नई दिल्ली: शेयर बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ‘पंप-एंड-डंप’ स्कीम चलाकर निर्दोष निवेशकों को ठगने वाले एक ही परिवार के सात लोगों पर बड़ी कार्रवाई की है. सेबी ने इन सभी आरोपियों को बाजार में किसी भी तरह की ट्रेडिंग करने से तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया है. इसके साथ ही नियामक ने इस हेरफेर से कमाए गए ₹20.25 करोड़ से अधिक के अवैध मुनाफे को जब्त करने का भी आदेश जारी किया है.
सस्ते शेयरों को खरीदकर सोशल मीडिया पर फैलाते थे अफवाह
सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश सी. वार्शणे द्वारा जारी 234 पन्नों के अंतरिम आदेश के अनुसार, यह पूरा खेल एक सोची-समझी साजिश के तहत खेला जा रहा था. इस धोखाधड़ी में हेमंत गुप्ता और उनके दो बेटे—रोहन गुप्ता और अनिकेत गुप्ता—मुख्य ‘ऑपरेटर’ की भूमिका निभा रहे थे. ये तीनों सेबी के पास रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट (RA) नहीं थे, फिर भी सोशल मीडिया पर खुद को एक्सपर्ट बताकर टिप्स देते थे.
इनका काम करने का तरीका बेहद शातिर था. ये सबसे पहले स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (SME) प्लेटफॉर्म और कम लिक्विडिटी वाले छोटे 82 शेयरों को खुद के अकाउंट्स में चुपके से खरीद लेते थे. इसके बाद रोहन और अनिकेत अपने सोशल मीडिया एक्स (X) हैंडल्स ‘@WealthSolitaire’ और ‘@desiwallstreet’ पर उन शेयरों को लेकर बेहद सकारात्मक और भ्रामक पोस्ट डालते थे. वहीं, पिता हेमंत गुप्ता इन टिप्स को व्हाट्सएप (WhatsApp) और टेलीग्राम (Telegram) ग्रुप्स पर तेजी से फॉरवर्ड करते थे, जहां वे जानबूझकर टारगेट प्राइस भी लिखते थे ताकि रेगुलेटर की नजरों से बचा जा सके.
जैसे ही आम रिटेल निवेशक इन पोस्ट्स को देखकर भारी मात्रा में शेयर खरीदने लगते, शेयरों के दाम आसमान छूने लगते थे. कीमत बढ़ते ही यह परिवार अपने सारे शेयर बेचकर (Dump) भारी मुनाफा कमा लेता था, और आम निवेशक घाटे में रह जाते थे.
पूरे परिवार ने मिलकर चलाया रैकेट
इस अवैध धंधे में परिवार के अन्य चार सदस्य—शारोन, लीना, रजनी और पूर्वांगी गुप्ता—सहयोगी की भूमिका में थे. इन लोगों ने ऑपरेटर्स के इशारे पर या तो अपने ट्रेडिंग अकाउंट्स इस्तेमाल करने दिए या फिर सीधे निर्देशानुसार ट्रेड एग्जीक्यूट किए.
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, इस परिवार का ग्रॉस ट्रेडेड वैल्यू परीक्षा अवधि (दिसंबर 2023 से जनवरी 2026) के दौरान 86% बढ़कर ₹1,023 करोड़ तक पहुंच गया. इस दौरान इनका कुल स्क्वायर-ऑफ प्रॉफिट 242% उछलकर ₹58.40 करोड़ हो गया. इनमें से रोहन और शारोन गुप्ता सबसे बड़े लाभार्थी रहे, जिन्होंने करीब ₹50.03 करोड़ का मुनाफा कमाया. सेबी ने इसमें से सीधे तौर पर ₹20.25 करोड़ को अवैध कमाई माना है.
नियामक की सख्त हिदायत
सेबी ने मुख्य ऑपरेटर्स हेमंत, रोहन और अनिकेत गुप्ता को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे बिना रजिस्ट्रेशन के रिसर्च एनालिस्ट जैसी सेवाएं देना तुरंत बंद करें. साथ ही बैंकों और डिपॉजिटरीज को आरोपियों के खातों से डेबिट रोकने का आदेश दिया गया है.


