Wednesday, September 16, 2026

शेयर बाजार में शुरुआती तेजी, सेंसेक्स 500 अंक चढ़ा; निफ्टी 23,280 के पार.

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एफएमसीजी, बैंकिंग, ऑटो और सीमेंट शेयरों में खरीदारी से बाजार को मिला सहारा

मुंबई, 16 सितंबर। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान तेजी लौटती दिखी। एफएमसीजी, बैंकिंग, ऑटो और सीमेंट कंपनियों के शेयरों में खरीदारी से सेंसेक्स 500 अंकों से अधिक मजबूत हुआ, जबकि निफ्टी 23,280 के स्तर को पार कर गया।

शुरुआती कारोबार में एनएसई का निफ्टी करीब 162 अंक यानी 0.70 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,281 के इंट्राडे उच्च स्तर तक पहुंचा। वहीं, बीएसई सेंसेक्स 500 से अधिक अंक चढ़कर 74,505 के आसपास कारोबार करता नजर आया। दोनों प्रमुख सूचकांकों में करीब 0.7 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गयी।

इन सेक्टरों में रही खरीदारी

बाजार की तेजी में कंज्यूमर और बैंकिंग शेयरों की अहम भूमिका रही। शुरुआती कारोबार में निफ्टी एफएमसीजी, पीएसयू बैंक, सीमेंट और ऑटो इंडेक्स में सबसे ज्यादा बढ़त दिखी। इन सूचकांकों में करीब 1.45 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गयी।

इसके अलावा निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स में लगभग 0.54 प्रतिशत और निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में 0.33 प्रतिशत का सुधार हुआ।

हालांकि, सभी सेक्टरों में तेजी नहीं रही। निफ्टी मिडस्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम इंडेक्स में करीब 0.68 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी। फार्मा, केमिकल्स और हेल्थकेयर से जुड़े शेयर भी 0.18 से 0.51 प्रतिशत तक कमजोर रहे।

घरेलू और वैश्विक घटनाक्रमों पर नजर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक परिस्थितियों के कारण बाजार का तकनीकी रुझान अभी पूरी तरह मजबूत नहीं हुआ है। इसके बावजूद कुछ घरेलू घटनाक्रमों से निवेशकों की धारणा में सुधार आया है।

एचडीएफसी बैंक में नये एमडी और सीईओ की नियुक्ति तथा डिजिटल भुगतान से जुड़े एनपीसीआई के नये नियमों को बाजार के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

वैश्विक स्तर पर निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर संबंधी बैठक और उसके बाद आने वाले आर्थिक संकेतों पर है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के चलते विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली बाजार पर दबाव बनाए रख सकती है।

निफ्टी के लिए 23,000–23,260 अहम स्तर

तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक निफ्टी के लिए 23,000 से 23,260 का दायरा फिलहाल महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन माना जा रहा है। बाजार की आगे की दिशा घरेलू खरीदारी, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और वैश्विक आर्थिक संकेतों से तय हो सकती है।

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