Wednesday, October 7, 2026

Navratri 2026: इस बार 10 दिन का होगा शारदीय नवरात्र, दो दिन महागौरी की पूजा; जानें पूरा क्रम.

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पटना, 7 अक्टूबर 2026: शक्ति आराधना का प्रमुख पर्व शारदीय नवरात्र इस वर्ष 11 अक्टूबर से शुरू होगा। अष्टमी तिथि दो दिन पड़ने के कारण नवरात्र का क्रम सामान्य नौ दिनों के बजाय 10 दिनों का रहेगा। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाएगी।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 11 अक्टूबर रविवार को चित्रा नक्षत्र, वैधृति योग, द्विपुष्कर योग और बव करण के संयोग में कलश स्थापना के साथ नवरात्र आरंभ होगा।

18 और 19 अक्टूबर को महागौरी की पूजा

इस बार अष्टमी तिथि 18 और 19 अक्टूबर को रहेगी। ऐसे में दोनों दिन मां महागौरी की आराधना होगी। अष्टमी व्रत और विशेष शृंगार-पूजन 18 अक्टूबर को किया जाएगा।

इसके बाद 20 अक्टूबर को नवमी तिथि रहेगी। सूर्योदय के समय नवमी होने के कारण महानवमी का व्रत और पूजन इसी दिन किया जाएगा। उदया तिथि की मान्यता के अनुसार 21 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी।

हाथी पर होगा मां दुर्गा का आगमन

इस वर्ष मां दुर्गा के आगमन और विदाई का वाहन हाथी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं में हाथी को देवी के आगमन और गमन के लिए शुभ वाहन बताया गया है। इससे सुख-समृद्धि, आर्थिक उन्नति और अच्छी वर्षा की कामना जुड़ी हुई है।

देवी के वाहन का निर्धारण नवरात्र के आरंभ और समापन के दिन के आधार पर किए जाने की परंपरा भी बताई गई है।

नवरात्र में किस दिन किस स्वरूप की पूजा?

तारीखतिथिदेवी का स्वरूप
11 अक्टूबरप्रतिपदामां शैलपुत्री
12 अक्टूबरद्वितीयामां ब्रह्मचारिणी
13 अक्टूबरतृतीयामां चंद्रघंटा
14 अक्टूबरचतुर्थीमां कूष्मांडा
15 अक्टूबरपंचमीमां स्कंदमाता
16 अक्टूबरषष्ठीमां कात्यायनी
17 अक्टूबरसप्तमीमां कालरात्रि
18 अक्टूबरअष्टमीमां महागौरी
19 अक्टूबरअष्टमीमां महागौरी
20 अक्टूबरनवमीमां सिद्धिदात्री
21 अक्टूबरदशमीविजयादशमी

घरों और पूजा पंडालों में होगी विशेष आराधना

कलश स्थापना के साथ ही घरों और पूजा पंडालों में दुर्गा सप्तशती समेत विभिन्न धार्मिक ग्रंथों और स्तोत्रों का पाठ किया जाएगा। श्रद्धालु दुर्गा सप्तशती, रामचरितमानस, सुंदरकांड, रामरक्षा स्तोत्र, दुर्गा सहस्रनाम, अर्गला स्तोत्र, कवच, कीलक और सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्र में मां दुर्गा की आराधना से सुख-समृद्धि, ज्ञान, वैभव और पारिवारिक सौहार्द की कामना की जाती है।

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