Saturday, June 13, 2026

सरकार MSME को बचाने के लिए आपातकालीन लोन योजनाएं चलाएगी और बजट संतुलन के लिए विकास कार्यों के बजाय गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करेगी.

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नई दिल्ली: दुनियाभर में चल रहे तनाव और आर्थिक उतार-चढ़ाव के बीच, भारत सरकार ने छोटे और मझोले उद्योगों को सुरक्षित रखने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. यस बैंक की नई आर्थिक रिपोर्ट ‘इकोलॉग’ के मुताबिक, सरकार छोटे कारोबारियों को संकट से बचाने के लिए कई आपातकालीन लोन योजनाएं (ECLGS) चला रही है. अपने बजट को संतुलित रखने के लिए सरकार देश के विकास कार्यों के बजट में कोई कटौती नहीं करेगी, बल्कि रोजमर्रा के प्रशासनिक और गैर-जरूरी खर्चों को कम करेगी.

  • छोटे उद्योगों पर मंडरा रहा है वैश्विक संकट
  • रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के कई देशों में जारी तनाव (जैसे अमेरिका और ईरान का विवाद) के कारण भारत के निर्यात की रफ्तार धीमी हो सकती है. सबसे ज्यादा असर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और छोटे उद्योगों (MSMEs) पर पड़ने की आशंका है. इसका कारण यह है कि कई उद्योग बाहर से आने वाले कच्चे माल और कच्चे तेल पर निर्भर हैं. वैश्विक संकट की वजह से माल की सप्लाय रुक रही है और कंपनियों की लागत बढ़ रही है.
  • देश की आर्थिक विकास दर का हाल
  • आने वाले साल का अनुमान (FY27): रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि अगले वित्तीय वर्ष में भारत की जीडीपी (GDP) विकास दर 6.6 प्रतिशत रह सकती है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी यही अनुमान जताया है. हालांकि, अगर खाड़ी देशों का संकट लंबा खिंचता है, तो यह विकास दर थोड़ी कम भी हो सकती है.
  • पिछले साल का प्रदर्शन (FY26): बीत चुके वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था और देश की जीडीपी 7.7 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ी थी.

बाजार में मांग और निवेश की स्थिति
रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, देश के सेवा क्षेत्र जैसे बैंकिंग, आईटी और टूरिज्म में 9.9 प्रतिशत की शानदार बढ़त देखी गई है. वहीं, महंगाई थोड़ी कम होने की वजह से आम लोगों की खरीदारी (निजी खपत) में मामूली नरमी आई है, लेकिन यह सालाना आधार पर 7.7 प्रतिशत के मजबूत स्तर पर बनी हुई है. इसका मतलब है कि देश के बाजारों में मांग अभी भी अच्छी है. इसके अलावा, देश में व्यापार और नए प्रोजेक्ट्स में निवेश की रफ्तार भी 10.8 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के इस फैसले से देश के करोड़ों छोटे व्यापारियों और उनमें काम करने वाले कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी.

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