोगों की स्क्रीनिंग में 103 संक्रमितों की पुष्टि हुई।

मनोहरपुर प्रखंड के छोटानागरा, जामकुंडिया, सलाई, अंकुआ और पंचपहिया उपस्वास्थ्य केंद्रों के अंतर्गत आने वाले 38 गांवों में विशेष स्वास्थ्य अभियान चलाया जा रहा है। स्वास्थ्यकर्मी घर-घर पहुंचकर जांच कर रहे हैं, संक्रमितों को दवाएं उपलब्ध करा रहे हैं और ग्रामीणों को मच्छरों से बचाव के उपायों की जानकारी दे रहे हैं। यह विशेष अभियान 15 जुलाई तक जारी रहेगा।

बिना लक्षण वाले संक्रमितों पर विशेष नजर

सिविल सर्जन डॉ. जुझार माझी ने बताया कि बड़ी संख्या में ऐसे मरीज मिले हैं जिनमें मलेरिया के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं हैं। उनके अनुसार, ऐसे संक्रमित सामान्य दिनचर्या जारी रखते हैं, जिससे बीमारी के फैलने की आशंका बढ़ जाती है। इसी कारण विभाग ने घर-घर स्क्रीनिंग अभियान को और तेज कर दिया है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि किसी को बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, कमजोरी, उल्टी या शरीर में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर मलेरिया की जांच कराएं। समय पर इलाज शुरू होने से ब्रेन मलेरिया जैसी गंभीर जटिलताओं और संभावित जानलेवा स्थिति से बचा जा सकता है।

स्वास्थ्य विभाग की सलाह

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से नियमित रूप से मच्छरदानी का उपयोग करने, घर और आसपास पानी जमा नहीं होने देने, पूरी बांह के कपड़े पहनने तथा बुखार होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने की अपील की है। विभाग का कहना है कि समय पर जांच, उपचार और जनजागरूकता के माध्यम से ही मलेरिया के बढ़ते प्रकोप पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

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