Saturday, July 4, 2026

सामान्य ब्लड प्रेशर का स्तर 120/80 mmHg माना जाता है, लेकिन, जब यह स्तर इससे अधिक हो जाता है, तो हाई ब्लड प्रेशर की स्थिति…

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हाई ब्लड प्रेशर को अक्सर ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है क्योंकि शुरुआती स्टेज में इसके कोई साफ लक्षण नहीं दिखते. लोग अक्सर सुबह हल्का सिरदर्द, थकान या चक्कर आने जैसे लक्षणों को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. हालांकि, अगर लंबे समय तक इस पर ध्यान न दिया जाए, तो हालत बहुत बिगड़ सकती है, जिससे हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. एक्सपर्ट्स खराब डाइट (खासकर ज्यादा नमक खाना), स्ट्रेस और फिजिकल एक्टिविटी की कमी को इसके मुख्य कारण मानते हैं.

इस बीच, डॉक्टरों का कहना है कि अगर हाई ब्लड प्रेशर को नजरअंदाज किया जाए, तो मरीज को ‘हाइपरटेंसिव क्राइसिस’ का सामना करना पड़ सकता है. विशेषज्ञों ने इस बारे में विस्तार से जानकारी दी है कि हाइपरटेंसिव क्राइसिस क्या है, कब सावधान रहना चाहिए और किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. आइए, अब पूरी जानकारी जानते हैं.

At what level does high blood pressure become dangerous? Find out what a hypertensive crisis is.

हाइपरटेंसिव क्राइसिस क्या है?
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, हाइपरटेंसिव क्राइसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें ब्लड प्रेशर तेजी से और बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, जिससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक, आंखों को नुकसान और किडनी खराब होने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. इस स्थिति को हाइपरटेंसिव इमरजेंसी भी कहा जाता है. डॉक्टर का कहना है कि हाइपरटेंसिव क्राइसिस ब्लड प्रेशर (BP) की एक खतरनाक स्थिति है, जिसमें सिस्टोलिक प्रेशर 180 mmHg या उससे ज्यादा और डायस्टोलिक प्रेशर 120 mmHg या उससे ज्यादा हो जाता है. इससे शरीर के अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचने का खतरा होता है.

हाइपरटेंसिव क्राइसिस को दो मुख्य प्रकारों में बांटा गया है

  1. हाइपरटेंसिव अर्जेंसी:जब ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ जाता है लेकिन शरीर के किसी जरूरी अंग को कोई नुकसान नहीं पहुंचता, तो इसे ‘हाइपरटेंसिव अर्जेंसी’ कहा जाता है.
  2. हाइपरटेंसिव इमरजेंसी:जब हाई ब्लड प्रेशर की वजह से शरीर के जरूरी अंगों (जैसे दिल और दिमाग) को नुकसान पहुंचता है या नुकसान पहुंचने का खतरा होता है, तो इसे ‘हाइपरटेंसिव इमरजेंसी’ कहा जाता है. यह जानलेवा हो सकती है.

हाइपरटेंसिव क्राइसिस के कारण
इस समस्या के कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि…

  • ब्लड प्रेशर की दवाएं समय पर न लेना या उन्हें पूरी तरह से बंद कर देना
  • अनकंट्रोल्ड हाई ब्लड प्रेशर
  • किडनी की बीमारियां
  • कुछ दूसरी दवाओं का असर
  • बहुत ज्यादा मानसिक तनाव
  • दिल की बीमारी

इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए
हाई ब्लड प्रेशर की इमरजेंसी के दौरान, मरीजों को ये लक्षण महसूस हो सकते हैं…

  • तेज सिरदर्द
  • सीने में दर्द
  • सांस लेने में तकलीफ
  • धुंधला दिखना (आंखों की समस्या)
  • मानसिक उलझन
  • चक्कर आना, सुस्ती
  • बातचीत करने में असमर्थता
  • कभी-कभी, जब ब्लड प्रेशर खतरनाक रूप से बढ़ जाता है, तब भी मरीज को कोई लक्षण महसूस नहीं हो सकते हैं (इसे साइलेंट किलर कहा जाता है).

अस्पताल कब जाना चाहिए?
अगर आपका ब्लड प्रेशर 180/120 mmHg या उससे ज्यादा है और साथ में सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ या न्यूरोलॉजिकल कमजोरी (जैसे लकवा) जैसे लक्षण भी हैं, तो आपको बिना देर किए तुरंत अस्पताल जाना चाहिए.

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अगर आपका ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा है लेकिन कोई लक्षण नहीं दिख रहे हैं, तो तनाव कम करने के लिए थोड़ी देर शांत बैठें और कुछ समय बाद अपना ब्लड प्रेशर दोबारा जांचें. लगातार ज्यादा रहने वाले ब्लड प्रेशर को नजरअंदाज न करें, भले ही आपको कोई लक्षण महसूस न हो रहा हो.

ध्यान देने योग्य महत्वपूर्ण बातें

  • नमक का सेवन कम करें: आपको अपने खाने में नमक (सोडियम) की मात्रा काफी कम कर देनी चाहिए। दुकान से खरीदे गए अचार और पैक्ड फूड से बचें
  • रेगुलर जांच: हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों को सलाह दी जाती है कि वे घर पर डिजिटल ब्लड प्रेशर मॉनिटर का इस्तेमाल करके कम से कम हफ्ते में एक बार अपनी रीडिंग नोट करें.
  • DASH डाइट: इस डाइट में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और कम फैट वाले डेयरी प्रोडक्ट शामिल होने चाहिए. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, हरी सब्जियों के कई हेल्थ बेनिफिट्स हैं. इनमें पोटेशियम भरपूर मात्रा में होता है, जो ब्लड प्रेशर कम करने में मददगार है.
  • फर्स्ट एड के बारे में गलतफहमियां: जब ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा हो, तो खुद से दवा न लें. ब्लड प्रेशर की कुछ दवाएं, जिन्हें जीभ के नीचे रखा जाता है, अगर डॉक्टर की सलाह के बिना ली जाएं तो ब्लड प्रेशर अचानक कम हो सकता है और स्ट्रोक का खतरा हो सकता है.

ध्यान रखें कि अगर ब्लड प्रेशर 180/120 से ज्यादा हो जाए और खतरनाक लक्षण दिखें, तो खुद गाड़ी चलाने के बजाय ऑक्सीजन की सुविधा वाली एम्बुलेंस से अस्पताल जाना ज्यादा सुरक्षित है.

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