नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने संबंधी संशोधन विधेयक को सोमवार को लोकसभा ने मंजूरी दे दी। प्रस्तावित कानून के तहत भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सहित सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की कुल स्वीकृत संख्या 38 कर दी जाएगी। वर्तमान में यह संख्या 33 है।
सदन में विपक्ष के हंगामे के बीच यह विधेयक ध्वनिमत से पारित किया गया। विपक्ष की ओर से विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी जारी रही, जिसके कारण विधेयक पर विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी।
कानून मंत्री ने पेश किया विधेयक
लोकसभा की कार्यवाही दोपहर में दोबारा शुरू होने के बाद केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को सदन में विचार और पारित करने के लिए प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की क्षमता बढ़ाने और लंबित मामलों के तेजी से निपटारे के उद्देश्य से न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि आवश्यक है।
विपक्ष के संशोधन और प्रस्ताव खारिज
विधेयक पर विचार के दौरान विपक्ष के कुछ सदस्यों द्वारा पेश किए गए संशोधन स्वीकार नहीं किए गए। साथ ही, राष्ट्रपति द्वारा पहले जारी अध्यादेश को निरस्त करने संबंधी प्रस्ताव भी सदन ने अस्वीकार कर दिया।
पहले अध्यादेश के जरिए बढ़ाई गई थी संख्या
केंद्र सरकार ने इस वर्ष मई में सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद अध्यादेश जारी किया गया, जिसके आधार पर सर्वोच्च न्यायालय में अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्तियां भी की गईं। अब उसी व्यवस्था को कानूनी रूप देने के लिए यह विधेयक लोकसभा से पारित किया गया है।
2019 के बाद फिर बढ़ी न्यायाधीशों की संख्या
इससे पहले वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या में वृद्धि की गई थी। उस समय मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर न्यायाधीशों के पद 30 से बढ़ाकर 33 किए गए थे। अब नए संशोधन के बाद कुल स्वीकृत संख्या 38 हो जाएगी।
लंबित मामलों के निपटारे पर रहेगा फोकस
सरकार का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय में लगातार बढ़ रहे मामलों के बोझ को देखते हुए न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाना जरूरी हो गया था। अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति से मामलों के शीघ्र निस्तारण में मदद मिलने और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की उम्मीद जताई जा रही है।
