देश में 25 मई 2026 से नौतपा की शुरुआत हो गई है, जो 2 जून तक चलेगा. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दौरान भीषण गर्मी, तेज हवा और बारिश की संभावना रहेगी. रिपोर्ट में नौतपा का धार्मिक महत्व, सूर्य पूजा, दान-पुण्य और मानसून से जुड़े पारंपरिक संकेतों की विस्तार से जानकारी दी गई है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
झारखंड समेत पूरे उत्तर भारत में रविवार 25 मई से नौतपा की शुरुआत हो गई है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार रात आठ बजकर सात मिनट से रोहिणी नक्षत्र का प्रवेश हो रहा है और इसी के साथ नौ दिनों तक चलने वाले नौतपा का आरंभ माना जा रहा है. इसका समापन 2 जून को होगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान सूर्य की तपिश सबसे अधिक रहती है और धरती भीषण गर्मी से तपती है.
क्या कहते हैं ज्योतिषाचार्य
ज्योतिषाचार्य कौशल कुमार मिश्रा ने बताया कि नौतपा में भगवान सूर्यदेव की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होता है. इन दिनों सूर्य को अर्घ देने, सूर्य चालीसा और आदित्यहृदय स्तोत्र का पाठ करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है. साथ ही दान-पुण्य, पशु-पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था और जरूरतमंदों को राहत सामग्री देने का भी बड़ा महत्व माना गया है.
क्या होता है नौतपा
हिंदू पंचांग के अनुसार जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब नौतपा की शुरुआत होती है. सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में आने के बाद के शुरुआती नौ दिनों को ही नौतपा कहा जाता है. मान्यता है कि इन दिनों सूर्य की किरणें पृथ्वी पर सीधे प्रभाव डालती हैं, जिसके कारण अत्यधिक गर्मी पड़ती है. ज्योतिष शास्त्र में रोहिणी नक्षत्र के स्वामी चंद्र देव माने जाते हैं, जो शीतलता के प्रतीक हैं. लेकिन नौतपा के दौरान वे सूर्य के प्रभाव में आ जाते हैं. इस कारण मौसम का तापमान तेजी से बढ़ जाता है और गर्म हवाएं चलने लगती हैं. इसे ग्रीष्म ऋतु का सबसे तपता हुआ समय माना जाता है.
नौतपा और बारिश का संबंध
ग्रामीण और पारंपरिक मान्यताओं में नौतपा का संबंध मानसून और वर्षा से भी जोड़ा जाता है. माना जाता है कि नौतपा जितना अधिक तपता है, उतनी ही अच्छी बारिश होने की संभावना रहती है. पंडित कौशल कुमार मिश्रा के अनुसार यदि इन नौ दिनों में तेज गर्मी पड़ती है तो बाद में मानसून बेहतर होता है और खेती के लिए अनुकूल वर्षा होती है. उन्होंने बताया कि आर्द्रा नक्षत्र से लेकर नौ नक्षत्रों तक यह प्रभाव विशेष रूप से देखा जाता है. मौसम विज्ञान के स्तर पर भले ही इसे वैज्ञानिक आधार पर न मापा जाए, लेकिन भारतीय परंपरा में नौतपा को कृषि और मौसम चक्र से जोड़कर देखा जाता रहा है.
तेज हवा और बवंडर के संकेत
इस बार नौतपा के दौरान केवल गर्मी ही नहीं बल्कि तेज हवा, बवंडर और बारिश की भी संभावना जताई जा रही है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार ग्रहों की स्थिति मौसम में अचानक बदलाव का संकेत दे रही है. ऐसे में कई इलाकों में आंधी और हल्की बारिश भी देखने को मिल सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि नौतपा के दौरान दिन में तेज धूप और शाम के समय मौसम बदलने की स्थिति बन सकती है. इसलिए लोगों को गर्मी से बचाव के साथ-साथ बदलते मौसम के प्रति भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है.
नौतपा में दान-पुण्य का विशेष महत्व
हिंदू धर्म में नौतपा के दौरान दान-पुण्य को अत्यंत फलदायी माना गया है. मान्यता है कि इन दिनों किए गए दान का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है और भगवान सूर्य की कृपा प्राप्त होती है.
अन्न दान को माना गया शुभ
नौतपा में गेहूं और चावल का दान करना विशेष शुभ माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न देने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और अन्न की कमी नहीं होती.
जल दान का सबसे बड़ा महत्व
भीषण गर्मी के बीच जल दान को सबसे बड़ा पुण्य बताया गया है. मंदिरों, सड़क किनारे और सार्वजनिक स्थानों पर पानी की व्यवस्था करना पुण्यदायी माना जाता है. पक्षियों और जानवरों के लिए पानी रखना भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया गया है.
शरबत, पंखा और सूती वस्त्र का दान
नौतपा के दौरान शरबत, पंखा, छाता, चप्पल, तौलिया और सूती कपड़ों का दान करना भी शुभ माना गया है. ऐसी मान्यता है कि गर्मी से राहत पहुंचाने वाली वस्तुओं का दान करने से सूर्य मजबूत होते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है.
नौतपा के दौरान पड़ रहे विशेष योग
इस बार नौतपा के बीच कई महत्वपूर्ण धार्मिक तिथियां और शुभ योग भी बन रहे हैं. 26 मई को गंगा दशहरा, 27 मई को गृहस्थ और वैष्णव दोनों की एकादशी पड़ेगी. इस दिन स्वार्थ सिद्ध, रवि और सिद्ध योग का संयोग बन रहा है. 28 मई को प्रदोष व्रत, 29 मई को रवि योग, 30 मई को व्रत पूर्णिमा और 31 मई को स्नान-दान पूर्णिमा मनाई जाएगी. धार्मिक दृष्टि से यह पूरा समय पूजा-पाठ, तप, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है.


