Saturday, July 4, 2026

 पूर्वी सिंहभूम जिले में मलेरिया के बढ़ते मामलों और इसके कारण हुई चार बच्चों की मौत ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। 

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पूर्वी सिंहभूम में मलेरिया के 840 मामले और 4 बच्चों की मौत के बाद जिला प्रशासन ने व्यापक अभियान चलाया है। 125 डॉक्टर और 200 से अधिक स्वास्थ्यकर्मी प्रभावित इलाकों में जांच कर रहे हैं

जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिले में मलेरिया के बढ़ते मामलों और इसके कारण हुई चार बच्चों की मौत ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। 

जिले में अब तक 840 लोग मलेरिया से संक्रमित पाए जा चुके हैं। इसको लेकर उपायुक्त (DC) राजीव रंजन के निर्देश पर प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर युद्धस्तर पर उपचार अभियान चलाया गया है।

इस अभियान में एमजीएम (MGM) मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के 125 डॉक्टरों के साथ-साथ 200 से अधिक स्वास्थ्यकर्मी प्रभावित गांवों में कैंप कर जांच और जागरूकता फैलाने में जुटे हैं।

आंकड़ों की नजर से: अभियान की अब तक की प्रगति 

प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पोटका, मुसाबनी, डुमरिया और घाटशिला जैसे अत्यधिक प्रभावित प्रखंडों के 54 गांवों को केंद्र में रखकर विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

       मुख्य बिंदु                                आंकड़े

  • कुल संक्रमित मरीज                     840
  • अब तक हुई मौतें                        04
  • सर्वे किए गए कुल घर                   17,741
  • कुल लोगों की हुई जांच                  12,872
  • सदर अस्पताल में भर्ती कुल मरीज      73
  • स्वस्थ होकर घर लौटे मरीज             31

स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि बड़े पैमाने पर हो रही जांच और समय पर मिल रहे इलाज के कारण अब नए मरीजों के मिलने की दर (Infection Rate) में लगातार कमी दर्ज की जा रही है।

जिले में फैल रही अफवाहों और डर के बीच सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि आम बोलचाल में जिसे ब्रेन मलेरिया कहा जा रहा है, वह असल में सेरेब्रल मलेरिया (Cerebral Malaria) है। यह गंभीर मलेरिया की एक जटिल अवस्था होती है।

उन्‍होंने कहा क‍ि राहत की बात यह है कि जिले में अब तक सेरेब्रल मलेरिया का एक भी पुष्ट मरीज नहीं मिला है। लोग अफवाहों से बचें। अगर किसी को भी लगातार बुखार, कंपकंपी, तेज सिरदर्द, उल्टी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखें, तो वे तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर मुफ्त जांच कराएं। 

मलेरिया के प्रकोप को देखते हुए भारत सरकार के क्षेत्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण कार्यालय, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), पिरामल फाउंडेशन और राज्य स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम शनिवार को पोटका प्रखंड के सबसे ज्यादा प्रभावित गांवों सानग्राम और कांदर पहुंची।

टीम ने स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में समीक्षा बैठक की और जान गंवाने वाले बच्चों के परिजनों से मिलकर ढांढस बंधाया। राज्य मलेरिया पदाधिकारी डॉ. बीके सिंह ने निर्देश दिया कि संक्रमण को पूरी तरह रोकने की कोशिश जारी है।  

इसके लिए अब प्रभावित इलाकों में साल में दो बार आईआरएस (कीटनाशक छिड़काव) कराया जाएगा। साथ ही, आपातकालीन स्थिति के लिए इन गांवों में एक सप्ताह तक 24 घंटे एम्बुलेंस तैनात रखने का आदेश दिया गया है।

स्‍थानीय सांसद विद्युत वरण महतो ने शनिवार को पोटका के कांदर और सानग्राम गांवों का दौरा किया। उन्होंने मृतक बच्चों के परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। 

सांसद ने पीड़ित परिवारों को इस दुख की घड़ी में ढांढस बंधाया और अपनी ओर से तत्काल आर्थिक सहायता भी प्रदान की। इस दौरान उनके साथ कई स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीण उपस्थित थे। 

प्रशासन का सख्त रुख: लापरवाही पर कड़ा एक्शन

उपायुक्त राजीव रंजन ने कहा कि मलेरिया पर नियंत्रण पाना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। प्रभावित क्षेत्रों में नालियों की सफाई, फाॅगिंग, ब्लीचिंग पाउडर और कीटनाशकों का छिड़काव तथा मुफ्त मच्छरदानी और दवाओं का वितरण तेज कर दिया गया है।

दूसरी तरफ, सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने सभी प्रखंडों के चिकित्सा प्रभारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्‍होंने कहा कि इस अभियान में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी प्रभारियों को प्रतिदिन की प्रगति रिपोर्ट जिला मुख्यालय को सौंपने का निर्देश दिया गया है।

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