Tuesday, November 3, 2026

25 साल में बदल गई रांची एयरपोर्ट की तस्वीर, अब अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और 3700 मीटर रनवे की तैयारी

Share

Ranchi News | 3 नवंबर 2026: झारखंड गठन के बाद पिछले 25 वर्षों में राजधानी रांची का बिरसा मुंडा एयरपोर्ट सीमित सुविधाओं वाले हवाई अड्डे से आधुनिक विमानन केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। कभी यहां से गिनी-चुनी विमान सेवाएं उपलब्ध थीं, लेकिन आज रांची देश के कई प्रमुख महानगरों से हवाई मार्ग के जरिए जुड़ा है। प्रतिदिन हजारों यात्री यहां से सफर करते हैं। अब एयरपोर्ट के विस्तार, बड़े रनवे, आधुनिक यात्री सुविधाओं और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।

वर्ष 2000 से 2026 तक कितना बदला रांची एयरपोर्ट?

झारखंड गठन के समय वर्ष 2000 में रांची एयरपोर्ट पर यात्रियों के लिए सीमित सुविधाएं थीं। छोटा टर्मिनल भवन, कम विमान सेवाएं और बुनियादी यात्री सुविधाएं ही उपलब्ध थीं। उस दौर में यात्रियों के पास हवाई यात्रा के विकल्प भी कम थे।

वर्ष 2026 तक तस्वीर काफी बदल चुकी है। रांची से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों के लिए विमान सेवाएं उपलब्ध हैं। एयरपोर्ट पर सामान्य दिनों में लगभग 40 से 50 विमानों के आगमन और प्रस्थान की जानकारी दी गई है।

अक्टूबर 2026 के एक दिन के परिचालन आंकड़ों के अनुसार, कुल 94 विमान मूवमेंट दर्ज किए गए। इनमें 46 आगमन और 48 प्रस्थान शामिल थे। इस दिन कुल 7,102 यात्रियों ने एयरपोर्ट से आवागमन किया। वहीं, वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 27 लाख यात्रियों ने रांची एयरपोर्ट का इस्तेमाल किया।

आधुनिक टर्मिनल और एटीसी टावर ने बदली व्यवस्था

एयरपोर्ट के विकास में आधुनिक एकीकृत टर्मिनल भवन का निर्माण महत्वपूर्ण रहा। वर्ष 2013 में नया टर्मिनल शुरू होने के बाद यात्रियों को पहले की तुलना में बेहतर सुविधाएं मिलने लगीं।

इसके बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) टावर और तकनीकी व्यवस्थाओं का भी विकास हुआ। एयरपोर्ट पर आधुनिक सुरक्षा जांच, बैगेज हैंडलिंग, एयरोब्रिज, प्रतीक्षालय, खानपान और पार्किंग जैसी सुविधाओं का विस्तार किया गया।

विमानों के सुरक्षित परिचालन के लिए नेविगेशन उपकरण और इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम जैसी तकनीकी सुविधाओं को भी बेहतर बनाया गया है।

3700 मीटर रनवे विस्तार की योजना

रांची एयरपोर्ट के विकास का अगला चरण रनवे विस्तार से जुड़ा है। भविष्य की योजना में रनवे की लंबाई लगभग 3,700 मीटर तक बढ़ाने का प्रस्ताव शामिल है। इसके लिए अतिरिक्त जमीन की जरूरत होगी।

रनवे के विस्तार से बड़े विमानों के परिचालन की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। इसके साथ ही एयरपोर्ट पर लगभग 2,000 यात्रियों की क्षमता वाला प्रस्थान क्षेत्र विकसित करने और यात्री सुविधाओं को आधुनिक बनाने की परिकल्पना है।

एयरपोर्ट पर आइसोलेशन बे बनाने की दिशा में भी काम आगे बढ़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अक्टूबर 2026 में इसके नक्शे को मंजूरी मिली थी। यह सुविधा विमानन सुरक्षा और आपात परिस्थितियों के प्रबंधन में उपयोगी होगी।

अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए तैयारियां

रांची एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से जोड़ने की संभावनाओं पर भी चर्चा और तैयारी की जा रही है। एयरपोर्ट प्रबंधन से जुड़ी जानकारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय परिचालन के लिए कस्टम और इमिग्रेशन व्यवस्थाओं का परीक्षण किया जा चुका है।

हालांकि, नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने के लिए विमानन कंपनियों की भागीदारी, जरूरी सरकारी स्वीकृतियां और अन्य परिचालन व्यवस्थाएं पूरी होना आवश्यक है।

भविष्य में दुबई, बैंकॉक और अन्य विदेशी शहरों के लिए सीधी उड़ानें शुरू होने की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं। फिलहाल इन मार्गों पर सेवा शुरू होने की कोई निश्चित समयसीमा सामने नहीं आई है।

हैंगर से अपने भवन तक पहुंचा नागर विमानन विभाग

झारखंड गठन के समय राज्य का नागर विमानन विभाग सीमित संसाधनों के साथ एक हैंगर से संचालित होता था। अब विभाग के पास अपना कार्यालय भवन है। इसके अलावा विमानन प्रशिक्षण के लिए फ्लाइंग इंस्टीट्यूट की व्यवस्था भी विकसित की गई है।

इससे राज्य के युवाओं को विमानन क्षेत्र में प्रशिक्षण हासिल करने और भविष्य में रोजगार के अवसर तलाशने का रास्ता मिल सकता है।

नए शहरों से सीधी उड़ान शुरू होने की उम्मीद

वर्तमान में रांची एयरपोर्ट से देश के कई प्रमुख शहरों के लिए हवाई संपर्क उपलब्ध है। आने वाले समय में अहमदाबाद, जयपुर, चेन्नई समेत अन्य शहरों के लिए सीधी उड़ान शुरू करने की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं।

हालांकि, नए रूट शुरू करने का फैसला विमानन कंपनियों की मांग, यात्रियों की संख्या और व्यावसायिक संभावनाओं के आधार पर होगा।

झारखंड में विमान सेवाओं का दायरा भी बढ़ा

झारखंड गठन के समय वर्ष 2000 में रांची से नियमित यात्री विमान सेवा उपलब्ध थी। इसके बाद राज्य में देवघर एयरपोर्ट से भी व्यावसायिक उड़ानें शुरू हुईं। जमशेदपुर से भी विमान सेवा शुरू हुई थी, लेकिन संबंधित सेवा बंद होने के कारण फिलहाल रांची और देवघर से नियमित उड़ानें उपलब्ध हैं।

राज्य में बोकारो और दुमका से विमान सेवा शुरू करने की संभावनाएं भी हैं। इसके अलावा हजारीबाग, डालटनगंज, धालभूमगढ़ और चाईबासा में हवाई सुविधाओं के विकास को लेकर योजनाओं की चर्चा होती रही है।

रांची एयरपोर्ट: 25 साल पहले और अब

विशेषतावर्ष 2000वर्ष 2026
विमान सेवाएंसीमित नियमित सेवाएंकई प्रमुख घरेलू शहरों से संपर्क
टर्मिनलछोटा टर्मिनल भवनआधुनिक एकीकृत टर्मिनल
यात्री सुविधाएंबुनियादी व्यवस्थाएयरोब्रिज, आधुनिक सुरक्षा जांच और प्रतीक्षालय
ATC व्यवस्थापुरानी व्यवस्थाविकसित एटीसी टावर और तकनीकी सुविधाएं
यात्री संख्यासीमित आवाजाहीवित्तीय वर्ष 2025-26 में करीब 27 लाख यात्री
अंतरराष्ट्रीय संपर्कउपलब्ध नहींअंतरराष्ट्रीय उड़ानों की तैयारी
भविष्य की योजनासीमित विस्तार3,700 मीटर रनवे और यात्री सुविधाओं का विस्तार प्रस्तावित

अगली चुनौती अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने की

पिछले 25 वर्षों में रांची एयरपोर्ट ने आधारभूत सुविधाओं और यात्री आवागमन के मामले में लंबा सफर तय किया है। अब इसके सामने बड़े विमानों के परिचालन, रनवे विस्तार, यात्री क्षमता बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क विकसित करने की चुनौती है।

यदि प्रस्तावित योजनाएं पूरी होती हैं और नए घरेलू व अंतरराष्ट्रीय रूट शुरू होते हैं, तो रांची एयरपोर्ट झारखंड के साथ-साथ पूर्वी भारत के लिए भी महत्वपूर्ण विमानन केंद्र बन सकता है।

Bharat Superfast News | Ranchi Desk

Table of contents [hide]

Read more

Local News