Saturday, October 10, 2026

शिवहर में 6 महीने से पेंशन के लिए भटक रहे दिव्यांग बुजुर्ग, आधार की गलती से अटका मामला.

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शिवहर, 10 अक्टूबर 2026: बिहार के शिवहर जिले में एक बुजुर्ग दिव्यांग व्यक्ति और उनका परिवार पिछले छह महीने से सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहा है। नगर परिषद क्षेत्र के सुंदरपुर खरौना, वार्ड संख्या 26 निवासी जियालाल पासवान दिव्यांगता प्रमाण पत्र में सुधार और पेंशन का लाभ पाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। परिवार का आरोप है कि आधार कार्ड में दर्ज गलत जानकारी और कार्यालयों के बीच तालमेल की कमी के कारण उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है।

दिव्यांगता प्रमाण पत्र में 20 प्रतिशत दर्ज

जियालाल पासवान के अनुसार, वे पैर से दिव्यांग हैं और उन्हें चलने-फिरने में परेशानी होती है। पेंशन के लिए आवेदन करने के दौरान उन्हें दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने को कहा गया। लेकिन प्रमाण पत्र में उनकी दिव्यांगता केवल 20 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि संबंधित पेंशन योजना के लिए सामान्यतः कम से कम 40 प्रतिशत दिव्यांगता का मानदंड बताया गया है।

जियालाल का कहना है कि प्रमाण पत्र में दर्ज जानकारी के कारण वे पेंशन का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। चलने-फिरने में परेशानी के बावजूद उन्हें कभी अस्पताल तो कभी प्रखंड कार्यालय जाना पड़ रहा है।

परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब

जियालाल के परिवार में कुल छह सदस्य हैं। उनकी पत्नी जनारसी देवी के हाथ में भी चोट है। परिवार के मुताबिक, उनका बेटा भिगू पासवान करीब तीन वर्षों से जेल में बंद है। परिजनों का कहना है कि बेटे के जेल में रहने और घर के मुखिया की दिव्यांगता के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है।

जनारसी देवी ने भावुक होकर बताया कि परिवार को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पति को पेंशन नहीं मिलने के कारण घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। परिवार को उम्मीद है कि प्रमाण पत्र में सुधार होने के बाद उन्हें सरकारी सहायता मिल सकेगी।

आधार कार्ड में जन्मतिथि की गड़बड़ी

मामले में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. पीके तिवारी ने आधार कार्ड में दर्ज जन्मतिथि और अन्य जानकारियों में त्रुटि की बात कही। उनके अनुसार, गलत जानकारी के कारण प्रमाण पत्र में दिव्यांगता का प्रतिशत प्रभावित होने की आशंका है और इसमें सुधार की संभावना है।

डॉक्टर ने यह भी बताया कि जियालाल के पैर में पहले चोट लगी थी और अब वे रॉड के सहारे चलते हैं। अस्पताल स्तर पर उनके मामले की जांच और आवश्यक सुधार की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही गई है।

40 प्रतिशत दिव्यांगता का मानदंड

शिवहर प्रखंड कार्यालय के आरटीपीएस काउंटर पर मौजूद कर्मी गीतांजलि कुमारी ने बताया कि संबंधित दिव्यांगता पेंशन के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार कम से कम 40 प्रतिशत दिव्यांगता का मानदंड लागू होता है। उन्होंने कहा कि प्रमाण पत्र में आवश्यक सुधार अस्पताल स्तर से ही किया जाना है।

इसका अर्थ है कि प्रमाण पत्र में दर्ज दिव्यांगता का प्रतिशत और अन्य विवरण सही होना जरूरी है। अंतिम पात्रता संबंधित योजना के नियमों और सक्षम प्राधिकारी के सत्यापन पर निर्भर करेगी।

अस्पताल ने सुधार का दिया भरोसा

सरोजा सीताराम अस्पताल के डाटा ऑपरेटर नवीन कुमार सिंह ने बताया कि अस्पताल प्रशासन मामले की जांच कर रहा है। उनके अनुसार, प्रमाण पत्र में मौजूद त्रुटियों को दूर करने के लिए प्रक्रिया अपनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर यह पता लगाया जाएगा कि सुधार किस तरह किया जा सकता है।

अस्पताल की ओर से कार्ड में सुधार का प्रयास करने का आश्वासन दिया गया है। हालांकि, प्रमाण पत्र में सुधार और पेंशन स्वीकृत होने की अंतिम स्थिति की पुष्टि होना अभी बाकी है।

नगर परिषद सभापति ने की पहल

लगातार कार्यालयों के चक्कर काटने के बाद जियालाल पासवान और उनकी पत्नी शिवहर नगर परिषद के सभापति राजन नंदन सिंह के पास पहुंचे। सभापति ने अस्पताल प्रबंधन से फोन पर बात कर प्रमाण पत्र और अन्य विवरणों में सुधार करने का अनुरोध किया। इसके बाद उन्होंने दंपत्ति को अपनी गाड़ी से अस्पताल भी भेजा।

सभापति ने बताया कि जियालाल के आधार कार्ड में उम्र कम दर्ज होने की समस्या भी सामने आई है। उनके मुताबिक, गलत उम्र दर्ज होने के कारण दंपत्ति वृद्धावस्था पेंशन का लाभ भी नहीं ले पा रहे हैं। उन्होंने आधार संबंधी त्रुटि दूर कराने का प्रयास करने की बात कही, ताकि पात्रता के अनुसार परिवार के किसी सदस्य को पेंशन का लाभ मिल सके।

अब सुधार और पेंशन शुरू होने का इंतजार

छह महीने से जारी भागदौड़ के बीच जियालाल पासवान के परिवार को अब प्रमाण पत्र और आधार कार्ड की त्रुटियां दूर होने की उम्मीद है। अस्पताल और नगर परिषद स्तर पर पहल किए जाने के बाद परिवार को राहत मिलने की आशा जगी है।

यह मामला सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में दस्तावेजों की शुद्धता और विभागों के बीच समन्वय के महत्व को सामने लाता है। जरूरतमंद लोगों को समय पर मार्गदर्शन और समस्या का समाधान मिलना जरूरी है, ताकि वे अपने अधिकारों के लिए लंबे समय तक परेशान न हों।

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