मुंबई, 7 अक्टूबर 2026: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी के बाद बुधवार को घरेलू शेयर बाजार में दबाव बढ़ गया। ब्याज दर बढ़ने के फैसले से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई और लगातार दो कारोबारी सत्रों की तेजी पर ब्रेक लग गया।
RBI ने रेपो रेट को बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है। साथ ही मौद्रिक नीति के रुख को ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ में बदला गया है। इसके बाद बाजार में बिकवाली तेज देखने को मिली।
सेंसेक्स 429 अंक गिरकर बंद
कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 429.11 अंक यानी 0.59 प्रतिशत की गिरावट के साथ 72,638.70 पर बंद हुआ।
इसी तरह निफ्टी 50 में 173.05 अंक यानी 0.76 प्रतिशत की कमजोरी रही और यह 22,603.05 के स्तर पर बंद हुआ।
22,600 के स्तर पर निफ्टी की नजर
बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, निफ्टी फिलहाल 22,600 के अहम स्तर के आसपास है। यदि इंडेक्स इस स्तर के नीचे टिकता है तो दबाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है और अगला स्तर 22,400 के आसपास देखा जा सकता है।
वहीं, तेजी लौटने की स्थिति में 22,800 का स्तर बाजार के लिए अगली महत्वपूर्ण बाधा माना जा रहा है।
मेटल सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव
बुधवार के कारोबार में निफ्टी मेटल इंडेक्स सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले प्रमुख सेक्टरों में रहा। मेटल शेयरों में निवेशकों की बिकवाली का असर पूरे सेक्टर पर दिखाई दिया।
दूसरी ओर, पीएसयू बैंक शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुआ, जिससे बाजार की गिरावट कुछ हद तक सीमित रही।
इन शेयरों में रही सबसे ज्यादा गिरावट
निफ्टी के प्रमुख शेयरों में टाइटन कंपनी, BEL और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज में सबसे अधिक कमजोरी दर्ज की गई।
ब्रॉडर मार्केट में भी दबाव रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.63 प्रतिशत गिरा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.30 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई।
अब कॉरपोरेट नतीजों पर निवेशकों की नजर
बाजार की अगली दिशा के लिए अब निवेशकों का ध्यान कंपनियों के सितंबर तिमाही के वित्तीय नतीजों पर रहेगा। ऊंची ब्याज दरों और लागत के दबाव के बीच कंपनियां अपनी आय और मांग को किस तरह बनाए रखती हैं, इसका असर बाजार की धारणा पर पड़ सकता है।
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