Saturday, October 10, 2026

ध्रुव राठी की नागरिकता और राजनीतिक गतिविधियों पर सवाल, पूर्व IPS अधिकारी ने केंद्रीय गृह सचिव को लिखा पत्र.

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ध्रुव राठी की नागरिकता और राजनीतिक गतिविधियों पर सवाल, पूर्व IPS अधिकारी ने केंद्रीय गृह सचिव को लिखा पत्र

नई दिल्ली/बेंगलुरु, 10 अक्टूबर 2026: मशहूर यूट्यूबर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। बेंगलुरु के पूर्व पुलिस कमिश्नर और सेवानिवृत्त IPS अधिकारी भास्कर राव ने केंद्रीय गृह सचिव को पत्र लिखकर उनकी नागरिकता, वीजा नियमों और भारत में राजनीतिक गतिविधियों में भागीदारी को लेकर सवाल उठाए हैं।

यह मामला 8 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की ओर से आयोजित इस प्रदर्शन में ध्रुव राठी शामिल हुए थे और उन्होंने मंच से संबोधन भी किया था। अपने भाषण में उन्होंने निर्वाचन आयोग की आलोचना की थी।

भास्कर राव ने पत्र में क्या सवाल उठाए?

रिपोर्ट के मुताबिक, भास्कर राव ने अपने पत्र में दावा किया है कि ध्रुव राठी जर्मन नागरिक हैं। उन्होंने इस आधार पर भारत में उनकी राजनीतिक गतिविधियों और विरोध प्रदर्शनों में भागीदारी को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

पूर्व IPS अधिकारी का कहना है कि संबंधित प्रदर्शन केवल सामाजिक या निजी कार्यक्रम नहीं था, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज से जुड़ा राजनीतिक आंदोलन था। उन्होंने गृह सचिव से इस मामले में लागू नागरिकता और वीजा संबंधी नियमों की जांच करने का आग्रह किया है।

SIR विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है विवाद

8 अक्टूबर को बेंगलुरु में आयोजित प्रदर्शन का मुद्दा विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR था। इस प्रक्रिया को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों की ओर से बहस और विरोध देखने को मिल रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, ध्रुव राठी ने प्रदर्शन में भाग लेकर निर्वाचन आयोग की आलोचना की। इसी भागीदारी को लेकर भास्कर राव ने केंद्र सरकार के समक्ष सवाल उठाए हैं।

आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी

फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भास्कर राव के पत्र पर कोई कार्रवाई की है या नहीं। ध्रुव राठी की नागरिकता, उनके वीजा की शर्तों और संबंधित गतिविधियों की कानूनी स्थिति के बारे में भी आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।

केवल किसी विरोध प्रदर्शन में शामिल होने या किसी संवैधानिक संस्था की आलोचना करने से अपने-आप किसी व्यक्ति द्वारा कानून का उल्लंघन साबित नहीं होता। मामले में किसी भी निष्कर्ष से पहले संबंधित नियमों, तथ्यों और आधिकारिक पक्ष को देखना जरूरी होगा।

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