Wednesday, September 16, 2026

झारखंड में गंभीर बीमारियों की रोकथाम के लिए बनेगा एकीकृत स्वास्थ्य मॉडल.

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कैंसर, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग की जांच-रोकथाम एक ही व्यवस्था से होगी

रांची, 16 सितंबर। झारखंड में कैंसर, मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग जैसी गैर-संचारी बीमारियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को एकीकृत करने की तैयारी है। राज्य सरकार के प्रस्तावित मॉडल को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से मंजूरी मिल गयी है। इसके साथ ही झारखंड इस तरह की व्यवस्था लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनने की दिशा में है।

बीमारी से पहले पहचान पर जोर

नये मॉडल में केवल मरीजों के इलाज तक सीमित रहने के बजाय बीमारी की शुरुआती पहचान, नियमित जांच और रोकथाम को प्राथमिकता दी जायेगी। इसका उद्देश्य मरीजों को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना और गंभीर स्थिति बनने से पहले बीमारी का पता लगाना है।

नयी दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में हुई उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की अपर सचिव सह मिशन निदेशक आराधना पटनायक ने मॉडल को मंजूरी दी। उन्होंने राज्य में इसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया।

पहले राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन

मॉडल को जमीन पर लागू करने से पहले राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की जायेगी। इसमें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, चिकित्सा विशेषज्ञ, तकनीकी संस्थान और संबंधित विभागों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एनसीडी प्रभाग के डीडीजी डॉ. एल. स्वास्तिचरण ने बैठक में प्रस्तावित मॉडल की रूपरेखा और तकनीकी व्यवस्था की जानकारी दी।

मॉडल के लागू होने और उसके परिणामों का मूल्यांकन करने के बाद इसे देश के अन्य राज्यों में भी अपनाने की दिशा में आगे बढ़ने की योजना है।

पांच राष्ट्रीय कार्यक्रमों को जोड़ा जायेगा

एकीकृत व्यवस्था के तहत पांच प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रमों को साथ लाने का प्रस्ताव है। इनमें शामिल हैं—

  • राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनपी-एनसीडी)
  • राष्ट्रीय मुख स्वास्थ्य कार्यक्रम
  • राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम
  • राष्ट्रीय उपशामक देखभाल कार्यक्रम
  • राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम

इन कार्यक्रमों को एक-दूसरे से जोड़कर जांच, उपचार, रेफरल और मरीजों की निगरानी की व्यवस्था मजबूत की जायेगी।

ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान

सरकारी स्वास्थ्य तंत्र के साथ जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों और सार्वजनिक उपक्रमों को भी अभियान से जोड़ने की तैयारी है। इससे ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य जागरूकता, स्क्रीनिंग और जरूरी सेवाओं की पहुंच बढ़ाने का लक्ष्य है।

मरीजों को अलग-अलग सेवाओं के लिए नहीं भटकना पड़ेगा

नये मॉडल के तहत मरीजों को विभिन्न बीमारियों की जांच और उपचार के लिए अलग-अलग योजनाओं के बीच जाने की जरूरत कम होगी। कैंसर, शुगर, हाई बीपी, हृदय रोग, तंबाकू सेवन और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाओं को एकीकृत व्यवस्था में शामिल किया जायेगा। इसमें कैंसर की शुरुआती पहचान और समय पर रेफरल पर खास जोर रहेगा।

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